उन्नाव कांड: कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, उम्रकैद की सजा निलंबित; जेल से बाहर आएगा पूर्व विधायक

उन्नाव: देश को झकझोर देने वाले उन्नाव दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। अदालत ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित (Suspend) कर दिया है, जिससे अब उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, कोर्ट ने यह राहत कुछ बेहद सख्त शर्तों के साथ दी है, ताकि पीड़िता की सुरक्षा और न्याय की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

हाईकोर्ट का फैसला और 15 लाख का मुचलका

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उस अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि जब तक सजा के खिलाफ दायर अपील लंबित है, तब तक सेंगर जेल से बाहर रह सकते हैं। इसके लिए अदालत ने उन्हें 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने का निर्देश दिया है।

इन 5 सख्त शर्तों पर मिली है रिहाई

कोर्ट ने सेंगर की रिहाई को पीड़िता की सुरक्षा से जोड़ते हुए कुछ ‘लक्ष्मण रेखाएं’ खींची हैं:

  1. पीड़िता से दूरी: सेंगर पीड़िता के निवास स्थान या उसके 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
  2. दिल्ली में निवास: उन्हें दिल्ली की सीमा के भीतर ही रहना होगा और शहर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
  3. पासपोर्ट जमा: सेंगर को अपना पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा कराना होगा ताकि वे देश से बाहर न जा सकें।
  4. थाने में हाजिरी: उन्हें प्रत्येक सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
  5. गवाहों पर दबाव नहीं: यदि सेंगर किसी भी तरह से गवाहों को प्रभावित करने या शर्तों का उल्लंघन करने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।

निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद

बता दें कि साल 2017 में हुए इस जघन्य कांड ने पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 2019 में कुलदीप सेंगर को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने सेंगर को ‘मौत तक उम्रकैद’ की सजा सुनाई थी और उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसी फैसले को सेंगर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां अब उनकी सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित किया गया है।

सुरक्षा और न्याय पर उठते सवाल

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर बहस छिड़ गई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि सजा का निलंबन एक न्यायिक प्रक्रिया है, जो अपील के दौरान दी जा सकती है। लेकिन दूसरी ओर, पीड़िता के समर्थकों और सामाजिक संगठनों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्नाव कांड में पीड़िता के परिवार ने लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी है, जिसमें उन्होंने अपने कई परिजनों को खोया है। ऐसे में सेंगर का जेल से बाहर आना पीड़िता के लिए मानसिक दबाव और सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

सियासी गलियारों में सुगबुगाहट

कुलदीप सिंह सेंगर कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति में रसूखदार नाम हुआ करते थे। इस कांड के बाद उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था और उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी। अब जेल से बाहर आने की खबर ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि, कोर्ट की सख्त शर्तों के कारण वे सक्रिय राजनीति या अपने गृह जनपद उन्नाव से फिलहाल दूर ही रहेंगे।

निष्कर्ष: फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस फैसले को पीड़िता पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। जब तक अपील पर अंतिम फैसला नहीं आता, कुलदीप सिंह सेंगर दिल्ली की सीमाओं के भीतर रहकर अदालती शर्तों का पालन करेंगे।

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