कानपुर में ‘हवाई हमला’: धमाकों की गूंज के बीच जमीन पर लेटे लोग, सायरन बजते ही ब्लैकआउट और शुरू हुआ रेस्क्यू

कानपुर के जीआईसी चुन्नीगंज ग्राउंड में शनिवार शाम छह बजे अचानक हुए तेज धमाकों और युद्धस्तर की हलचल ने पूरे इलाके को चौंका दिया। आसमान में गूंजते सायरन और ‘हवाई हमला’ (Air Raid) होने के सरकारी एनाउंसमेंट के साथ ही मैदान में मौजूद लोग तुरंत जमीन पर लेट गए और अपने कानों को हाथों से ढक लिया। कुछ ही पलों में पूरे क्षेत्र की बिजली गुल हो गई और ‘ब्लैकआउट’ छा गया। हालांकि, यह कोई वास्तविक हमला नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक वृहद ‘मॉकड्रिल’ थी, जिसका उद्देश्य युद्ध जैसी आपात स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा और राहत कार्यों की तैयारी को परखना था।

सायरन की गूंज और अचानक फैला सन्नाटा

शाम ठीक छह बजे जैसे ही पहला लॉन्ग-रेंज सायरन बजा, प्रशासन और नागरिक सुरक्षा की टीमें सक्रिय हो गईं। लाउडस्पीकर के माध्यम से नागरिकों को सूचित किया गया कि शत्रु देश द्वारा हवाई हमला संभावित है, अतः सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें। ड्रिल के दौरान दिखाया गया कि कैसे हमले की स्थिति में रोशनी को बंद करना (ब्लैकआउट) अनिवार्य है ताकि दुश्मन के विमानों को शहरी आबादी का सटीक अंदाजा न लग सके। बिजली कटते ही पूरा जीआईसी ग्राउंड और आसपास का हिस्सा अंधेरे में डूब गया, जिससे माहौल बेहद गंभीर और वास्तविक युद्ध जैसा प्रतीत होने लगा।

धमाकों के बीच मलबे से रेस्क्यू का प्रदर्शन

मैदान में कृत्रिम धमाके किए गए जिससे धुआं और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। यह दर्शाया गया कि हवाई हमले में इमारतें गिर गई हैं और लोग मलबे के नीचे दबे हैं। इसके तुरंत बाद नागरिक सुरक्षा के ‘वॉर्डन सर्विस’ और ‘रेस्क्यू स्क्वायड’ ने मोर्चा संभाला। हेलमेट, टॉर्च और स्ट्रेचर के साथ स्वयंसेवकों ने मलबे में दबे घायलों को निकालने का काम शुरू किया। इस दौरान अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) की गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभ्यास किया गया।

घायलों का उपचार और ट्राइएज सिस्टम

मॉकड्रिल में केवल बचाव ही नहीं, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। मलबे से निकाले गए घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद तुरंत एंबुलेंस के जरिए अस्थायी अस्पताल ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने ‘ट्राइएज’ (Triage) पद्धति का पालन किया, जिसमें घायलों को उनकी स्थिति के अनुसार विभाजित किया गया ताकि सबसे गंभीर मरीज को प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिल सके। पुलिस बल ने इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभ्यास किया।

नागरिक सुरक्षा की ‘वॉर्डन सर्विस’ की भूमिका

इस पूरे आयोजन में नागरिक सुरक्षा विभाग के वॉर्डनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रमुख सचिव, नागरिक सुरक्षा के निर्देशों पर आयोजित इस ड्रिल में दिखाया गया कि कैसे वॉर्डन घर-घर जाकर लोगों को सुरक्षित ठिकानों (ट्रेंच या बेसमेंट) में शरण लेने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें सिखाया गया कि हमले के दौरान यदि कोई व्यक्ति खुले मैदान में है, तो उसे पेट के बल लेट जाना चाहिए और अपने मुंह में रुमाल या कोई कपड़ा रखना चाहिए ताकि धमाके के दबाव से फेफड़ों को नुकसान न पहुंचे।

प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों का निरीक्षण

जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और नागरिक सुरक्षा के उप-नियंत्रकों ने पूरी प्रक्रिया का सूक्ष्म निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि कानपुर जैसे औद्योगिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर के लिए ऐसी मॉकड्रिल अत्यंत आवश्यक है। ड्रिल के दौरान सायरन की आवाज की पहुंच, रेस्क्यू टीम का रिस्पॉन्स टाइम और विभिन्न विभागों (पुलिस, स्वास्थ्य, फायर और बिजली विभाग) के बीच समन्वय की बारीकी से जांच की गई।

जनता में जागरूकता और सतर्कता का संदेश

मॉकड्रिल को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी एकत्र हुए थे। उन्हें बताया गया कि हवाई हमले के समय घबराना नहीं चाहिए बल्कि संयम से काम लेना चाहिए। अभ्यास का समापन ‘ऑल क्लियर’ सायरन के साथ हुआ, जिसके बाद बिजली बहाल की गई और स्थिति को सामान्य घोषित किया गया।

नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार, इस प्रकार के युद्धाभ्यास नियमित अंतराल पर किए जाते रहेंगे ताकि किसी भी आकस्मिक संकट के समय जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके। जीआईसी ग्राउंड में हुई इस ड्रिल ने यह साबित कर दिया कि कानपुर का प्रशासनिक ढांचा और स्वयंसेवक किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

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