उन्नाव के ऐतिहासिक चंद्रिका देवी मंदिर में दानपात्र चोरी
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव/बक्सर: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद अंतर्गत बारासगवर थाना क्षेत्र में स्थित सुप्रसिद्ध और सैकड़ों वर्ष पुराने मां चंद्रिका देवी मंदिर में हुई चोरी की घटना ने कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। शनिवार की तड़के जब मंदिर के कपाट खुले, तो भक्तों को मां के दर्शन से पहले बिखरी हुई व्यवस्था और गायब दानपात्र मिला। यह घटना केवल एक चोरी नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरी चोट है।
वारदात का विवरण: रात 1:40 बजे ‘मिशन चोरी’
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे इस दुस्साहसिक चोरी की सूचना मिली। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर जो सच सामने आया, वह हैरान करने वाला है। बीती रात लगभग 1:40 बजे, जब पूरा क्षेत्र गहरी नींद में था, दो नकाबपोश संदिग्ध मंदिर परिसर में दाखिल हुए। चोरों ने बड़ी ही सफाई से मुख्य दानपात्र को निशाना बनाया और उसे उठाकर रफूचक्कर हो गए।
दानपात्र में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाई गई बड़ी मात्रा में नकदी और चढ़ावा होने का अनुमान है। सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी (CO) बीघापुर मधुपनाथ मिश्रा और बारासगवर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने भी साक्ष्य जुटाए हैं, लेकिन चोरों का इतनी आसानी से मंदिर के भीतर पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है।
आस्था का केंद्र और प्रशासन की लापरवाही
बक्सर स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर कोई साधारण स्थल नहीं है; यह जनपद की आध्यात्मिक धरोहर है। यहाँ न केवल उन्नाव, बल्कि रायबरेली, कानपुर और फतेहपुर जैसे जिलों से भी हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आते हैं।
भक्तों का आक्रोश: चोरी की खबर फैलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों और भक्तों में प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त रोष है। श्रद्धालुओं का सीधा सवाल है कि जिस मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और जहाँ लाखों का चढ़ावा आता है, वहां रात्रिकालीन सुरक्षा गार्ड या पुलिस पिकेट की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं थी? क्या प्रशासन को केवल मेलों के दौरान ही सुरक्षा की याद आती है?
CCTV में कैद गुनहगार, पुलिस के हाथ अब भी खाली
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध व्यक्ति साफ देखे जा सकते हैं। हालांकि, चेहरे ढके होने के कारण उनकी पहचान में मुश्किलें आ रही हैं। पुलिस की टीमें आसपास के गांवों और संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं, लेकिन घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है। जिले में लगातार बढ़ती चोरी की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब पुलिस के पेट्रोलिंग दावों से नहीं डरते।
सरकार और पुलिस महानिदेशक (DGP) से ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ के सवाल
1. धार्मिक स्थलों का सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं? जब सरकार ‘धार्मिक पर्यटन’ और ‘मंदिरों के जीर्णोद्धार’ पर करोड़ों खर्च कर रही है, तो इन प्राचीन मंदिरों की भौतिक सुरक्षा (Physical Security) को लेकर कोई मानक तय क्यों नहीं किए गए? क्या ऐतिहासिक मंदिरों में सीसीटीवी के अलावा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती अनिवार्य नहीं होनी चाहिए?
2. पुलिस गश्त की हकीकत क्या है? बारासगवर क्षेत्र में पुलिस की रात्रिकालीन गश्त पर बड़ा सवाल है। अगर पुलिस सक्रिय होती, तो क्या मुख्य मार्ग पर स्थित इतने बड़े मंदिर में चोर इतनी आसानी से सेंध लगा पाते?
3. दानपात्रों की सुरक्षा का मैकेनिज्म: क्यों न ऐसे मंदिरों के दानपात्रों को जमीन में ‘फिक्स्ड’ या ‘एंटी-थेफ्ट’ तकनीक से लैस किया जाए? प्रशासन मंदिर समितियों को इसके लिए निर्देशित क्यों नहीं करता?
एक्शन की मांग: अब और आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए
ट्रुथ इंडिया टाइम्स शासन और प्रशासन से निम्नलिखित मांगें करता है:
- 72 घंटे के भीतर गिरफ्तारी: सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र के जरिए चोरों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजा जाए और चोरी किया गया दानपात्र बरामद हो।
- स्थायी पुलिस पिकेट: मां चंद्रिका देवी मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर 24×7 पुलिस पिकेट या होमगार्ड्स की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
- सुरक्षा घेरे का विस्तार: मंदिर परिसर के बाहर मुख्य सड़कों पर भी हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि अपराधियों के आने-जाने के रास्तों को ट्रैक किया जा सके।
- जिम्मेदारी तय हो: ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले स्थानीय बीट कांस्टेबलों और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
निष्कर्ष: आस्था की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी
चंद्रिका देवी मंदिर में हुई यह चोरी केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, यह सरकार के लिए चेतावनी है। यदि पवित्र स्थलों पर भी असुरक्षा का माहौल रहेगा, तो आम नागरिक खुद को कहाँ सुरक्षित पाएगा? स्थानीय विधायक और सांसद को भी इस मामले में हस्तक्षेप कर मंदिर की सुरक्षा के लिए ठोस फंड और नीति की व्यवस्था करनी चाहिए।
श्रद्धालु अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे; उन्हें कार्रवाई चाहिए।
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