कानपुर में 'गुंडाराज' या पुलिस का सफेद झूठ? ज्वेलर्स कारोबारी की कनपटी पर तमंचा सटाकर लाखों की लूट
कानपुर (बिठूर)। औद्योगिक नगरी कानपुर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब व्यापारी अपनी दुकान बढ़ाकर घर सुरक्षित नहीं पहुँच पा रहे हैं। बिठूर थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक ज्वेलर्स और साड़ी कारोबारी अमित गुप्ता के साथ हुई सनसनीखेज लूट ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ पीड़ित व्यापारी ‘तमंचा और लूट’ की चीख-पुकार मचा रहा है, वहीं पुलिस के आला अधिकारी इसे ‘कोहरे का डर’ बताकर मामले को दबाने में जुटे हैं। आखिर खाकी सच को क्यों छिपाना चाहती है?
वारदात: एल्डिंको टिकरा के पास ‘साहब’ का खौफनाक अनुभव
कुरसौली निवासी अमित गुप्ता पनकी रतनपुर चौराहे पर ‘परी ज्वेलर्स’ के नाम से प्रतिष्ठान चलाते हैं। बुधवार रात करीब 10 बजे जब वह अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी काल बनकर आए एक बाइक पर सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने एल्डिंको टिकरा के पास उनका रास्ता रोक लिया। पीड़ित के मुताबिक, बदमाशों ने उनकी कनपटी पर तमंचा सटा दिया और जान से मारने की धमकी देकर उनका मोबाइल और नकदी-गहनों से भरा बैग लूट लिया।
बैग में 20 हजार रुपये नकद, मोबाइल और लाखों रुपये के सोने के गहने (झुमके, अंगूठी आदि) थे। लुटेरे वारदात को अंजाम देकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए।
पुलिस का ‘अजीबोगरीब’ दावा: लूट हुई या सिर्फ डर लगा?
इस घटना में सबसे बड़ा ट्विस्ट पुलिस के बयान ने दिया है। जहाँ पीड़ित अमित गुप्ता ने राहगीरों के फोन से 112 नंबर डायल कर मदद मांगी और सुबह थाने में लिखित तहरीर दी, वहीं एसीपी कल्याणपुर आशुतोष कुमार का बयान हास्यास्पद और चौंकाने वाला है। एसीपी का कहना है कि— “लूट की खबर असत्य है, व्यक्ति को कोहरे के कारण घर जाने में डर लग रहा था, इसलिए पुलिस ने उसे सुरक्षित घर पहुँचाया।”
सवाल यह है कि: 1. क्या कोई व्यापारी सिर्फ ‘डर’ लगने पर 112 डायल करके तीन थानों (पनकी, कल्याणपुर, बिठूर) की पुलिस को मौके पर बुला लेगा? 2. क्या व्यापारी अपना मोबाइल और लाखों का माल खुद गायब करके पुलिस को परेशान करेगा? 3. अगर लूट नहीं हुई, तो व्यापारी सुबह थाने में लिखित तहरीर देने क्यों पहुँचा?
सरकार और कानपुर पुलिस कमिश्नरेट से 5 तीखे सवाल:
- अपराध के आंकड़े छिपाने का खेल: क्या कानपुर पुलिस लूट की घटनाओं को दर्ज न करके कागजों पर ‘ऑल इज वेल’ दिखाना चाहती है? एफआईआर (FIR) दर्ज न करना क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं है?
- व्यापारी सुरक्षा का क्या? कानपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन और व्यापारी संगठन बार-बार सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। क्या पुलिस कोहरे का बहाना बनाकर अपनी गश्ती की विफलता को छिपा रही है?
- सीसीटीवी और सर्विलांस: एल्डिंको टिकरा जैसे इलाकों में लगे कैमरों की जांच क्यों नहीं की जा रही? क्या पुलिस उन तीन बाइक सवारों को ट्रैक करने की जहमत उठाएगी या केस फाइल बंद कर देगी?
- व्यापारी का खोया विश्वास: जब रक्षक ही घटना को ‘झूठ’ बताने लगें, तो पीड़ित न्याय के लिए कहाँ जाएगा? क्या इससे अपराधियों के हौसले और ज्यादा नहीं बढ़ेंगे?
- पुलिस रिस्पॉन्स टाइम: अगर 112 पर लूट की सूचना मिली थी, तो पुलिस ने तुरंत घेराबंदी (Blockade) क्यों नहीं की? क्या पुलिस ने पेट्रोल पंप के फुटेज चेक किए जहाँ पीड़ित ने पेट्रोल भरवाया था?
निष्कर्ष: सच की बलि चढ़ाता सिस्टम
अमित गुप्ता का पूरा परिवार—पत्नी प्रीति, बच्चे और छोटा भाई अब दहशत में हैं। एक तरफ लाखों का नुकसान और दूसरी तरफ पुलिस का असहयोग। यह घटना साफ संकेत देती है कि कानपुर में अपराधियों से ज्यादा डर अब सिस्टम की बेरुखी से लगने लगा है। यदि पुलिस ने जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज नहीं की और लुटेरों को नहीं पकड़ा, तो व्यापारी संगठनों का गुस्सा सड़कों पर फूट सकता है।
रिपोर्ट: [प्रलभ शरण चौधरी/Truth India Times]
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