सिस्टम की आंखों पर ‘नशे’ की पट्टी! शुक्लागंज में सरेआम बिक रहा मौत का सामान; क्या पुलिस को गांजा तस्करों ने पहना दिया है ‘पैसों का काला चश्मा’?

उन्नाव (शुक्लागंज)। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का शुक्लागंज क्षेत्र इन दिनों नशे के सौदागरों के लिए ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित ठिकाना) बन चुका है। हद तो तब हो गई जब सोशल मीडिया पर एक युवक का खुलेआम गांजा बेचते हुए वीडियो वायरल हो गया। 44 सेकंड के इस वीडियो ने गंगाघाट पुलिस के ‘इकबाल’ को सरेराह नीलाम कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जिस नशे के कारोबार की जानकारी गली-मुहल्ले में रहने वाले आम नागरिक को है, क्या उसकी भनक खाकी को नहीं है? या फिर जानबूझकर ‘अंजन’ बनने का स्वांग रचा जा रहा है? क्या सफेद जहर के इन सौदागरों ने पुलिस की आंखों पर ‘पैसों का ऐसा काला चश्मा’ चढ़ा दिया है, जिसके आगे उन्हें ये अवैध कारोबार दिखाई ही नहीं देता?

आम जनता को पता है ठिकाना, तो पुलिस क्यों है ‘अंधी’?

शुक्लागंज के गली-कूचों में यह चर्चा आम है कि गांजा कहां मिलता है, कौन सप्लाई करता है और इसके पीछे कौन से सफेदपोश हाथ हैं। जब एक आम आदमी वीडियो बनाकर तस्कर को टोक सकता है, उसे घेर सकता है, तो क्या भारी-भरकम खुफिया तंत्र और ‘मुखबिर खास’ का दावा करने वाली पुलिस वाकई इतनी बेखबर है? वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक युवक झोले में गांजे की पुड़िया भरकर मौत का सामान बांट रहा है। तीन युवकों ने साहस दिखाकर उसे रंगे हाथ पकड़ने की कोशिश की और वीडियो बनाया, जो अब पुलिस के मुंह पर करारा तमाचा बन चुका है।

क्या पैसों की खनक ने बंद कर दिए पुलिस के कान?

स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि बिना संरक्षण के इस तरह सरेआम नशा बेचना मुमकिन नहीं है। जनता पूछ रही है कि क्या पुलिस और नशे के सौदागरों के बीच कोई ‘अपवित्र गठबंधन’ हो चुका है? क्या वर्दी पर लगा दाग अब पैसों की चमक से ढका जा रहा है? यदि प्रशासन की नीयत साफ होती, तो वीडियो वायरल होने का इंतजार नहीं किया जाता, बल्कि अब तक शुक्लागंज के उन अड्डों को नेस्तनाबूद कर दिया गया होता, जहां से यह ‘जहर’ सप्लाई हो रहा है।

गंगाघाट कोतवाली: जांच का ‘लॉलीपॉप’ या होगी कार्रवाई?

वीडियो वायरल होने के बाद हमेशा की तरह गंगाघाट कोतवाली प्रभारी अजय कुमार सिंह का वही रटा-रटाया बयान सामने आया है— “मामले की जांच की जा रही है, वीडियो की सत्यता जांची जाएगी।” लेकिन जनता पूछ रही है कि जांच के नाम पर और कितना समय दिया जाएगा? क्या पुलिस तब जागेगी जब नशे की यह लत घर-घर तक पहुंच जाएगी?

प्रभारी निरीक्षक ने कहा है कि वीडियो में दिख रहे युवक की पहचान की जा रही है और पुष्टि होने पर कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल फिर वही है— क्या पुलिस को वाकई पहचान की जरूरत है या वह पहले से ही इन ‘चेहरों’ से वाकिफ है?

‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ के कड़े सवाल:

  1. खुफिया तंत्र फेल या फिक्स? जब आम जनता को पता है कि गांजा कहां बिक रहा है, तो पुलिस का एलआईयू (LIU) और मुखबिर तंत्र क्या सो रहा है?
  2. कैसी है ये गश्त? पुलिस की गश्त और ‘एंटी रोमियो’ जैसे दस्तों को क्या सरेराह बिकता गांजा कभी नजर नहीं आता?
  3. कौन है असली आका? झोले में पुड़िया लेकर घूमने वाला युवक तो सिर्फ एक मोहरा है, पुलिस उस बड़ी मछली पर हाथ क्यों नहीं डालती जो शुक्लागंज में नशे की खेप उतार रही है?

शुक्लागंज की जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है। अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो के बाद पुलिस वाकई अपनी आंखों से ‘पैसों की पट्टी’ उतारकर कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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