अब डिप्टी सीएम की चौखट पर भाजपा पार्षद
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर की सियासत में इन दिनों ‘ताल’ से ज्यादा ‘गाली’ और ‘आरोप’ चर्चा में हैं। नगर निगम की दहलीज से शुरू हुआ मेयर और पार्षदों का विवाद अब डिजिटल जंग में तब्दील हो चुका है। मेयर प्रमिला पांडेय और पार्षदों के बीच चल रही खींचतान के बीच अब एक ऑडियो क्लिप ने आग में घी डालने का काम किया है। सोशल मीडिया पर ‘बंटी टैक्स’ नाम का एक गाना तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मेयर के बेटे पर गंभीर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं।
इस गाने के बोल इतने चुभने वाले हैं कि इसने नगर निगम के गलियारों से लेकर लखनऊ के सत्ता केंद्रों तक हलचल पैदा कर दी है।
गाने के बोल में ‘घोटालों’ की फेहरिस्त
वायरल हो रहे इस ‘बंटी टैक्स’ गाने में सीधे तौर पर मेयर के पुत्र को निशाने पर लिया गया है। गाने में कानपुर नगर निगम के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार को सुरों में पिरोया गया है। गाने में उन क्षेत्रों का विशेष जिक्र है जहाँ अवैध वसूली की शिकायतें अक्सर आती रहती हैं:
- साइकिल स्टैंड का ठेका: गाने में आरोप लगाया गया है कि शहर के प्रमुख साइकिल और वाहन स्टैंडों के ठेकों के आवंटन में भारी कमीशनखोरी हो रही है।
- नौकरी के नाम पर उगाही: गाने में यह भी दावा किया गया है कि नगर निगम में संविदा या अन्य पदों पर नौकरी लगवाने के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है।
- टेंडर फिक्सिंग: ठेकेदारों से काम के बदले एक निश्चित प्रतिशत ‘टैक्स’ (जिसे गाने में बंटी टैक्स कहा गया है) लेने की बात कही गई है।
मेयर बनाम पार्षद: आरोपों की नई सीरीज
बीते कुछ हफ्तों से कानपुर नगर निगम में मेयर प्रमिला पांडेय और कई भाजपा पार्षदों के बीच जुबानी जंग जारी है। पार्षदों का आरोप है कि मेयर के परिवार का हस्तक्षेप नगर निगम के कामकाज में बहुत बढ़ गया है। वहीं, मेयर समर्थकों का कहना है कि यह उन पार्षदों की साजिश है जिनके अवैध काम मेयर ने रोक दिए हैं।
अब इस गाने के रिलीज होने के बाद पार्षदों को एक नया हथियार मिल गया है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लपक लिया है और जांच की मांग शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह गाना किसी ‘असंतुष्ट’ गुट की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
भ्रष्टाचार का ‘डिजिटल’ विरोध
कानपुर की राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब किसी को बदनाम करने या विरोध करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया हो, लेकिन ‘बंटी टैक्स’ गाने ने जिस तरह से सिस्टम पर प्रहार किया है, उसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। गाने में स्थानीय भाषा और कानपुरिया लहजे का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह आम जनता के बीच जल्दी लोकप्रिय हो रहा है।
लोग इसे व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक पर शेयर कर रहे हैं, जिससे मेयर कार्यालय की छवि पर सीधा प्रहार हो रहा है।
मेयर कार्यालय का पक्ष: ‘साजिश का हिस्सा’
इस ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद मेयर कैंप ने इसे एक घटिया स्तर की राजनीति करार दिया है। मेयर प्रमिला पांडेय के समर्थकों का कहना है कि मेयर की ईमानदारी पर सवाल उठाना मुश्किल है, इसलिए उनके परिवार को निशाना बनाकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस ऑडियो की साइबर सेल से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की बात कही है।
प्रशासन और संगठन की चुप्पी
दिलचस्प बात यह है कि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और भाजपा संगठन इस पूरे विवाद पर फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं। चूंकि मामला घर के भीतर का है—मेयर भी भाजपा की हैं और विरोध करने वाले अधिकांश पार्षद भी—इसलिए पार्टी इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रही है। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम की गोपनीय रिपोर्ट मांगी है।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स की टिप्पणी: नगर निगम जैसे संवैधानिक संस्थान का विवाद जब ‘गाने’ और ‘गालियों’ तक पहुँच जाए, तो यह शहर के विकास के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ‘बंटी टैक्स’ गाना सच है या महज एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा, यह तो जांच का विषय है, लेकिन इसने कानपुर नगर निगम में ‘सब कुछ ठीक नहीं है’ वाली बात पर मुहर जरूर लगा दी है।
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