CRS पोर्टल हैक कर बनाए 2620 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक बार फिर फर्जी दस्तावेजों के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। मियागंज ब्लॉक की दो ग्राम पंचायतों में ‘सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ (CRS) की सरकारी यूजर आईडी हैक कर 2620 संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रमाण पत्रों का संबंधित ग्राम सभा के निवासियों से कोई लेना-देना नहीं है। इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन और पंचायत राज विभाग में खलबली मच गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
साइबर सेंधमारी से सिस्टम फेल
जांच में सामने आया है कि मियागंज तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिनैका और आसीवन तरफ कादिरपुर की आधिकारिक आईडी का इस्तेमाल कर अज्ञात जालसाजों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। यह खेल तब पकड़ा गया जब तैनात ग्राम पंचायत सचिवों ने डेटा का मिलान किया।
बिनैका ग्राम पंचायत: 1082 फर्जी प्रमाण पत्र
ग्राम पंचायत बिनैका की सीआरएस यूजर आईडी (UP-17477-RE) के जरिए भारी अनियमितता की पुष्टि हुई है। सचिव सचिन थारु के मुताबिक, 1 जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2021 के बीच इस आईडी से रिकॉर्ड संख्या में 1082 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए। जब सचिव ने आवेदकों की सूची का भौतिक सत्यापन किया, तो पता चला कि ये लोग गांव के निवासी ही नहीं हैं। शक है कि बाहरी तत्वों ने आईडी और पासवर्ड हैक कर थोक के भाव में डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया है।
आसीवन तरफ कादिरपुर: 1525 का ‘फर्जी’ आंकड़ा
इसी तरह का खेल ग्राम पंचायत आसीवन तरफ कादिरपुर (ID: UP-17448-RE) में भी खेला गया। यहां के सचिव अभिषेक वर्मा ने शुरुआती जांच में सिर्फ 8 प्रमाण पत्रों पर संदेह जताया था। लेकिन जब लॉग्स की गहन पड़ताल की गई, तो परतें खुलती चली गईं और संदिग्ध दस्तावेजों की संख्या बढ़कर 1525 पहुंच गई। महज एक साल के भीतर इतनी बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र जारी होना सीधे तौर पर साइबर हमले की ओर इशारा करता है।
सुरक्षा और राष्ट्रवाद पर सवाल
जन्म प्रमाण पत्र किसी भी नागरिक का आधारभूत दस्तावेज होता है। इसके आधार पर पासपोर्ट, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाए जाते हैं। इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल अवैध नागरिकों को ‘वैध’ बनाने के लिए किया जा सकता है।
क्या यह किसी बड़े सिंडिकेट का काम है?
यह पहली बार नहीं है जब उन्नाव में ऐसा हुआ हो। इससे पहले अगस्त 2025 में भी हसनगंज तहसील की निमादपुर, मकूर, संदाना और मियागंज की कोटरा ग्राम पंचायत में 7103 फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने से हड़कंप मचा था। बार-बार एक ही क्षेत्र में आईडी हैक होने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि कोई संगठित गिरोह सक्रिय है, जो सरकारी पोर्टल की तकनीकी खामियों का फायदा उठा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस रिपोर्ट
दोनों ग्राम पंचायतों के सचिवों ने खंड विकास अधिकारी (BDO) और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को लिखित शिकायत भेज दी है। डीपीआरओ ने स्पष्ट किया है कि यह सीधे तौर पर आईटी एक्ट और धोखाधड़ी का मामला है। पुलिस से मांग की गई है कि साइबर सेल की मदद से उन आईपी एड्रेस (IP Address) का पता लगाया जाए, जहां से ये आईडी लॉगिन की गई थीं।
ग्रामीणों और अधिकारियों में डर का माहौल
इस खुलासे के बाद स्थानीय प्रशासन ने पुराने सभी जारी प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जो भी प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाएगा। साथ ही, आम जनता को आगाह किया गया है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही दस्तावेज बनवाएं।
निष्कर्ष: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सुविधाएं ऑनलाइन हो रही हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने का नया रास्ता खोज लिया है। उन्नाव का यह मामला एक चेतावनी है कि अब केवल पासवर्ड बदलना काफी नहीं है, बल्कि डिजिटल ट्रांजैक्शन और पोर्टल सिक्योरिटी के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ जैसे कड़े इंतजाम अनिवार्य करने होंगे।
रिपोर्ट, [ प्रलभ शरण चौधरी/Truth India Times]
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