विकास की आस में धरने पर बैठे 'बाबा जी'
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। विकास खंड सुमेरपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा कल्याणपुर पतन में विकास कार्यों की ठप पड़ी स्थिति और सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासी बृजेंद्र शुक्ला उर्फ ‘बाबा जी’ ने मोर्चा खोल दिया है। पुरवा पनाहन चौराहे पर आयोजित इस धरने ने स्थानीय प्रशासन और पंचायत राज विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2021 से थमा विकास का पहिया: बाबा जी का आरोप
धरने पर बैठे बृजेंद्र शुक्ला ‘बाबा जी’ का साफ तौर पर कहना है कि वर्ष 2021 से लेकर अब तक उनकी ग्राम सभा में धरातल पर कोई भी महत्वपूर्ण विकास कार्य नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों पर तो विकास की गंगा बह रही है, लेकिन हकीकत में गांव की गलियां और नालियां बदहाली का आंसू रो रही हैं।
बाबा जी ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया:
- शौचालय और आवास योजना: पात्रों को छोड़कर अपात्रों को लाभ देने और चयन प्रक्रिया में धांधली का आरोप।
- नाली और खड़ंजा: गांव के मुख्य मार्गों पर जलभराव की स्थिति बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में भारी समस्या होती है।
- मनरेगा में हेरफेर: बिना काम कराए भुगतान निकालने और फर्जी मस्टर रोल तैयार करने की आशंका जताई गई है।
पनाहन चौराहे पर प्रदर्शन, अधिकारियों में मचा हड़कंप
बृजेंद्र शुक्ला के पुरवा पनाहन चौराहे पर धरने पर बैठने की खबर जैसे ही फैली, सुमेरपुर ब्लॉक और तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया। चौराहे पर जुटे ग्रामीणों ने बाबा जी का समर्थन करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक जिला स्तर का कोई बड़ा अधिकारी मौके पर आकर जांच का ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक यह धरना समाप्त नहीं होगा।
बाबा जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम केवल अपने गांव का हक मांग रहे हैं। 2021 से अब तक करोड़ों का बजट आता है, लेकिन वह पैसा कहां जाता है, इसकी जांच होनी चाहिए। अधिकारी एसी कमरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर लेते हैं, लेकिन कभी गांव की कीचड़ भरी गलियों में आकर नहीं देखते।”
भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसी पंचायत?
उन्नाव में ग्राम पंचायतों के भीतर भ्रष्टाचार की शिकायतें नई नहीं हैं, लेकिन ‘बाबा जी’ द्वारा उठाए गए इन ठोस आरोपों ने सुमेरपुर ब्लॉक के अधिकारियों को बैकफुट पर धकेल दिया है। धरने में शामिल अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार खंड विकास अधिकारी (BDO) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को शिकायती पत्र दिए, लेकिन हर बार फाइलों को दबा दिया गया।
ग्रामीणों का दावा है कि ग्राम सभा में जो कार्य हुए भी हैं, उनमें घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है, जिसके कारण कुछ ही महीनों में सड़कें उखड़ने लगी हैं।
प्रशासन का रुख
फिलहाल प्रशासन इस मामले को शांत कराने की कोशिश में जुटा है। सूत्रों के अनुसार, तहसील स्तर के कुछ अधिकारियों ने बाबा जी से संपर्क कर धरना खत्म करने की अपील की है, लेकिन बाबा जी अपनी मांगों पर अडिग हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में गांव के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वह जिलाधिकारी कार्यालय (DM Office) के बाहर आमरण अनशन शुरू करेंगे।
क्या होगा अगला कदम?
‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ इस मामले की गहराई से निगरानी कर रहा है। ग्राम सभा कल्याणपुर पतन के विकास कार्यों का सोशल ऑडिट होना अब अनिवार्य नजर आ रहा है। बाबा जी के इस कदम ने अन्य गांवों के लोगों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक कर दिया है।
क्षेत्रीय राजनीति में भी इस धरने के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल उठाए हैं। अब देखना यह होगा कि उन्नाव प्रशासन इन आरोपों की जांच के लिए कोई विशेष टीम गठित करता है या यह मामला भी केवल आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगा।
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