उन्नाव में सजी 'पुलिस की पाठशाला'
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। आज के दौर में जहाँ तकनीक हमारे जीवन को आसान बना रही है, वहीं साइबर अपराधी भी मासूम लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। इसी खतरे को भांपते हुए उन्नाव पुलिस ने एक सराहनीय पहल की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) जय प्रकाश सिंह के कुशल निर्देशन में बुधवार को डाइट प्रेक्षागृह में “पुलिस की पाठशाला” का भव्य आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में डाइट प्रशिक्षुओं, शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का केंद्र बिंदु साइबर अपराध से बचाव और मिशन शक्ति फेज-5 के तहत महिला सुरक्षा की रणनीतियां रहीं।
हेल्पलाइन नंबर: आपकी सुरक्षा का ढाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्राधिकारी नगर (CO City) विनी सिंह ने बेहद संजीदगी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने दो महत्वपूर्ण नंबरों पर विशेष जोर दिया:
- 1930: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल रिपोर्ट करने के लिए।
- 1090: वीमेन पावर हेल्पलाइन, जो महिला उत्पीड़न के खिलाफ एक मजबूत कवच है।
CO विनी सिंह ने शिक्षकों से अपील की कि वे समाज के निर्माता हैं, इसलिए वे न केवल स्वयं जागरूक बनें बल्कि अपने विद्यार्थियों को भी इन सुरक्षा उपायों के बारे में शिक्षित करें।
प्रमुख सुरक्षा टिप्स: क्या करें और क्या न करें (Quick Guide)
| विषय | सावधानी के उपाय (Safety Tips) |
| वित्तीय सुरक्षा | किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना OTP कभी साझा न करें। |
| डिजिटल अरेस्ट | पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती, ऐसे कॉल से न डरें। |
| डाउनलोड अलर्ट | अज्ञात स्रोतों से प्राप्त .APK फाइल या संदिग्ध ई-चालान लिंक न खोलें। |
| सोशल मीडिया | अपरिचित व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और निजी जानकारी साझा न करें। |
| महिला सुरक्षा | किसी भी आपात स्थिति में 1090 या 112 पर तुरंत सूचना दें। |
सोशल मीडिया के मायाजाल और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का सच
प्रभारी निरीक्षक कोतवाली सदर चंद्रकांत मिश्रा ने सोशल मीडिया के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एक छोटी सी गलती, जैसे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना, आपकी पूरी गोपनीयता भंग कर सकता है। वहीं, महिला थाना प्रभारी रेखा सिंह ने हाल के दिनों में चर्चित हुए “डिजिटल अरेस्ट” के फ्रॉड के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती। यह महज डराने का एक हथकंडा है।
महिला आरक्षी सोनिया शर्मा ने तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए बताया कि आजकल साइबर ठग ‘ई-चालान’ के नाम पर फर्जी फाइल भेजते हैं, जिसे डाउनलोड करते ही आपका फोन उनके कंट्रोल में चला जाता है। साइबर वॉलंटियर्स आलोक अवस्थी, समन आफरीन, डॉ. रूपेश और ग्राम प्रधान अमरेश ने भी व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए प्रशिक्षुओं को जागरूक किया।
सामूहिक प्रयास से बनेगा सुरक्षित प्रदेश
कार्यक्रम का सफल संयोजन परिवार परामर्श केंद्र के सलाहकार मंडल प्रभारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मनीष सिंह सेंगर द्वारा किया गया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पुलिस और जनता के बीच का संवाद ही अपराध मुक्त समाज की नींव है। डाइट प्राचार्या अमिता सिंह ने पुलिस विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नियमित अंतराल पर होने चाहिए ताकि भविष्य के शिक्षक सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार कर सकें।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यशाला में प्रवक्ता शिल्पा, प्रशिक्षक शशांक चौहान, दिनेश, हर्ष के साथ-साथ पुलिस विभाग से उपनिरीक्षक कंचन सिंह, आरक्षी नासिर, सोनू चौहान और महिला आरक्षी ज्योति, स्वाती व सिमरन मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में उपनिरीक्षक कंचन सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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