कानपुर-लखनऊ रेल रूट पर ‘महाब्लॉक’: 2 अप्रैल से 42 ट्रेनें रद्द, 118 साल पुराने गंगा पुल की होगी मरम्मत, यात्रियों की बढ़ेगी मुसीबत

कानपुर/उन्नाव। अगर आप रोजाना कानपुर और लखनऊ के बीच रेल से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। उत्तर रेलवे ने कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक गंगा पुल की मरम्मत के लिए 42 दिनों के ‘मेगा ब्लॉक’ की घोषणा की है। 2 अप्रैल से लेकर 13 मई तक इस रूट पर रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित रहेगा। इस दौरान 42 ट्रेनें रद्द रहेंगी, जबकि दर्जनों ट्रेनों के रूट बदले जाएंगे, जिससे रोजाना करीब 3 हजार यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

क्यों लिया गया है मेगा ब्लॉक?

शुक्लागंज स्थित गंगा रेल पुल का निर्माण वर्ष 1908 में हुआ था। 118 साल पुराने इस जर्जर हो चुके पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे इसके डाउन ट्रैक (कानपुर से लखनऊ दिशा) की मरम्मत करने जा रहा है। रेलवे के अनुसार, पुल के कमजोर हो चुके लकड़ी के स्लीपरों को हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक स्टील के एच-बीम (H-Beam) लगाए जाएंगे।

पुल की मजबूती के लिए यह काम अनिवार्य हो गया था। पिछले वर्ष इसी तरह का ब्लॉक अप लाइन (लखनऊ से कानपुर) के लिए लिया गया था, और अब डाउन लाइन को दुरुस्त किया जाएगा।


मेगा ब्लॉक का पूरा शेड्यूल (Quick Guide Chart)

विवरणमहत्वपूर्ण जानकारी
कार्य की अवधि02 अप्रैल 2026 से 13 मई 2026 तक (42 दिन)
ब्लॉक का समयप्रतिदिन सुबह 09:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक (8 घंटे)
कुल रद्द ट्रेनें42 (मेमू, पैसेंजर और इंटरसिटी शामिल)
रूट डायवर्जन31 ट्रेनें (दूसरे रास्तों से चलाई जाएंगी)
शॉर्ट टर्मिनेट14 ट्रेनें (केवल कानपुर तक ही आएंगी)
प्रभावित रूटकानपुर – शुक्लागंज – लखनऊ (डाउन ट्रैक)

इंटरसिटी और मेमू पर गिरेगी गाज

इस ब्लॉक का सबसे ज्यादा असर दैनिक यात्रियों (Daily Passengers) पर पड़ेगा। कानपुर-लखनऊ मेमू, झांसी पैसेंजर और इंटरसिटी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें प्रभावित होने के कारण नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को अब बसों या निजी वाहनों का सहारा लेना होगा। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच चलने वाली अधिकांश लोकल ट्रेनें इस सूची में शामिल हैं। रेलवे ने साफ किया है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए यात्रियों को यह सहयोग करना होगा।

31 ट्रेनों का बदला रास्ता, 14 कानपुर में ही रुकेंगी

मरम्मत कार्य के दौरान लंबी दूरी की 31 ट्रेनों को वैकल्पिक रास्तों (जैसे वाया बालामऊ या अन्य रूट) से चलाया जाएगा। इसके अलावा, 14 ऐसी ट्रेनें हैं जो लखनऊ तक नहीं जाएंगी, बल्कि उन्हें कानपुर रेलवे स्टेशन पर ही शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया जाएगा। इससे लखनऊ जाने वाले यात्रियों को कानपुर से आगे का सफर सड़क मार्ग से तय करना होगा।

यात्रियों के लिए सुझाव और चुनौतियां

  • रोडवेज पर बढ़ेगा दबाव: ट्रेनों के रद्द होने से कानपुर-लखनऊ हाईवे पर रोडवेज बसों में भीड़ बढ़ना तय है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें।
  • टिकट रिफंड: जिन यात्रियों ने पहले से इन तारीखों में आरक्षण (Reservation) करा रखा है, वे रेलवे के नियमों के अनुसार अपना पूरा रिफंड ले सकते हैं।
  • रेलवे इंक्वायरी: यात्रा शुरू करने से पहले 139 या नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम (NTES) पर अपनी ट्रेन की स्थिति जरूर चेक कर लें।

निष्कर्ष: सुरक्षा के लिए जरूरी है यह कदम

118 साल पुराने इस पुल ने एक सदी से ज्यादा समय तक कानपुर और लखनऊ को जोड़े रखा है। स्टील स्लीपर लगने के बाद ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। हालांकि, 42 दिनों का यह सफर आम जनता के लिए संघर्षपूर्ण रहने वाला है।

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