बांदा में छलका धीरेंद्र शास्त्री का दर्द
बांदा | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों उत्तर प्रदेश के बांदा में हनुमंत कथा कर रहे हैं। कथा के चौथे दिन एक ऐसा भावुक क्षण आया जब ‘महाराज जी’ ने अपने वैभवशाली वर्तमान के पीछे छिपे संघर्षपूर्ण अतीत के पन्ने खोल दिए। हजारों की भीड़ के सामने उन्होंने अपने बचपन की गरीबी का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब उनकी हैसियत 20 रुपये की चप्पल खरीदने की भी नहीं थी।
“फटी साड़ी सिलकर पहनती थीं माँ”
बांदा में कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने अपने परिवार की स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि गरीबी का दौर बहुत लंबा और कष्टकारी था। उन्होंने कहा, “आज जो लोग मुझे देखते हैं, उन्हें शायद यह वैभव दिखता है, लेकिन मेरी असल औकात वह थी जब मेरे पिता जी के पास एक पुरानी टूटी हुई साइकिल थी। मेरी माँ के पास पहनने को ढंग के कपड़े नहीं थे; वह अपनी फटी हुई साड़ी को धागे से सिल-सिलकर पहना करती थीं।”
उन्होंने आगे भावुक होते हुए कहा कि कई बार हालात इतने बदतर हो जाते थे कि घर में अन्न का एक दाना नहीं होता था। उन्होंने बताया, “हमारा पूरा परिवार तीन-तीन दिन तक भूखा रहता था। वह दिन आज भी मेरी आंखों के सामने तैर जाते हैं।”
“बजरंग बली की कृपा ने बदली तकदीर”
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी इस पूरी यात्रा का श्रेय अपने ईष्ट भगवान हनुमान (बजरंग बली) और अपने दादा गुरु को दिया। उन्होंने कहा कि जब इंसान के पास कुछ नहीं होता, तब केवल विश्वास ही सहारा होता है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी निष्ठा और भक्ति ने उन्हें उस अंधकारमय दौर से बाहर निकाला। “यह मेरी कोई उपलब्धि नहीं है, यह केवल हनुमान जी की कृपा है कि आज एक गरीब का बेटा सनातन धर्म की ध्वजा लेकर चल रहा है।”
विरोधियों को दिया कड़ा संदेश
अपने संघर्ष की कहानी सुनाते हुए शास्त्री ने उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जो अक्सर उनके चमत्कार या उनके दरबार पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, वे एक गरीब के संघर्ष को कभी नहीं समझ सकते। उन्होंने साफ किया कि उनका उद्देश्य पैसा कमाना नहीं, बल्कि हिंदू धर्म को जगाना और गरीबों की सेवा करना है।
बांदा में उमड़ा जनसैलाब
हनुमंत कथा के चौथे दिन बांदा और आसपास के जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच धीरेंद्र शास्त्री ने न केवल धार्मिक प्रवचन दिए, बल्कि सामाजिक समरसता और हिंदू राष्ट्र की अपनी मांग को भी दोहराया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विपरीत परिस्थितियों में घबराएं नहीं, बल्कि अपने इष्ट पर भरोसा रखकर कर्म करते रहें।
न्यूज़ विश्लेषण: सादगी बनाम विवाद
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से वे अपने अनुयायियों के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं। अपनी गरीबी का जिक्र करके वे यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि ईश्वर की भक्ति किसी भी आम इंसान का भाग्य बदल सकती है।
मुख्य बिंदु जो कथा में छाए रहे:
- गरीबी का संघर्ष: चप्पल खरीदने तक के पैसे न होना।
- पारिवारिक स्थिति: मां का फटी साड़ी पहनना और पिता की टूटी साइकिल।
- भूख का दर्द: परिवार का लगातार तीन दिनों तक निराहार रहना।
- आध्यात्मिक मोड़: बजरंग बली की कृपा से जीवन में आया बदलाव।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री की यह कथा अगले कुछ दिनों तक बांदा में जारी रहेगी, जिसमें और भी कई बड़े खुलासे और धार्मिक चर्चाएं होने की उम्मीद है।
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