फिसड्डी विभागों को 'अल्टीमेटम'
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले ‘मुख्यमंत्री डैशबोर्ड’ और विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर उन्नाव जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। विकास भवन स्थित सभागार में जिलाधिकारी गौरांग राठी की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जिले की विकास रैंकिंग और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने ढिलाई बरतने वाले विभागों को आड़े हाथों लिया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रगति नहीं सुधरी, तो संबंधित अधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
खराब रैंकिंग वाले विभागों को कड़ी फटकार
जिलाधिकारी गौरांग राठी ने समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ महत्वपूर्ण विभागों का प्रदर्शन सीएम डैशबोर्ड पर संतोषजनक नहीं है। विशेष रूप से पंचायती राज, ग्राम्य विकास, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME), नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की रैंकिंग खराब पाई गई। इन विभागों के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए डीएम ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप कार्यों की गति और गुणवत्ता में तत्काल सुधार लाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रैंकिंग में गिरावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और स्थिति न सुधरने पर विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
इसके अतिरिक्त, अल्पसंख्यक कल्याण, नियोजन, पिछड़ा वर्ग कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभागों को भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और बेहतर प्रयास करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अगली समीक्षा बैठक से पहले इन विभागों की रैंकिंग में स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव दिखना अनिवार्य है।
‘B’ से ‘A’ श्रेणी में आने का लक्ष्य
बैठक में उन आठ विभागों की भी बारीकी से समीक्षा की गई जो वर्तमान में ‘बी’ (B) श्रेणी में शामिल हैं। जिलाधिकारी ने इन विभागों के प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी कमियों को चिन्हित करें और ‘ए’ (A) श्रेणी में स्थान पाने के लिए एक ठोस लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करें। उन्होंने जोर दिया कि अधिकारियों को केवल कागजी खानापूर्ति के बजाय धरातल पर परिणाम दिखाने होंगे। नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने और कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया।
किसानों की आय बढ़ाने और मूल्य संवर्धन पर चर्चा
विकास कार्यों के साथ-साथ कृषि और उद्यान विभाग की प्रगति पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सहयोग से प्रगतिशील किसानों द्वारा किए जा रहे कार्यों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन (PPT) प्रस्तुत की गई।
जिलाधिकारी ने इस पर चर्चा करते हुए कहा कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है। उन्होंने नए आय स्रोतों को विकसित करने, फसलों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) और प्रसंस्करण (Processing) गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि किसानों को नई तकनीक और योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए ताकि वे अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
समीक्षा बैठक में प्रशासन के आला अधिकारियों की मौजूदगी रही। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) कृतिराज, परियोजना निदेशक तेजवंत सिंह, जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरि नंदन प्रसाद ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट पेश की।
इनके अलावा जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक कुमार सिन्हा, जिला प्रोबेशन अधिकारी क्षमानाथ राय, जिला सूचना एवं पर्यटन अधिकारी संतोष कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम (ग्रामीण) अजीत कुमार, सहायक श्रमायुक्त एस.एन. नागेश और जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रकाश पांडेय सहित अन्य संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने अंत में निर्देश दिया कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आपसी समन्वय के साथ योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाना सुनिश्चित करें।
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