KIT कॉलेज की बड़ी लापरवाही, बिना AKTU की NOC के लिया ‘आटोनॉमस’ एडमिशन; अब छात्रों को फीस वापसी का ऑफर

शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ‘कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (KIT), रूमा एक बड़े विवाद में घिर गया है। संस्थान पर आरोप है कि उसने पिछले दो सालों से छात्रों का दाखिला एक स्वायत्त (Autonomous) संस्थान के रूप में लिया, जबकि इसके लिए उसके पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) की अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं थी। इस खुलासे के बाद छात्रों ने कॉलेज कैंपस में भारी हंगामा किया, जिसके बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा विवाद?

नियमों के मुताबिक, यदि कोई कॉलेज यूजीसी (UGC) से स्वायत्तता (Autonomous Status) प्राप्त करता है, तो उसे अपनी संबंधित यूनिवर्सिटी (इस मामले में AKTU) से एनओसी लेना और संबद्धता की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होता है। केआईटी (KIT) ने यूजीसी से अनुमोदन तो प्राप्त कर लिया था, लेकिन यूनिवर्सिटी स्तर पर एनओसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की।

बिना यूनिवर्सिटी की अनुमति के संस्थान ने खुद को ‘आटोनॉमस’ बताते हुए दो सत्रों तक छात्रों के एडमिशन ले लिए। इसका मतलब यह हुआ कि छात्र जिस डिग्री और पाठ्यक्रम को आटोनॉमस मानकर पढ़ रहे थे, उसे यूनिवर्सिटी की तकनीकी मान्यता ही प्राप्त नहीं थी।

छात्रों के हंगामे के बाद जागी यूनिवर्सिटी

पिछले कई दिनों से कॉलेज में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी था। छात्रों का आरोप है कि उन्हें अंधेरे में रखकर एडमिशन लिया गया और अब उनके रिजल्ट और डिग्री की वैधता पर संकट मंडरा रहा है। हंगामे की गंभीरता को देखते हुए एकेटीयू (AKTU) की एक उच्चस्तरीय टीम ने रूमा स्थित कॉलेज परिसर का दौरा किया और दस्तावेजों की जांच की। टीम ने पाया कि संस्थान ने प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक की है।

KIT ने दिया फीस वापसी और ट्रांसफर का विकल्प

चौतरफा घिरने के बाद अब कॉलेज प्रबंधन बैकफुट पर आ गया है। संस्थान ने प्रभावित छात्रों को दो विकल्प दिए हैं:

  1. फीस वापसी: जो छात्र संस्थान की इस स्थिति से असंतुष्ट हैं, वे अपनी पूरी फीस वापस लेकर कॉलेज छोड़ सकते हैं।
  2. सामान्य संबद्धता: छात्र आटोनॉमस के बजाय एकेटीयू के सामान्य संबद्ध कॉलेज के छात्र के रूप में अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

हालांकि, छात्रों का कहना है कि दो साल बर्बाद होने के बाद केवल फीस वापसी समाधान नहीं है। कई छात्रों ने भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

डिग्री पर क्या होगा असर?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई संस्थान बिना यूनिवर्सिटी की एनओसी के आटोनॉमस पाठ्यक्रम चलाता है, तो भविष्य में मार्कशीट और डिग्री के वेरिफिकेशन (सत्यापन) में बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। सरकारी नौकरियों और विदेश में पढ़ाई के लिए ऐसी डिग्रियां अक्सर अमान्य कर दी जाती हैं।

AKTU की सख्त कार्रवाई के संकेत

एकेटीयू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संस्थान पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है या उसकी संबद्धता पर विचार किया जा सकता है। विश्वविद्यालय ने अन्य कॉलेजों को भी चेतावनी दी है कि वे बिना पूर्ण कागजी कार्यवाही के खुद को स्वायत्त घोषित न करें।

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