कानपुर नगर निगम सदन में 11 प्रस्तावों पर मुहर: नामांतरण में देरी पर लगेगा भारी जुर्माना, हर वार्ड को मिलेंगे 4-4 नए सफाईकर्मी

कानपुर। कानपुर नगर निगम का सदन शुक्रवार को हंगामे और गहमागहमी के बीच संपन्न हुआ। महापौर प्रमिला पांडेय की अध्यक्षता और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की मौजूदगी में शहर के विकास और व्यवस्था से जुड़े कुल 11 महत्वपूर्ण प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे गए। पार्षदों के तीखे विरोध और चर्चा के बाद इन सभी प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इन प्रस्तावों में सबसे महत्वपूर्ण नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया में सख्ती और शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया गया है।

नामांतरण (Mutation) में लेटलतीफी पड़ेगी भारी

सदन में पास हुए प्रस्तावों में जनता से जुड़ा सबसे बड़ा फैसला नामांतरण शुल्क और समय सीमा को लेकर है। अब नामांतरण कराने में जितनी देरी की जाएगी, भवन स्वामियों को उतना ही अधिक जुर्माना भुगतना होगा।

  • नया नियम: अब रजिस्ट्री होने के एक तय समय सीमा के भीतर नगर निगम में नामांतरण के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इसमें देरी करता है, तो विलंब शुल्क (Penalty) को कई गुना बढ़ा दिया गया है।
  • उद्देश्य: नगर निगम का मानना है कि नामांतरण में देरी से नगर निगम के राजस्व की हानि होती है और कई बार मालिकाना हक को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है। इस कड़े कानून से लोग समय पर आवेदन करने के लिए प्रेरित होंगे।

सफाई व्यवस्था को ‘बूस्टर’: हर वार्ड में 4-4 नए सफाईकर्मी

शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षदों ने सदन में जमकर नारेबाजी की। विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी सफाईकर्मियों की कमी का मुद्दा उठाया। इस पर महापौर ने बड़ी घोषणा करते हुए प्रस्ताव पास किया कि अब शहर के प्रत्येक वार्ड में 4-4 अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती की जाएगी।

  • बीट प्रणाली में सुधार: ये सफाईकर्मी विशेष रूप से उन गलियों और क्षेत्रों में सफाई सुनिश्चित करेंगे जहाँ बड़ी गाड़ियाँ नहीं पहुँच पाती हैं।
  • संसाधनों की वृद्धि: सफाईकर्मियों के साथ-साथ कूड़ा उठाने वाले संसाधनों और मशीनों की संख्या बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही, विपक्ष ने घेरा

सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी पार्षदों ने जलभराव, खराब स्ट्रीट लाइटों और हाउस टैक्स की विसंगतियों को लेकर शोर-शराबा शुरू कर दिया। कई पार्षद वेल में आ गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। महापौर प्रमिला पांडेय ने बीच-बचाव करते हुए आश्वासन दिया कि विकास कार्यों में किसी भी वार्ड के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। भारी शोरगुल के बीच ही सचिव ने 11 प्रस्तावों को पढ़ा, जिन्हें बहुमत के आधार पर पास घोषित कर दिया गया।

30 दिनों का समय: आपत्तियां आमंत्रित

नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सदन में पारित किए गए इन 11 प्रस्तावों को अब सार्वजनिक किया जाएगा। आगामी 30 दिनों तक इन पर आम जनता और संबंधित पक्षों से आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इन आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही इन नियमों को गजट में प्रकाशित कर अंतिम रूप से लागू किया जाएगा।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

  1. अवैध विज्ञापन पर सख्ती: शहर में बिना अनुमति लगे होर्डिंग्स और विज्ञापनों पर जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव।
  2. पार्क गोद लेने की नीति: निजी संस्थाओं और समितियों को पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया का सरलीकरण।
  3. स्ट्रीट वेंडर जोन: शहर के प्रमुख चौराहों को जाम मुक्त करने के लिए वेंडिंग जोन के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा।
  4. मृत पशु निस्तारण: शहर में मृत पशुओं को उठाने और उनके निस्तारण की व्यवस्था को और आधुनिक बनाने का निर्णय।

“जनता के हित में लिए गए फैसले” – महापौर

सदन के समापन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा, “हमारा लक्ष्य कानपुर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना है। नामांतरण में जुर्माने का प्रावधान पारदर्शिता लाने के लिए किया गया है। वहीं, सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने से वार्डों की गलियां साफ रहेंगी। विपक्ष का काम विरोध करना है, लेकिन हमने विकास का रास्ता चुना है।”

प्रलभ शरण चौधरी की विशेष रिपोर्ट: कानपुर नगर निगम के इस फैसले का असर आने वाले दिनों में शहर के राजस्व और स्वच्छता पर साफ दिखाई देगा। विशेषकर नामांतरण के नए नियमों ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है जो वर्षों तक फाइलें दबाए रखते थे। अब देखना यह होगा कि 30 दिनों की आपत्ति अवधि में जनता इन कड़े फैसलों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।


शहर की सरकार, हर खबर पर नज़र – ट्रुथ इंडिया टाइम्स

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