'विदेशी मेहमानों' का जमघट: सात समंदर पार कर बर्ड सेंचुरी पहुँचे 6000+ प्रवासी पक्षी
Unnao/Truth India Times Digital Desk
उन्नाव। सर्दियों की दस्तक के साथ ही उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का आसमान रंग-बिरंगे पंखों से सज गया है। नवाबगंज स्थित शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की चहचहाहट से गुलजार है। दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों—यूरोप, एशिया, उत्तरी अफ्रीका और अमेरिका—से हजारों मील का सफर तय कर अब तक 6,000 से अधिक प्रवासी पक्षी यहाँ पहुँच चुके हैं। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह सेंचुरी इस समय किसी जन्नत से कम नहीं है।
सात समंदर पार से उन्नाव तक का सफर
हर साल की तरह इस बार भी कड़ाके की ठंड से बचने और भोजन की तलाश में विदेशी पक्षी भारत का रुख कर रहे हैं। नवाबगंज की यह झील इन पक्षियों के लिए सबसे पसंदीदा ‘हॉलिडे डेस्टिनेशन’ मानी जाती है। यहाँ का शांत वातावरण, स्वच्छ पानी और घनी हरियाली इन्हें एक सुरक्षित ठिकाना प्रदान करती है।
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, ये नन्हे मेहमान हिमालय के ऊंचे पहाड़ों को पार कर, महीनों की उड़ान भरकर यहाँ पहुँचते हैं। इस बार पक्षियों की आवक पिछले साल की तुलना में जल्दी और अधिक संख्या में देखी जा रही है।
इन खास प्रजातियों ने डाला डेरा: गॉडवाल से रेड क्रेस्टेड पोचार्ड तक
सेंचुरी के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष विविधता में काफी वृद्धि हुई है। वर्तमान में झील के केंद्र में और किनारों पर कई दुर्लभ प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं:
- गॉडवाल (Gadwall): विशेष रूप से अमेरिका से आने वाला यह पक्षी अपनी सादगी और शांत व्यवहार के लिए जाना जाता है।
- नॉर्दर्न शॉवलर (Northern Shoveler): सेंट्रल अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा से आने वाला यह पक्षी अपनी विशिष्ट चोंच की बनावट के कारण पर्यटकों का ध्यान खींच रहा है।
- रेड क्रेस्टेड पोचार्ड (Red Crested Pochard): सेंट्रल एशिया, अफ्रीका और दक्षिणी यूरोप से आए इन पक्षियों की लाल कलगी इन्हें सबसे सुंदर और आकर्षक बनाती है।
- अन्य प्रजातियाँ: इनके अलावा विजन (Wigeon), पिंटेल (Pintail) और कॉमन टील जैसे पक्षी भी बड़ी संख्या में यहाँ क्रीड़ा करते देखे जा रहे हैं।
पर्यटकों की बढ़ी रौनक, ‘वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी’ का बढ़ा क्रेज
पक्षियों के इस अद्भुत संसार को देखने के लिए उन्नाव ही नहीं, बल्कि लखनऊ, कानपुर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँच रहे हैं। खासकर सप्ताहांत (Weekends) पर यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती।
- फोटोग्राफी: प्रोफेशनल वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए यह समय स्वर्ण काल जैसा है। वे दुर्लभ पक्षियों की उड़ानों और उनकी अठखेलियों को अपने कैमरों में कैद करने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं।
- नेचर वॉक: परिवार के साथ आने वाले लोग यहाँ की शांति और शुद्ध हवा का आनंद ले रहे हैं। बच्चों के लिए यह किताबी ज्ञान को हकीकत में देखने का एक बेहतरीन अवसर साबित हो रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: वन विभाग अलर्ट
प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों ने बताया कि पक्षियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और कोई शिकार की घटना न हो, इसके लिए विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं।
- गश्त: झील के चारों ओर वन रक्षकों की गश्त बढ़ा दी गई है।
- प्लास्टिक पर प्रतिबंध: पर्यटकों से अपील की गई है कि वे सेंचुरी के भीतर प्लास्टिक या शोर मचाने वाली सामग्री न ले जाएं, ताकि पक्षियों के प्राकृतिक आवास में खलल न पड़े।
- जैव विविधता का संरक्षण: झील के जलस्तर और उसमें मौजूद छोटी मछलियों व वनस्पति का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जो इन पक्षियों का मुख्य भोजन हैं।
स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिला बल
सेंचुरी में बढ़ती पर्यटकों की संख्या से स्थानीय दुकानदारों और गाइडों के चेहरों पर भी मुस्कान है। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन यहाँ बुनियादी सुविधाओं (जैसे बेहतर कैंटीन और हाई-डेफिनेशन दूरबीन) का विस्तार करे, तो यह स्थल अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूती से उभर सकता है।
निष्कर्ष
शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार न केवल उन्नाव की शान है, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में जैव विविधता के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। 6,000 से अधिक पक्षियों का यहाँ पहुँचना यह दर्शाता है कि आज भी प्रकृति को अगर थोड़ा सा संरक्षण मिले, तो वह खिल उठती है। यदि आप भी प्रकृति के करीब जाना चाहते हैं, तो इस समय नवाबगंज बर्ड सेंचुरी की यात्रा आपके लिए यादगार साबित होगी।
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