कन्नौज के 172 गांवों की बदलेगी तकदीर: 216 किमी सड़कों के लिए ₹25.25 करोड़ मंजूर, मार्च से शुरू होगा महाभियान

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद में ग्रामीण विकास को एक नई रफ्तार मिलने वाली है। जनपद के ग्रामीण अंचलों में लंबे समय से बदहाल सड़कों से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत जिले की बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 216 किलोमीटर लंबी सड़कों के नवीनीकरण की परियोजना को हरी झंडी दे दी है।

इस परियोजना के लिए शासन ने कुल 25 करोड़ 25 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है। खास बात यह है कि कागजी कार्रवाई से आगे बढ़ते हुए विभाग के पास 5 करोड़ रुपये की पहली किस्त पहुंच भी चुकी है, जिससे धरातल पर काम शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

सड़कों का जाल बिछाने की तैयारी: 172 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

कन्नौज जिले के विकास खंडों में बिखरे हुए 172 गांवों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। पिछले काफी समय से जिले के कई संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके थे, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया था। लोक निर्माण विभाग (PWD) की इस योजना के तहत इन गांवों को जोड़ने वाली टूटी-फूटी सड़कों का पूरी तरह कायाकल्प किया जाएगा।

योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल सड़कों की मरम्मत करना है, बल्कि उनका सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण (Renewal) करना भी है। इससे जनपद के दूर-दराज के इलाकों की कनेक्टिविटी जिला मुख्यालय और मुख्य बाजारों से बेहतर हो जाएगी।

टेंडर प्रक्रिया में तेजी: मार्च से गरजेंगी मशीनें

सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने अपनी कमर कस ली है। विभाग के अधिशासी अभियंता ने जानकारी दी है कि स्वीकृत बजट के आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

अधिकारियों का लक्ष्य है कि फरवरी के अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं और टेंडर आवंटन का कार्य पूरा कर लिया जाए। ताकि अगले महीने, यानी मार्च 2026 से ही निर्माण और डामरीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जा सके। विभाग की योजना है कि मानसून आने से पहले मुख्य सड़कों का कार्य पूरा कर लिया जाए ताकि बरसात में ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव की समस्या न झेलनी पड़े।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्टर डोज

किसी भी क्षेत्र का विकास वहां की सड़कों की हालत पर निर्भर करता है। कन्नौज, जो अपनी सुगंध और कृषि उत्पादों (विशेषकर आलू) के लिए विश्व प्रसिद्ध है, वहां की ग्रामीण सड़कों का दुरुस्त होना बेहद जरूरी है।

  1. किसानों को लाभ: बेहतर सड़कें होने से किसान अपनी उपज (आलू और अन्य फसलें) समय पर और कम लागत में मंडियों तक पहुंचा सकेंगे। वर्तमान में खराब सड़कों के कारण वाहनों का किराया अधिक लगता है और माल खराब होने का डर भी रहता है।
  2. व्यापारिक गतिविधियां: ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए माल की आवाजाही सुगम होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  3. शिक्षा और स्वास्थ्य: अच्छी सड़कें होने से आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस का गांवों तक पहुंचना आसान होगा। साथ ही, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं का समय बचेगा और उनका सफर सुरक्षित होगा।

“जनता को जल्द मिलेगी राहत” – दीपेश अस्थाना

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दीपेश अस्थाना ने इस परियोजना पर उत्साह जताते हुए कहा कि शासन की प्राथमिकता जनता को गड्ढा मुक्त और सुरक्षित सड़कें उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया:

“हमें शासन से बजट की सैद्धांतिक और वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। 5 करोड़ की पहली किस्त प्राप्त होते ही हमने प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां तेज कर दी हैं। टेंडर प्रक्रिया शुरू है और हमारा पूरा प्रयास है कि मार्च के प्रथम सप्ताह से ही सड़कों पर निर्माण कार्य दिखने लगे। गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”

निष्कर्ष: विकास की ओर बढ़ते कदम

कन्नौज की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न केवल धूल और गड्ढों से निजात मिलेगी, बल्कि यह जनपद के समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। प्रशासन की इस सक्रियता और बजट की उपलब्धता ने ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगाई है। अब सभी की निगाहें मार्च महीने पर टिकी हैं, जब इन 216 किलोमीटर लंबी सड़कों का कायाकल्प शुरू होगा।

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