शुक्लागंज में रेलवे का ‘पीला पंजा’ चला, भारी पुलिस बल के बीच दशकों पुराने अवैध निर्माण जमींदोज

उन्नाव (शुक्लागंज) : रेलवे प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी के बाद आज शुक्लागंज में आखिरकार रेलवे का ‘पीला पंजा’ गरज उठा। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) शिव कुमार गुप्ता के निर्देशों का पालन करते हुए, गुरुवार (16 जनवरी) को रेलवे की टीम ने भारी पुलिस बल और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। 15 जनवरी तक स्वयं निर्माण हटाने के अल्टीमेटम के बाद, जिन लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा था, वहां आज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध दुकानों और मकानों को ध्वस्त कर दिया।

भारी तनाव के बीच शुरू हुई कार्रवाई

सुबह से ही शुक्लागंज के चिन्हित इलाकों में हलचल बढ़ गई थी। रेलवे प्रशासन के साथ बड़ी संख्या में पुलिस और आरपीएफ के जवान तैनात रहे। जैसे ही जेसीबी (पीला पंजा) मौके पर पहुंची, स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। कई दुकानदार अपनी दुकानों से सामान बाहर निकालते नजर आए, तो कहीं लोग खुद ही छैनी-हथौड़े लेकर अपने पक्के निर्माण को तोड़ने में जुट गए ताकि मलबे में उनका नुकसान कम हो।

विकास कार्यों में बाधक बन रहे थे निर्माण

रेलवे विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि पूरी तरह से रेलवे की है। यहाँ चल रहे ‘इंप्रूवमेंट एवं डेवलपमेंट’ (सुधार और विकास) कार्यों के लिए इस जमीन को खाली कराया जाना अनिवार्य था। लंबे समय से ये निर्माण विकास कार्यों की राह में रोड़ा बन रहे थे। विभाग का कहना है कि नोटिस के माध्यम से लोगों को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद यह कठोर कदम उठाना पड़ा।

मौके पर दिखा भावुक दृश्य, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अभियान के दौरान कई दशकों से रह रहे लोगों के चेहरों पर मायूसी और गुस्सा साफ देखा गया। कुछ लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने की कोशिश भी की, लेकिन भारी सुरक्षा घेरे के कारण उनकी एक न चली। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पुलिस की सुरक्षा के बीच जेसीबी मशीनों ने अवैध रूप से बनी दुकानों और ढांचों को देखते ही देखते मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे इलाके को पुलिस ने छावनी में बदल दिया था ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

व्यापारियों और निवासियों में हड़कंप

शुक्लागंज के मुख्य बाजार और रेलवे लाइन के किनारे बसी इन दुकानों के टूटने से स्थानीय व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ अपना व्यापार कर रहे थे, लेकिन रेलवे की इस अचानक हुई कार्रवाई ने उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। वहीं, रेलवे प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भविष्य की योजना

रेलवे सूत्रों के अनुसार, जमीन खाली होने के बाद अब यहाँ प्लेटफॉर्म विस्तार, नई पटरियां बिछाने या यात्री सुविधाओं के विकास का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा। आने वाले दिनों में कुछ अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है, जिससे अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।


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