प्रभारी सीएमओ का पीएचसी पर औचक छापा
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश सरकार की मंशानुसार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक सुलभ बनाने के संकल्प के साथ रविवार को प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एच.एन. प्रसाद ने जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का औचक निरीक्षण किया। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। डॉ. प्रसाद ने न केवल रजिस्टरों की जांच की, बल्कि जमीन पर बैठकर मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद कर व्यवस्थाओं की पोल भी परखी।
रजिस्ट्रेशन से लेकर ओपीडी तक की बारीकी से जांच
प्रभारी सीएमओ डॉ. एच.एन. प्रसाद सुबह अचानक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और सीधे पंजीकरण काउंटर की ओर रुख किया। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों से मरीजों के आने के समय और पर्चा बनाने की प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की। इसके बाद वे ओपीडी (OPD) कक्ष और प्रतीक्षालय पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि क्या डॉक्टर समय पर अपनी कुर्सी पर मौजूद हैं या नहीं।
मरीजों के बैठने के लिए बने प्रतीक्षालय में उन्होंने खुद तीमारदारों के पास जाकर उनसे बात की। डॉ. प्रसाद ने पूछा, “क्या डॉक्टर साहब ने आपसे ठीक से बात की? क्या आपको बाहर की दवा तो नहीं लिखी जा रही?” अधिकांश मरीजों ने संतोष जताया, लेकिन कुछ ने कतार लंबी होने और कुछ विशिष्ट दवाइयों की उपलब्धता न होने की शिकायत भी दर्ज कराई।
दवा भंडार में स्टॉक रजिस्टर की पड़ताल
निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दवा भंडार (Drug Store) की जांच रहा। प्रभारी सीएमओ ने फार्मासिस्ट को स्टॉक रजिस्टर दिखाने के निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर मौजूद दवाइयों के बैच नंबर और एक्सपायरी डेट का मिलान किया।
डॉ. प्रसाद ने कड़े लहजे में फार्मासिस्ट और केंद्र प्रभारी को निर्देशित किया कि:
- अस्पताल में आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां (Life Saving Drugs) हर समय पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए।
- दवाइयों का मांग पत्र (Indent) समय से भेजा जाए ताकि स्टॉक खत्म होने की नौबत न आए।
- यदि कोई डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध दवा होने के बावजूद बाहर का पर्चा लिखता है, तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का लिया जायजा
रविवार का दिन होने के कारण स्वास्थ्य केंद्र पर ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले’ का आयोजन भी किया गया था। प्रभारी सीएमओ ने मेले के काउंटरों पर जाकर जांच सुविधाओं, जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर टेस्ट और टीकाकरण की स्थिति को देखा। उन्होंने साफ-सफाई पर विशेष जोर देते हुए कहा कि अस्पताल का वातावरण स्वच्छ होना चाहिए, जिससे मरीजों को सकारात्मक ऊर्जा मिले।
उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए कि आरोग्य मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के उन लोगों तक पहुँचना है जो जिला अस्पताल नहीं जा सकते। इसलिए, इस मेले में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का गहन परीक्षण और परामर्श सुनिश्चित किया जाए।
लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की चेतावनी
मरीजों से फीडबैक लेने के बाद प्रभारी सीएमओ ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों की एक संक्षिप्त बैठक ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के साथ सम्मानजनक और पारदर्शी व्यवहार करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या काम में चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. प्रसाद ने कहा, “सरकारी अस्पताल गरीबों और असहायों का सहारा होते हैं। यदि हम उन्हें समय पर इलाज और दवा नहीं दे पाए, तो यह हमारी नैतिक और व्यावसायिक हार है।” उन्होंने मरीजों से भी अपील की कि यदि कोई कर्मचारी इलाज के बदले सुविधा शुल्क मांगता है या बाहर की दवा लिखता है, तो इसकी सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों को दें।
निष्कर्ष: भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा की ओर कदम
निरीक्षण के अंत में डॉ. एच.एन. प्रसाद ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे समय-समय पर स्वयं भी इसी तरह के औचक निरीक्षण करें। उनका यह दौरा यह संदेश देने के लिए काफी था कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर सुधरेगी। आम जनता ने प्रभारी सीएमओ की इस सक्रियता की सराहना की है, जिससे सरकारी चिकित्सा तंत्र के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है।
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