उन्नाव में ATS का बड़ा एक्शन: स्लाटर हाउस में मजदूरी कर रहा बांग्लादेशी दबोचा, फर्जी आधार कार्ड के सहारे 6 साल से भारत में था मौजूद

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एटीएस (ATS) लखनऊ की टीम ने बुधवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दही औद्योगिक क्षेत्र से एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे न केवल भारत में रह रहा था, बल्कि स्थानीय स्लाटर हाउस में मजदूरी भी कर रहा था। इस खुलासे के बाद औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

खुफिया सूचना पर आधी रात को छापेमारी

एटीएस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि उन्नाव के दही औद्योगिक क्षेत्र स्थित मांस निर्यातक इकाइयों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक, विशेषकर बांग्लादेशी, अवैध रूप से रह रहे हैं। ये लोग स्थानीय मोहल्लों जैसे शिवनगर में किराए पर कमरा लेकर रहते हैं और फर्जी आधार कार्ड बनवाकर खुद को भारतीय नागरिक बताते हैं।

इसी इनपुट के आधार पर एटीएस ने 25 फरवरी की रात जाल बिछाया और शिवनगर मोड़ के पास से सैफुल नाम के युवक को हिरासत में लिया। जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपने विदेशी होने की बात स्वीकार कर ली।


गिरफ्तार आरोपी का प्रोफाइल (Case File)

विवरणजानकारी
नामसैफुल (पुत्र फरीदुल आलम)
मूल निवासीलंबामथ, बंदरबन (बांग्लादेश)
फर्जी पहचानविशाल (उम्र 29 वर्ष) के नाम से आधार कार्ड
घुसपैठ का रास्ताखुलना बॉर्डर – 24 परगना (पश्चिम बंगाल)
कार्यस्थलजेएस स्लाटर हाउस, दही औद्योगिक क्षेत्र
बरामदगीमोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड, भारतीय मुद्रा

मुंबई से उन्नाव तक का सफर: दलाल ने बनवाया आधार

पूछताछ में सैफुल ने खुलासा किया कि वह करीब 5-6 साल पहले अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आया था। भारत में घुसने के बाद उसने सबसे पहले मुंबई का रुख किया, जहां उसने लगभग एक साल तक पंखे के रेगुलेटर बनाने वाली फैक्ट्री में काम किया। इसके बाद वह उन्नाव आ गया।

सैफुल ने स्वीकार किया कि उसने एक दलाल की मदद से ‘विशाल’ के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इस आधार कार्ड पर ‘विशाल धर्म कांटा’ का पता दर्ज था। एटीएस को उसके मोबाइल की गैलरी से उसके असली माता-पिता (फरीदुल आलम और खदीजा बेगम) के बांग्लादेशी पहचान पत्र भी मिले हैं, जो साल 2008 में जारी हुए थे।

स्लाटर हाउसों में ‘पहचान’ छिपाकर नौकरी

उन्नाव में रहकर सैफुल ने पहले नूर मोहम्मद की मीट कंपनी ‘नूर इंटरप्राइजेज’ में काम किया। इसके बाद वह जेएस स्लाटर हाउस में बतौर हेल्पर काम करने लगा। यह मामला उजागर होने के बाद अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या स्लाटर हाउस प्रबंधन ने कर्मचारी रखते समय उसके दस्तावेजों का सही ढंग से भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया था या नहीं।

कानूनी शिकंजा: नई धाराओं में मुकदमा दर्ज

एटीएस लखनऊ यूनिट के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह की तहरीर पर दही थाने में आरोपी के खिलाफ अत्यंत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है:

  • BNS धारा 318(4): धोखाधड़ी के लिए।
  • BNS धारा 337 व 340: फर्जी सरकारी दस्तावेज बनवाने और उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने के लिए।
  • आप्रवासन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 की धारा 21: यह नया कानून विदेशी नागरिकों की अवैध निगरानी और घुसपैठ को रोकने के लिए बनाया गया है।

दही थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

बड़ा सवाल: और कितने ‘सैफुल’ छिपे हैं?

एटीएस अब इस पूरे सिंडिकेट की जांच कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि उन्नाव के औद्योगिक क्षेत्र में कई और विदेशी नागरिक पहचान छिपाकर काम कर रहे हो सकते हैं। उन मकान मालिकों और दलालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है जिन्होंने बिना वेरिफिकेशन के इन्हें कमरा दिया या फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद की।

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