बांदा जेल से रिहाई के बाद ‘गायब’ हुआ स्क्रैप माफिया रवि काना, नेपाल में छिपे होने की आशंका से सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

नोएडा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश का कुख्यात स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रवि काना एक बार फिर सुर्खियों में है। बांदा जेल से कानूनी प्रक्रिया के बाद रिहाई मिलते ही रवि काना के अचानक “लापता” होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। ताजा खुफिया इनपुट और सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि रवि काना ने भारतीय सीमा पार कर नेपाल में शरण ले ली है। इस सूचना के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ (STF) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।

जेल से बाहर आते ही बदला पैंतरा

गौतमबुद्ध नगर पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट और अरबों रुपये के स्क्रैप साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के अभियान के बाद रवि काना को गिरफ्तार किया गया था। महीनों तक सलाखों के पीछे रहने के बाद, हाल ही में उसे बांदा जेल से रिहा किया गया। पुलिस को उम्मीद थी कि रिहाई के बाद वह निगरानी में रहेगा, लेकिन शातिर गैंगस्टर ने जेल से बाहर आते ही पुलिस की आंखों में धूल झोंक दी।

सूत्रों का कहना है कि रिहाई के तुरंत बाद रवि काना ने अपने पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल किया और सड़क मार्ग के जरिए वह उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से होता हुआ नेपाल पहुंच गया है। पुलिस अब उन लोगों की कुंडली खंगाल रही है जिन्होंने जेल से बाहर आने के बाद उसे लॉजिस्टिक मदद पहुंचाई।


नेपाल कनेक्शन: जांच एजेंसियों की बढ़ी चिंता

भारत और नेपाल की सीमा खुली होने के कारण अक्सर अपराधी इसका फायदा उठाते हैं। रवि काना के मामले में भी यही आशंका जताई जा रही है। खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि वह नेपाल के रास्ते किसी तीसरे देश भागने की फिराक में हो सकता है या फिर वहीं से अपना काला साम्राज्य दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है।

पुलिस की रणनीति:

  • बॉर्डर पर अलर्ट: सोनौली और रूपैडिहा जैसे प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर रवि काना की तस्वीरें साझा की गई हैं।
  • लोकेशन ट्रैकिंग: उसके करीबियों और पुराने गुर्गों के मोबाइल फोन सर्विलांस पर डाल दिए गए हैं।
  • एसटीएफ की छापेमारी: यूपी एसटीएफ की कई टीमें दिल्ली, नोएडा और पूर्वांचल के जिलों में छापेमारी कर रही हैं ताकि उसके भागने के रूट का पुख्ता पता लगाया जा सके।

करोड़ों का साम्राज्य और खौफ की कहानी

रवि काना महज एक छोटा अपराधी नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘स्क्रैप किंग’ के नाम से मशहूर रहा है। उसने फैक्ट्रियों से निकलने वाले स्क्रैप के कारोबार में जबरन वसूली और डरा-धमका कर अपना एकाधिकार जमा लिया था। नोएडा पुलिस ने बीते महीनों में उसकी 200 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क की थीं और उसके गैंग के दर्जनों सदस्यों को सलाखों के पीछे भेजा था।

उसके फरार होने की खबरों ने अब स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि इतना बड़ा अपराधी जेल से बाहर आने के बाद पुलिस की निगरानी से कैसे बच निकला?

आगे की राह: क्या होगा अगला कदम?

वर्तमान में पुलिस की प्राथमिकता रवि काना की सटीक लोकेशन ट्रेस करना है। यदि उसके नेपाल में होने की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो इंटरपोल के जरिए ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ या द्विपक्षीय सुरक्षा समझौतों के तहत उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की फैक्ट्रियों में रवि काना के खौफ से राहत महसूस करने वाले उद्यमियों में अब दोबारा चिंता देखी जा रही है। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी सूरत में स्क्रैप माफिया को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा।

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