कानपुर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘एक करोड़ी’ चौराहा: 7 दिन में दो बार धंसी सड़क, भाजपा पार्षद बोले- हम सब भगवान भरोसे

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्मार्ट सिटी के दावों की हवा निकल गई है। शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बने चौराहों और सड़कों के धंसने का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताज़ा मामला बृहमनगर चौराहे का है, जिसे महज कुछ समय पहले एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से संवारा गया था, लेकिन अब यहाँ की सड़क ताश के पत्तों की तरह धंस रही है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खुद सत्ताधारी दल भाजपा के पार्षद अब अपनी ही नगर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

7 दिन में दो बड़े गड्ढे, दहशत में जनता

कानपुर में पिछले एक हफ्ते के भीतर सड़क धंसने की यह दूसरी बड़ी घटना है। 22 जनवरी को ईदगाह चौराहे के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया था, जिससे बड़ा हादसा होते-होते बचा। अभी प्रशासन इस गड्ढे को भरने की लीपापोती कर ही रहा था कि दो दिन पहले पॉश इलाके बृहमनगर चौराहे पर सड़क धंस गई।

एक करोड़ रुपये से बने इस चौराहे का धंसना यह साफ करता है कि निर्माण कार्य में मानकों की जमकर अनदेखी की गई है। सड़क के बीचों-बीच हुए इन गहरे गड्ढों के कारण रात के समय निकलने वाले राहगीरों की जान पर हर वक्त खतरा बना रहता है।

भाजपा पार्षदों का अपनी ही सरकार पर हमला

इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब भाजपा पार्षदों ने नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत को उजागर किया। पार्षदों का कहना है कि शहर में विकास के नाम पर केवल पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन जमीन पर काम की गुणवत्ता शून्य है। एक भाजपा पार्षद ने हताशा में यहाँ तक कह दिया कि— “नगर निगम के अधिकारी केवल कागजों पर काम कर रहे हैं, धरातल पर हम सब भगवान भरोसे हैं।”

पार्षदों का आरोप है कि जल निगम और नगर निगम के बीच समन्वय की कमी है। सीवर लाइनों के लीकेज को ठीक किए बिना ऊपर से सड़क बना दी जाती है, जिससे कुछ ही दिनों में पानी मिट्टी काटकर सड़क को खोखला कर देता है।

लीपापोती में जुटा नगर निगम प्रशासन

बृहमनगर चौराहे पर सड़क धंसने के बाद नगर निगम के अधिकारी इसे एक सामान्य लीकेज बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब चौराहे के सुंदरीकरण पर एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, तो क्या उस समय ड्रेनेज और सीवर सिस्टम की जांच नहीं की गई थी?

ईदगाह चौराहे से लेकर बृहमनगर तक, शहर के विभिन्न हिस्सों में हो रहे ये गड्ढे कानपुर नगर निगम के भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल की गई घटिया निर्माण सामग्री और अधिकारियों की लापरवाही ने जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए हैं।

प्रलभ शरण चौधरी की रिपोर्ट: खतरे में शहर की रफ्तार

‘Truth India Times’ की पड़ताल में सामने आया है कि कानपुर की भौगोलिक स्थिति और पुरानी सीवर लाइनों के कारण भी ऐसी समस्याएं आ रही हैं, लेकिन भ्रष्टाचार इसे और अधिक घातक बना रहा है। बिना बेस तैयार किए सड़कों पर डामर बिछा दिया जाता है, जो पहली बारिश या मामूली लीकेज भी बर्दाश्त नहीं कर पाता।

बृहमनगर चौराहा शहर का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहाँ से रोजाना हजारों गाड़ियां गुजरती हैं। अगर व्यस्त समय में कोई वाहन इस गड्ढे की चपेट में आता, तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।

जनता का बढ़ता आक्रोश

कानपुर की जनता अब सवाल पूछ रही है कि उनके टैक्स के पैसे का उपयोग आखिर कहाँ हो रहा है? सोशल मीडिया पर भी लोग नगर निगम को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना देखने वाले कानपुरवासियों को अब सड़क पर चलते हुए डर लगने लगा है।

प्रशासन ने फिलहाल इन गड्ढों के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी है, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी और घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा, तब तक शहर की सड़कें इसी तरह धंसती रहेंगी।

निष्कर्ष

कानपुर में एक करोड़ का चौराहा धंसना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता का गिरना है। ‘Truth India Times’ प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और जनता के पैसे की बर्बादी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाए।

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