उन्नाव में ‘भ्रष्टाचार की जांच’ पर खूनी खेल: वर्तमान प्रधान पति ने समर्थकों संग पूर्व प्रधान को पीटा; जांच कमेटी के सामने गुंडागर्दी, क्या दबंगों को है सत्ता का संरक्षण?

उन्नाव/बीघापुर: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद से एक ऐसा मामला सामने आया है जो पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करने वालों के लिए एक डरावना सबक है। बीघापुर कोतवाली क्षेत्र के कैलांव गांव में जब जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच कमेटी विकास कार्यों में हुई अनियमितताओं की परतें खोलने पहुंची, तो वहां ‘कलम और तथ्य’ की जगह ‘लाठी और दबंगई’ ने ले ली। वर्तमान प्रधान के पति और उनके समर्थकों ने भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से पूर्व प्रधान पर सरेआम हमला बोल दिया। यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक प्रक्रिया पर है जो पारदर्शिता का दावा करती है।

घटनाक्रम: जांच कमेटी के सामने ही तांडव

कैलांव गांव के पूर्व प्रधान प्रभात कुमार (निवासी राजापुर गढ़ेवा) ने वर्तमान ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए विकास कार्यों में भारी वित्तीय गड़बड़ी और सरकारी धन के बंदरबांट की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। इसी शिकायत का संज्ञान लेते हुए 30 दिसंबर को एक जिला स्तरीय जांच टीम गांव पहुंची थी।

नियम के मुताबिक, शिकायतकर्ता होने के नाते प्रभात कुमार भी जांच स्थल पर मौजूद थे। जब टीम चकवा खेड़ा में कार्यों का भौतिक सत्यापन कर वापस लौट रही थी, तभी वर्तमान प्रधान के पति शत्रुघ्न लाल, उनके भाई रामलाल और सहयोगी राजेंद्र ने आपा खो दिया। आरोप है कि राजेंद्र ने गाली-गलौज शुरू की और देखते ही देखते प्रधान पक्ष के लोगों ने पूर्व प्रधान पर हमला बोल दिया। एक सरकारी जांच टीम की मौजूदगी में इस तरह की मारपीट होना बताता है कि दबंगों के मन में प्रशासन का कोई खौफ नहीं है।

विवाद की जड़: अवैध कब्जा और करोड़ों का खेल?

पूर्व प्रधान प्रभात कुमार का आरोप है कि यह हमला केवल व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को दबाने की एक सोची-समझकी साजिश है। शिकायत के अनुसार, वर्तमान प्रधान के करीबियों ने ग्राम समाज की सुरक्षित भूमि और खाद के गड्ढों के लिए आवंटित जमीन पर अवैध रूप से पक्का निर्माण कर कब्जा कर लिया है।

जब जांच टीम इन अवैध निर्माणों और विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच करने लगी, तो प्रधान पक्ष को अपनी पोल खुलने का डर सताने लगा। हमले का उद्देश्य स्पष्ट था— शिकायतकर्ता को इतना डरा देना कि वह भविष्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज न उठा सके।

पुलिसिया कार्रवाई: मुकदमा तो दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी कब?

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई है। बीघापुर कोतवाली पुलिस ने पूर्व प्रधान की तहरीर पर:

  1. शत्रुघ्न लाल (वर्तमान प्रधान पति)
  2. रामलाल (प्रधान का देवर)
  3. राजेंद्र (सहयोगी)

इन तीनों के खिलाफ मारपीट और संबंधित धाराओं में मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में चर्चा है कि सत्ता की धमक और रसूख के चलते पुलिस मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी से बच रही है।


सरकार और प्रशासन से ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ के तीखे सवाल

1. जांच टीम की सुरक्षा में चूक क्यों? जब जिलाधिकारी ने जिला स्तरीय टीम भेजी थी, तो वहां पर्याप्त पुलिस बल क्यों नहीं था? क्या प्रशासन को यह अंदाजा नहीं था कि भ्रष्टाचार की जांच में हिंसक झड़प हो सकती है? जांच अधिकारियों के सामने मारपीट होना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।

2. अवैध कब्जे पर ‘बुलडोजर’ कब चलेगा? शिकायत में स्पष्ट रूप से ग्राम समाज की भूमि पर पक्के अवैध निर्माण का जिक्र है। यदि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सरकारी जमीन से कब्जा हटाना प्राथमिकता है, तो कैलांव गांव के इन खाद के गड्ढों पर अभी तक पीला पंजा क्यों नहीं चला?

3. प्रधान के वित्तीय अधिकार क्यों न सीज हों? जब प्रधान पक्ष जांच में बाधा डाल रहा है और शिकायतकर्ता पर हमला कर रहा है, तो पंचायती राज अधिनियम के तहत उक्त ग्राम पंचायत के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज क्यों नहीं किए गए?


निष्कर्ष: लोकतंत्र के ‘चौथे स्तंभ’ की मांग

यह खबर केवल एक मारपीट की घटना नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के उस ग्रामीण तंत्र की कहानी है जहां ‘प्रधान पति’ (मले डोमिनेटेड सिस्टम) का आतंक आज भी सरकारी जांचों को ठेंगे पर रखता है। यदि प्रभात कुमार जैसे जागरूक नागरिकों को न्याय नहीं मिला, तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।

प्रशासन को निम्नलिखित कदम तत्काल उठाने चाहिए:

  • सरकारी कार्य में बाधा डालने और गवाहों को डराने के जुर्म में आरोपियों पर ‘गुंडा एक्ट’ की कार्रवाई हो।
  • विवादित विकास कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए ताकि सत्य सामने आए।
  • पीड़ित पूर्व प्रधान को सुरक्षा प्रदान की जाए।

बीघापुर कोतवाली प्रभारी राजपाल का कहना है कि जांच जारी है, लेकिन जनता को ‘जांच’ नहीं, ‘न्याय’ और ‘एक्शन’ चाहिए।

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