कानपुर गैंगरेप: पीड़िता के भाई को धमकाने वाला अमित त्रिवेदी गिरफ्तार, सीतापुर से लाई पुलिस; बोला— “दरोगा का लेटर पढ़कर लगा वो निर्दोष है”

कानपुर। सचेंडी गैंगरेप कांड में एक तरफ मुख्य आरोपी दरोगा अमित मौर्य अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, वहीं दूसरी ओर पीड़िता के परिवार को डराने-धमकाने वालों पर पुलिस का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। कानपुर पुलिस ने पीड़िता के भाई को फोन पर जान से मारने की धमकी देने वाले आरोपी अमित त्रिवेदी को सीतापुर से गिरफ्तार कर लिया है। देर रात पुलिस उसे कानपुर लेकर पहुंची, जहां पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासे किए हैं, उन्होंने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है।

सीतापुर से दबोचा गया आरोपी, दरोगा के समर्थन में दी थी धमकी

कानपुर पुलिस की एक विशेष टीम ने सर्विलांस की मदद से आरोपी अमित त्रिवेदी की लोकेशन सीतापुर में ट्रेस की थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के भाई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि एक अनजान व्यक्ति उसे फोन पर लगातार धमका रहा है और केस वापस न लेने पर पूरे परिवार को खत्म करने की बात कह रहा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में खुलासा: “सोशल मीडिया पर लेटर पढ़कर हुआ भावुक”

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी अमित त्रिवेदी ने बताया कि उसका इस मामले से कोई सीधा व्यक्तिगत संबंध नहीं है। उसने पुलिस को बताया कि उसने सोशल मीडिया पर आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्य का वह पत्र (लेटर) पढ़ा था, जिसमें दरोगा ने खुद को निर्दोष बताते हुए सीबीआई (CBI) जांच की मांग की थी।

आरोपी ने दावा किया, “मैंने सोशल मीडिया पर पीड़िता के भाई का वीडियो और दरोगा का वायरल लेटर देखा। लेटर पढ़ने के बाद मुझे लगा कि दरोगा निर्दोष है और उसे फंसाया जा रहा है। इसी आवेश में आकर मैंने पीड़िता के भाई को फोन लगा दिया।” हालांकि, पुलिस आरोपी के इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रही है और यह जांच कर रही है कि क्या वह दरोगा का कोई करीबी है या किसी के इशारे पर गवाहों को डराने की कोशिश कर रहा था।


पूरा प्रकरण: रक्षक के भक्षक बनने की वो खौफनाक दास्तां

यह मामला 5 जनवरी की रात का है, जब सचेंडी इलाके में 14 साल की एक मासूम बच्ची के साथ एक दरोगा और उसके साथी ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता के अनुसार, वह घर के पास तालाब की ओर गई थी, तभी स्कॉर्पियो सवार दरोगा अमित मौर्य और कथित यूट्यूबर शिवबरन ने उसे अगवा कर लिया और रेलवे पटरी के पास ले जाकर दरिंदगी की।

दरोगा की फरार फरारी और पुलिस की भूमिका पर सवाल हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद जब पीड़िता ने थाने में दरोगा की पहचान की, तो आरोपी दरोगा अमित मौर्य पुलिसकर्मियों की आंखों के सामने से ही भाग निकला। तब से लेकर अब तक पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इस बीच, दरोगा ने एक पत्र वायरल कर खुद को साजिश का शिकार बताया है, जिसे आधार बनाकर अब अमित त्रिवेदी जैसे लोग पीड़ित परिवार को धमका रहे हैं।


पीड़ित परिवार पर चौतरफा दबाव

पीड़िता का परिवार पहले से ही बेहद गरीब और असहाय है। पिता दिव्यांग हैं और मां की मृत्यु हो चुकी है। घर की पूरी जिम्मेदारी संभालने वाली 14 साल की बिटिया अब गहरे सदमे में है। परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें न केवल बाहरी लोग, बल्कि आरोपी शिवबरन के परिजन भी समझौते के लिए धमका रहे हैं। उन्हें 5-10 लाख रुपये का लालच दिया जा रहा है और मना करने पर ‘थाने न पहुँच पाने’ की धमकी दी जा रही है।

अजय राय ने भी उठाए थे सवाल

बीते दिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी और पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “पुलिस सरकार के इशारे पर रक्षकों को बचा रही है और पीड़ितों को डरा रही है।”

कानपुर पुलिस का पक्ष

कानपुर पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि अमित त्रिवेदी की गिरफ्तारी एक संदेश है कि पीड़ित परिवार को परेशान करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह फरार दरोगा अमित मौर्य के संपर्क में था या नहीं।

फिलहाल, मुख्य आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग जिलों में दबिश दे रही हैं। लेकिन जब तक मुख्य आरोपी नहीं पकड़ा जाता, तब तक पीड़ित परिवार की सुरक्षा और न्याय पर सवाल बने रहेंगे।

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