15 से 17 फरवरी तक महोत्सव का आगाज
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
बांदा। बुंदेलखंड की गौरवशाली विरासत और अजेय शौर्य के प्रतीक ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में एक बार फिर उत्सव की लहर दौड़ने वाली है। आगामी 15 से 17 फरवरी तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ‘कालिंजर महोत्सव’ की तैयारियां जिला प्रशासन ने पूरी कर ली हैं। इस वर्ष का महोत्सव न केवल अपनी सांस्कृतिक भव्यता के लिए जाना जाएगा, बल्कि इसे जन-जागरूकता और सरकारी संवाद का एक सशक्त मंच भी बनाया जा रहा है। जिलाधिकारी के निर्देशन में विभिन्न विभागों को इस आयोजन से जोड़ा गया है, ताकि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
विरासत और विकास का अनूठा संगम
कालिंजर महोत्सव केवल नाच-गाने या मेलों तक सीमित नहीं रहेगा। इस बार शासन की मंशा के अनुरूप, महोत्सव परिसर में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा भव्य स्टाल और जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीणों और युवाओं को केंद्र व प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से रूबरू कराना है।
कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। महोत्सव के दौरान संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी स्वयं मौजूद रहेंगे, जो जनता के साथ सीधा संवाद करेंगे और मौके पर ही समस्याओं का निस्तारण व योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे।
जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा
महोत्सव के तीनों दिन अलग-अलग विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- महिला सशक्तिकरण: मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा कानूनों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
- कृषि एवं नवाचार: बुंदेलखंड के किसानों को मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती और ड्रिप सिंचाई तकनीक के बारे में विशेषज्ञ जानकारी देंगे।
- स्वास्थ्य शिविर: आयुष और स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जांच शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सेवाएं देंगे।
इन कार्यक्रमों में नोडल अधिकारियों की भागीदारी अनिवार्य की गई है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता के बीच सीधा समन्वय स्थापित हो सके।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
कालिंजर दुर्ग अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और नीलकंठ महादेव मंदिर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। महोत्सव के दौरान दुर्ग की दीवारों को दूधिया रोशनी से नहलाया जाएगा। सांस्कृतिक संध्याओं में स्थानीय लोक कलाकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। आल्हा गायन, दिवारी नृत्य और बुंदेली लोकगीत इस महोत्सव की जान होंगे। प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक कालिंजर पहुंचेंगे, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग और हस्तशिल्प को नई संजीवनी मिलेगी।
सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के चाक-चौबंद इंतजाम
भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। दुर्ग की चढ़ाई और मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। पेयजल, मोबाइल टॉयलेट और आकस्मिक चिकित्सा के लिए एम्बुलेंस की तैनाती की गई है। जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों के स्टालों पर सक्रिय रहें और किसी भी पर्यटक या आगंतुक को असुविधा न होने दें।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
कालिंजर महोत्सव न केवल संस्कृति का प्रदर्शन है, बल्कि यह बांदा और आसपास के क्षेत्रों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा करता है। स्थानीय दुकानदारों, गाइडों और परिवहन सेवा प्रदाताओं के लिए यह तीन दिन रोजगार का बड़ा जरिया बनते हैं। जिला प्रशासन की योजना है कि इस महोत्सव को आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर पर प्रमुखता से लाया जाए, ताकि विदेशी पर्यटकों का आवागमन भी बढ़ सके।
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.