मोहान रजबहा टूटने से हाजीपुर तरेहा में तबाही; 100 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न, किसानों के अरमानों पर फिरा पानी

उन्नाव | उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में सिंचाई विभाग की लापरवाही और जर्जर नहर प्रणाली का खामियाजा एक बार फिर अन्नदाता को भुगतना पड़ा है। लखनऊ के शारदा नगर खंड-2 से निकलने वाले मोहान रजबहा में बीती रात भीषण कटान हो गया। हाजीपुर तरेहा गांव के पास नहर की पटरी टूटने से लाखों गैलन पानी आसपास के रिहाइशी इलाकों और खेतों में घुस गया। इस अचानक आई जलप्रलय ने लगभग 100 बीघा गेहूं की तैयार फसल को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

आधी रात को मची अफरा-तफरी

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात जब पूरा गांव सो रहा था, तभी हाजीपुर तरेहा गांव के निकट मोहान रजबहा की पटरी अचानक दरक गई। देखते ही देखते पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि उसने आस-पास के खेतों को तालाब में तब्दील कर दिया। ग्रामीणों को जब सुबह इस कटान का पता चला, तब तक काफी देर हो चुकी थी और पानी दूर-दूर तक फैल गया था। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी, लेकिन आरोप है कि अमला मौके पर पहुंचने में काफी सुस्त रहा।

तैयार फसल हुई बर्बाद

वर्तमान में गेहूं की फसल कटाई की ओर अग्रसर है। किसानों ने दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार की थी, लेकिन नहर कटने से पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है। जलमग्न हुए खेतों में फसल के सड़ने और गिरने का खतरा पैदा हो गया है। प्रभावित किसानों का कहना है कि 100 बीघा से अधिक जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल अब पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है। “हमने खाद और बीज के लिए कर्ज लिया था, अब हम इसे कैसे चुकाएंगे?” यह सवाल हाजीपुर तरेहा के हर दूसरे किसान की जुबान पर है।

प्रशासन और विभाग की कार्यशैली पर सवाल

स्थानीय ग्रामीणों में सिंचाई विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का आरोप है कि नहर की पटरियों की समय पर मरम्मत और सफाई नहीं की जाती, जिसके कारण हर साल इस तरह के कटान की घटनाएं होती हैं। मोहान रजबहा की जर्जर हालत के बारे में पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन विभाग ने शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार किया। घटना के घंटों बाद भी बहाव को पूरी तरह न रोक पाने के कारण पानी का दायरा बढ़ता ही जा रहा है।

मुआवजे की उठ रही मांग

प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि तत्काल मौके का मुआयना कर नुकसान का सर्वे कराया जाए। किसानों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए ताकि वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें। फिलहाल, ग्रामीण अपने स्तर पर मिट्टी और बोरियां लगाकर कटान को भरने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि पानी को और अधिक खेतों में जाने से रोका जा सके।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़ित किसानों को राहत पहुँचाने के लिए क्या कदम उठाता है। ‘Truth India Times’ इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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