उन्नाव में खाद माफियाओं पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: दो दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड, 5 को नोटिस; जिला कृषि अधिकारी की छापेमारी से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में किसानों के हक पर डाका डालने वाले और उर्वरक बिक्री में मनमानी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ प्रशासन ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। जिला कृषि अधिकारी शशांक ने मंगलवार को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर खाद विक्रेताओं की नींद उड़ा दी। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान भारी अनियमितताएं पाए जाने पर दो प्रमुख उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस (प्राधिकार पत्र) तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि 5 अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

कृषि विभाग की इस ताबड़तोड़ छापेमारी से सफीपुर, मियागंज और रसूलाबाद के उर्वरक बाजारों में दिनभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। विभाग के सख्त रुख ने यह साफ कर दिया है कि किसानों को खाद के लिए परेशान करने वाले बिचौलियों और नियम तोड़ने वाले व्यापारियों की अब खैर नहीं है।

इन दुकानों पर गिरी गाज: निलंबन की कार्रवाई

जिला कृषि अधिकारी की जांच में सबसे गंभीर लापरवाही रसूलाबाद और अन्य क्षेत्रों में देखने को मिली। पारस खाद भंडार का प्रतिष्ठान निरीक्षण के समय बंद पाया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि संचालक विभाग को जानकारी साझा करने से कतरा रहा था। वहीं, जय बालाजी खाद भंडार रसूलाबाद के संचालक निरीक्षण के दौरान पीओएस (POS) मशीन प्रस्तुत नहीं कर सके।

बिना पीओएस मशीन के उर्वरक की बिक्री करना नियमों का घोर उल्लंघन है, क्योंकि इससे खाद की कालाबाजारी की संभावना बढ़ जाती है। इन दोनों ही मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला कृषि अधिकारी ने दोनों उर्वरक प्राधिकार पत्रों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

कारण बताओ नोटिस से हड़कंप

निरीक्षण के दौरान कई अन्य प्रतिष्ठानों में भी स्टॉक और दस्तावेजों के रख-रखाव में भारी कमियां पाई गईं। इसके बाद जिला कृषि अधिकारी ने निम्नलिखित केंद्रों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है:

  1. बाबू यादव कृषि सेवा केंद्र, मेथीटीकूर सफीपुर
  2. तिरुपति बालाजी खाद भंडार, मेथीटीकूर सफीपुर
  3. शिव खाद केंद्र, मिर्जापुर कला मियागंज
  4. भोला कृषि सेवा केंद्र, रसूलाबाद
  5. नागेश कृषि सेवा केंद्र, रसूलाबाद
  6. शोभम कृषि सेवा केंद्र

इन सभी प्रतिष्ठानों को विभाग ने अल्टीमेटम दिया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब पेश करें। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो इनके लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिला कृषि अधिकारी के कड़े निर्देश: ‘रेट बोर्ड नहीं तो दुकान नहीं’

निरीक्षण के दौरान जिला कृषि अधिकारी शशांक ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के बिना व्यापार संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी दुकानदारों के लिए निम्नलिखित नियम अनिवार्य कर दिए हैं:

  • रेट और स्टॉक बोर्ड: प्रत्येक दुकान के बाहर स्पष्ट रूप से रेट बोर्ड और वर्तमान स्टॉक की जानकारी प्रदर्शित होनी चाहिए।
  • अनिवार्य दस्तावेज: वितरण रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और कैश मेमो का मिलान पीओएस मशीन से होना अनिवार्य है।
  • खतौनी आधारित वितरण: किसानों को केवल उनकी खतौनी और आधार कार्ड के आधार पर ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
  • बिना सूचना बंदी पर बैन: कोई भी दुकानदार बिना पूर्व सूचना या वैध कारण के अपनी दुकान बंद नहीं रखेगा।

किसानों के लिए राहत: ‘जिले में खाद का भंडार फुल’

अक्सर अफवाहों के कारण किसान खाद की कमी को लेकर पैनिक हो जाते हैं, जिसका फायदा उठाकर दुकानदार ऊंचे दामों पर खाद बेचते हैं। इस पर विराम लगाते हुए जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि जनपद में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है।

वर्तमान स्टॉक की स्थिति: | उर्वरक का प्रकार | मात्रा (मीट्रिक टन) | | :— | :— | | यूरिया | 9047 मीट्रिक टन | | डीऐपी (DAP) | 4023 मीट्रिक टन | | एनपीके (NPK) | 4455 मीट्रिक टन |

अधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और केवल सरकारी रेट पर ही खाद खरीदें। यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक की मांग करता है या खाद होने के बावजूद मना करता है, तो सीधे कृषि विभाग को शिकायत करें।

भविष्य में और भी कड़ी होगी कार्रवाई

प्रलभ शरण चौधरी (ट्रुथ इंडिया टाइम्स) से बात करते हुए कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया कि यह छापेमारी अभी रुकने वाली नहीं है। आने वाले दिनों में तहसील स्तर पर टीमों का गठन कर ग्रामीण इलाकों की छोटी दुकानों की भी जांच की जाएगी। विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का लाभ सीधे वास्तविक किसान तक पहुंचे, न कि बीच के जमाखोरों तक।

निष्कर्ष: उन्नाव जिला प्रशासन की इस सक्रियता ने खाद कालाबाजारी करने वालों के सिंडिकेट को हिलाकर रख दिया है। सफीपुर से लेकर रसूलाबाद तक हुई इस कार्रवाई ने किसानों के बीच विश्वास जगाया है। अब देखना यह होगा कि नोटिस पाने वाले दुकानदार अपने रिकॉर्ड में सुधार करते हैं या फिर उन्हें भी निलंबन की मार झेलनी पड़ेगी।


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