रेल नीर गायब, 14 की बोतल 20 में बेच रहे वेंडर
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
कन्नौज: रेलवे की सुस्त कार्यप्रणाली और वेंडरों की मनमानी का खामियाजा इन दिनों कन्नौज रेलवे स्टेशन पर आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। यात्रा की थकान के बीच जब यात्री अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल मांगता है, तो उसे रेलवे का अधिकृत ‘रेल नीर’ नहीं, बल्कि घटिया दर्जे का ‘लोकल’ पानी थमाया जा रहा है। स्टेशन पर रेल नीर का कृत्रिम अभाव पैदा कर वेंडर यात्रियों की जेब पर डाका डाल रहे हैं और उनकी सेहत को खतरे में डाल रहे हैं।
रेल नीर गायब, मनमाने दाम पर ‘लोकल’ का राज
कन्नौज रेलवे स्टेशन से रोजाना हजारों की संख्या में यात्री लंबी दूरी की ट्रेनों का सफर तय करते हैं। नियमानुसार, रेलवे स्टेशनों पर ₹15 (एमआरपी) की दर पर एक लीटर ‘रेल नीर’ उपलब्ध होना चाहिए, जिसकी थोक कीमत करीब ₹14 पड़ती है। लेकिन हकीकत इसके उलट है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर स्थित स्टालों से रेल नीर पूरी तरह नदारद है।
जब यात्री पानी मांगते हैं, तो स्टॉल संचालक ‘पीछे से सप्लाई न आने’ का रटा-रटाया बहाना बना देते हैं। इसके बाद शुरू होता है वसूली का खेल। वेंडर यात्रियों को अनजान ब्रांड की लोकल बोतलें थमा देते हैं और ₹15 की जगह सीधे ₹20 वसूलते हैं। यानी प्यासे यात्री से प्रति बोतल ₹5 से ₹6 की अवैध वसूली खुलेआम की जा रही है।
न ISI मार्क, न शुद्धता की गारंटी: बीमारियों को न्योता
‘Truth India Times’ की पड़ताल में सामने आया कि जो लोकल ब्रांड की बोतलें बेची जा रही हैं, उनमें से अधिकतर पर न तो वैध ISI मार्क है और न ही उन पर शुद्धता की कोई गारंटी दी गई है। यात्री रमेश कुमार ने बताया, “मजबूरी में हमें यह पानी खरीदना पड़ता है क्योंकि स्टेशन पर दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इन बोतलों की सील भी संदिग्ध लगती है और पानी का स्वाद भी खराब है।”
हैरान करने वाली बात यह है कि ये बोतलें प्लेटफॉर्म पर घंटों धूप में रखी रहती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक की बोतलों को सीधे धूप में रखने से प्लास्टिक के हानिकारक रसायन पानी में घुल जाते हैं, जिससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और पेट की गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। रेलवे प्रशासन की नाक के नीचे यात्रियों को धीमा जहर परोसा जा रहा है।
रेलवे बोर्ड के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां
रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्टेशनों पर केवल अधिकृत ब्रांड का ही पानी बेचा जाना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में ‘ओवरचार्जिंग’ (एमआरपी से अधिक दाम) नहीं होनी चाहिए। कन्नौज स्टेशन पर हो रही यह मनमानी रेल प्रशासन की सतर्कता और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े करती है। क्या वेंडरों को स्थानीय रेल अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है? आखिर क्यों महीनों से रेल नीर की किल्लत दूर नहीं की जा रही?
यात्रियों में भारी रोष, कार्रवाई की मांग
स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक लूट नहीं बल्कि उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है। यात्रियों ने मांग की है कि उच्च अधिकारी औचक निरीक्षण करें और अवैध रूप से बेचे जा रहे लोकल ब्रांड के पानी को जब्त कर वेंडरों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
धूप में तपते प्लेटफॉर्म पर जब यात्री अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा खर्च कर पानी खरीदता है, तो उसे शुद्धता की उम्मीद होती है। लेकिन कन्नौज स्टेशन पर मिल रहा ‘अमानक’ पानी प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है।
Truth India Times की विशेष टिप्पणी
रेलवे को ‘अमृत भारत’ स्टेशनों के सपने दिखाने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं जैसे ‘पीने के साफ पानी’ पर ध्यान देना होगा। अगर स्टेशन पर रेल नीर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो यह सिस्टम की विफलता है। वेंडरों की जेब भरने के लिए यात्रियों की सेहत को दांव पर लगाना बर्दाश्त से बाहर है। प्रशासन को इस ‘वॉटर माफिया’ पर तत्काल लगाम लगानी चाहिए।
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