महिला ने घर में घुसकर दी जान से मारने की धमकी
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव: उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘जीरो टॉलरेंस’ और अपराधियों के गले में तख्ती लटकाने की बात करते हैं, वहीं उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र से आई एक तस्वीर ने कानून-व्यवस्था के इकबाल पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। आदर्श नगर मोहल्ले में देर रात एक महिला और उसके पुरुष मित्र ने जिस तरह से एक शरीफ परिवार के घर में घुसकर उत्पात मचाया, उसने न केवल मोहल्ले के लोगों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि पुलिस के दावों की भी पोल खोल दी है।
दहशत का वीडियो: “ज्यादा से ज्यादा जेल ही तो जाएंगे”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा है, लेकिन इसकी कड़वी सच्चाई रोंगटे खड़े कर देने वाली है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पूजा अवस्थी नाम की महिला अपने साथी दीपेश जायसवाल के साथ माही सिंह के घर के बाहर खड़ी होकर तांडव कर रही है। महिला पूरी ताकत से दरवाजे पर लातें मार रही है और चीख-चीखकर जान से मारने की धमकियां दे रही है।
वीडियो की सबसे चौंकाने वाली बात महिला का यह बयान है— “ज्यादा से ज्यादा जेल ही जाना पड़ेगा।” यह शब्द बताते हैं कि इन अपराधियों के मन में खाकी और कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं बचा है। उन्हें पता है कि पुलिस की ढीली कार्रवाई के चलते वे फिर से बाहर आ जाएंगे।
अपराध का ‘बैकग्राउंड’: जमानत पर बाहर हैं आरोपी
ट्रुथ इंडिया टाइम्स की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि हंगामा करने वाली पूजा अवस्थी और उसका मित्र दीपेश जायसवाल कोई नौसिखिया अपराधी नहीं हैं। ये दोनों पहले भी एक अस्पताल में अवैध गर्भपात (Abortion) से जुड़े गंभीर मामले में जेल की हवा खा चुके हैं। वर्तमान में ये जमानत पर बाहर हैं।
गंभीर सवाल यह है कि जमानत की शर्तों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बाहर आकर फिर से अपराध करता है या किसी को धमकाता है, तो उसकी जमानत तत्काल रद्द क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस ऐसे ‘आदतन अपराधियों’ को फिर से कोई बड़ी वारदात करने का मौका दे रही है?
घटनाक्रम: तोड़फोड़ से लेकर जानलेवा हमले की कोशिश
पीड़ित परिवार के अनुसार, मामला केवल शोर-शराबे का नहीं है। आरोप है कि पूजा और दीपेश ने घर के बाहर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ की और फिर घर के अंदर घुसने की कोशिश की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे अपने घर के अंदर दुबके हुए थे और बाहर मौत तांडव कर रही थी। दबंगों की इस हरकत से पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया और कोई भी बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
प्रशासन और सरकार के लिए चुभते सवाल
1. पुलिस की सुस्ती का राज क्या है? पीड़ित परिवार ने सदर कोतवाली और पुलिस अधीक्षक (SP) से लिखित शिकायत की है, लेकिन आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। क्या पुलिस किसी अनहोनी का इंतजार कर रही है? वायरल वीडियो साक्ष्य के तौर पर पर्याप्त है, फिर भी गिरफ्तारी में देरी क्यों?
2. जमानत रद्द करने की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू हुई? जो अपराधी जेल से बाहर आकर कानून को चुनौती दे रहे हैं और कह रहे हैं कि “ज्यादा से ज्यादा जेल ही जाएंगे”, उनके खिलाफ ‘गैंगस्टर एक्ट’ और ‘जमानत निरस्तीकरण’ की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
3. महिला सुरक्षा के दावों का क्या? एक ओर सरकार ‘मिशन शक्ति’ चला रही है, वहीं दूसरी ओर एक महिला अपराधी दूसरी महिला के घर में घुसकर उसकी जान लेने पर आमादा है। आदर्श नगर जैसे संभ्रांत इलाके में अगर लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो दूर-दराज के गांवों का क्या हाल होगा?
डिमांड: सरकार ले ये 4 कड़े एक्शन
- तत्काल गिरफ्तारी: वीडियो में दिख रहे आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए ताकि पीड़ित परिवार का डर खत्म हो सके।
- जमानत निरस्तीकरण: पुलिस को बिना देरी किए कोर्ट में प्रार्थना पत्र देना चाहिए कि आरोपियों ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए इन्हें वापस जेल भेजा जाए।
- गैंगस्टर और गुंडा एक्ट: आरोपियों के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उन पर कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।
- पीड़ित को सुरक्षा: माही सिंह और उनके परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए, क्योंकि आरोपी खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
निष्कर्ष: कानून का डर जरूरी है
उन्नाव की यह घटना केवल एक विवाद नहीं है, बल्कि यह एक चुनौती है उन लोगों को जो कुर्सी पर बैठकर न्याय की बात करते हैं। अगर आज पूजा अवस्थी और दीपेश जायसवाल जैसे लोगों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो कल कोई और अपराधी घर के दरवाजे पर लात मारते हुए कानून का मजाक उड़ाएगा।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स शासन और प्रशासन से अपील करता है कि इस मामले में ‘मिसाल’ पेश की जाए ताकि अपराधियों को समझ आए कि उत्तर प्रदेश में ‘जेल ही जाना पड़ेगा’ का मतलब केवल जेल नहीं, बल्कि कानून की वह सख्ती है जो उनकी रूह कंपा दे।
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