बिजली के पोल से टकराई बाइक, राज मिस्त्री की मौत
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव/अजगैन: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में सड़कों पर दौड़ती ‘रफ्तार’ काल बनकर एक गरीब परिवार की खुशियां लील गई। अजगैन थाना क्षेत्र के सलीमपुर गांव के पास हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 33 वर्षीय राज मिस्त्री लल्लन की जान चली गई। यह हादसा केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि एक पूरे परिवार के उजड़ने की दास्तां है। लल्लन अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता बेटा था और उस पर अपनी पत्नी समेत पांच मासूम बच्चों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी थी।
हादसे का मंजर: महज कुछ पल और सब खत्म
जानकारी के मुताबिक, बरुआ गांव निवासी लल्लन पुत्र स्वर्गीय गुरु प्रसाद पेशे से राज मिस्त्री था। वह अपनी मेहनत-मजदूरी से परिवार की जीविका चलाता था। शनिवार को वह सिरसा से काम खत्म कर अपने घर लौट रहा था। उसके साथ गांव के दो दोस्त भी अलग बाइक पर चल रहे थे। जैसे ही लल्लन सलीमपुर गांव के पास पहुंचा, उसकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे लगे बिजली के पोल से जा टकराई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लल्लन के सिर और सीने में गंभीर चोटें आईं। उसके दोस्तों और राहगीरों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। लल्लन ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही अजगैन थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, लेकिन बरुआ गांव में इस खबर ने कोहराम मचा दिया।
एक घर का ‘दीपक’ बुझा, पीछे छूट गए पांच अनाथ मासूम
लल्लन की मौत ने जो घाव दिए हैं, उसकी भरपाई नामुमकिन है। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसकी मौत के बाद अब घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। मृतक की पत्नी धन्नो का रो-रोकर बुरा हाल है।
लल्लन के पीछे पांच छोटे बच्चे (दो बेटियां और तीन बेटे) रह गए हैं। इनमें से कोई भी अभी इस लायक नहीं है कि परिवार का बोझ उठा सके। ग्रामीणों का कहना है कि लल्लन दिन-रात मेहनत करके अपने बच्चों को अच्छी जिंदगी देने का सपना देखता था, लेकिन एक हादसे ने उस परिवार को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है।
सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक चूक पर सवाल
1. बिजली के पोल की स्थिति: क्या सड़क किनारे लगे बिजली के पोल नियमों के अनुसार सुरक्षित दूरी पर हैं? अक्सर देखा गया है कि सड़कों के चौड़ीकरण के बाद बिजली के पोल बिल्कुल किनारे या असुरक्षित मोड पर रह जाते हैं, जो वाहन चालकों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) साबित होते हैं। क्या विभाग ने इनका सुरक्षा ऑडिट किया है?
2. ओवरस्पीडिंग और संकेतक: सलीमपुर के जिस मोड़ या रास्ते पर यह हादसा हुआ, क्या वहां गति सीमा के बोर्ड या रिफ्लेक्टर लगे थे? ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा लल्लन जैसे गरीबों को भुगतना पड़ता है।
3. गरीबों के लिए सुरक्षा कवच कहाँ? लल्लन जैसा श्रमिक जो ‘असंगठित क्षेत्र’ का हिस्सा है, उसकी मौत पर सरकार की ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना’ या अन्य श्रमिक कल्याण योजनाएं कितनी सक्रियता से काम करती हैं? क्या प्रशासन खुद आगे आकर इस अनाथ हुए परिवार की सुध लेगा?
सरकार और प्रशासन से ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ की मांग
1. तत्काल आर्थिक सहायता: जिलाधिकारी उन्नाव को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। मृतक के परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष या मंडी समिति सहायता योजना के तहत कम से कम 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
2. बच्चों की शिक्षा का जिम्मा: लल्लन के पांचों बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार उठाए। उन्हें सरकारी हॉस्टल या कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं से प्राथमिकता पर जोड़ा जाए ताकि उनका भविष्य अंधकारमय न हो।
3. परिवार को सरकारी आवास: मृतक का परिवार मजदूरी पर आश्रित था। शासन को चाहिए कि उनकी विधवा पत्नी को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत पक्का घर और अंत्योदय राशन कार्ड मुहैया कराए।
4. सड़कों का सुरक्षा ऑडिट: लोक निर्माण विभाग (PWD) और बिजली विभाग मिलकर अजगैन क्षेत्र की उन सड़कों का निरीक्षण करें जहां पोल सड़क के बेहद करीब हैं। वहां रिफ्लेक्टर और सुरक्षा बैरियर लगाए जाएं।
निष्कर्ष: केवल ‘जांच’ काफी नहीं, ‘मदद’ चाहिए
अजगैन पुलिस का कहना है कि मामला तेज रफ्तार का है, लेकिन क्या इतना कह देने भर से प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? लल्लन की मौत ने एक बूढ़े बाप की लाठी छीन ली है और पांच बच्चों को अनाथ कर दिया है।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करता है कि लल्लन के परिवार को महज एक ‘दुर्घटना का आंकड़ा’ न समझा जाए। यह एक मानवीय संकट है। अगर आज सरकार ने इस परिवार का हाथ नहीं थामा, तो पांच मासूमों का भविष्य सड़कों पर आ जाएगा।
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.