उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार; साथी गार्ड ने सीने में मारी गोली
बिल्हौर (कानपुर) | प्रलभ शरण चौधरी Truth India Times
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद अंतर्गत बिल्हौर क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ महर्षि महेश योगी कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में महज ‘अलाव’ में लकड़ी रखने जैसे तुच्छ विवाद में एक सुरक्षा गार्ड ने अपने ही साथी गार्ड के सीने में अपनी दोनाली बंदूक से गोली मारकर उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी। इस खूनी खेल ने न केवल एक निर्दोष की जान ली, बल्कि एक ऐसी लाचार पत्नी को बेसहारा छोड़ दिया जो कैंसर से जूझ रही है और एक मासूम बेटी के भविष्य पर अंधेरा छा दिया है।
अलाव की वह मामूली तकरार जो ‘काल’ बन गई
घटना शुक्रवार देर रात करीब 2:30 बजे की है। औरंगपुर सांभी गांव निवासी 45 वर्षीय निर्मल सिंह चंदेल उर्फ नीरज निर्माणाधीन कृषि विश्वविद्यालय में सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी पर तैनात थे। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए निर्मल कुछ लकड़ियां इकट्ठा कर लाए थे और अलाव जलाकर ताप रहे थे। इसी दौरान वहीं तैनात दूसरा गार्ड अनिरुद्ध द्विवेदी वहां पहुँचा और निर्मल की लाई हुई लकड़ियों को अलाव में डालने लगा।
निर्मल ने बस इतना कहा, “मेरी मेहनत से लाई गई लकड़ियां तुम क्यों जला रहे हो? खुद क्यों नहीं लाते?” यह मामूली सी बात अनिरुद्ध को इतनी नागवार गुजरी कि दोनों के बीच तीखी गाली-गलौज शुरू हो गई। विवाद बढ़ा तो अनिरुद्ध ने अपना आपा खो दिया और अपनी लाइसेंसी दोनाली बंदूक तानकर निर्मल के सीने के बाईं ओर सीधे गोली दाग दी। गोली लगते ही निर्मल लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
बेटी की चीखें कलेजा चीर रहीं: “अब मां की दवा कौन लाएगा?”
निर्मल की मौत केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि एक पूरे संघर्षशील परिवार का विनाश है। निर्मल के घर में उनकी बुजुर्ग मां राधा सिंह, 12 साल की मासूम बेटी तनिष्का और कैंसर से पीड़ित पत्नी पुष्पा हैं। पुष्पा पिछले 5 वर्षों से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ रही हैं और पिछले 6 महीनों से उनके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया है।
बेटी तनिष्का का रो-रोकर बुरा हाल है। उसने सिसकियों के बीच बताया, “पापा दिनभर मां की सेवा करते थे, उन्हें खाना खिलाते और दवा देते थे। मां के इलाज के लिए पैसों की तंगी थी, इसलिए उन्होंने रात में गार्ड की नौकरी शुरू की थी। वो शाम 6:30 बजे ड्यूटी जाते थे ताकि दिन में मां का ख्याल रख सकें। अब मेरे पापा चले गए, तो मेरी अपाहिज मां को कौन संभालेगा? उनका इलाज कैसे होगा?” मासूम तनिष्का खुद रोते हुए अपनी बेसुध मां को चुप कराने की कोशिश कर रही है, जिसे देख वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
आरोपी फरार, घर पर लटका ताला
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अनिरुद्ध द्विवेदी मौके से भागने की कोशिश करने लगा। जब अन्य गार्डों ने उसे पकड़ना चाहा, तो वह बंदूक लहराते हुए जंगल की ओर फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर निर्मल को सीएचसी बिल्हौर पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी के घर पर ताला लटका हुआ है और उसका पूरा परिवार गांव से फरार है।
पुलिस की कार्रवाई: हत्या का मुकदमा दर्ज
बिल्हौर थाना इंस्पेक्टर अशोक कुमार सरोज ने बताया कि मृतक के छोटे भाई रोहित सिंह की तहरीर पर आरोपी अनिरुद्ध द्विवेदी के खिलाफ हत्या (IPC/BNS की सुसंगत धाराओं) का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की तीन टीमें आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने विश्वास दिलाया है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और उसकी लाइसेंसी बंदूक को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मानवता पर सवाल: क्या जान इतनी सस्ती है?
इस घटना ने समाज में बढ़ते आक्रोश और असहिष्णुता को उजागर किया है। एक व्यक्ति जो अपनी बीमार पत्नी की जान बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था, उसकी जान महज कुछ लकड़ियों के विवाद में ले ली गई। यह घटना बिल्हौर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग मृतक के परिवार के लिए शासन-प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं, ताकि कैंसर पीड़ित पत्नी का इलाज जारी रह सके।
प्रलभ शरण चौधरी की विशेष रिपोर्ट: निर्मल सिंह चंदेल का बलिदान उनके परिवार के प्रति उनके समर्पण की कहानी है। एक मासूम बेटी के ये सवाल कि ‘अब हमें कौन संभालेगा’, पूरे तंत्र और समाज को कटघरे में खड़ा करते हैं। Truth India Times पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और न्याय मिलने तक इस खबर पर नजर बनाए रखेगा।
दुखद और निष्पक्ष खबरों के लिए – ट्रुथ इंडिया टाइम्स
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