राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग करने वाले परिवार का निकला आपराधिक इतिहास, पुलिस ने आरोपों को बताया दबाव बनाने की रणनीति

उन्नाव : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक परिवार द्वारा राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु (Euthanasia) मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। वीडियो में एक युवक और उसकी मां ने स्थानीय राजनीतिक रसूखदार व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, मामले की जांच के बाद उन्नाव पुलिस ने जो तथ्य पेश किए हैं, उसने इस पूरे प्रकरण को एक नया मोड़ दे दिया है। पुलिस के अनुसार, आरोप लगाने वाले युवक का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है।

क्या है वायरल वीडियो का मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अचलगंज थाना क्षेत्र के मान्धाता खेड़ा निवासी आकाश रैदास और उसकी मां तारा देवी नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्होंने नगर पालिका परिषद उन्नाव के अध्यक्ष के पति भानू मिश्रा पर आरोप लगाया है कि उनके दबाव में पुलिस ने आकाश पर झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भिजवाया। परिवार का यह भी दावा है कि उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल करने की धमकी दी जा रही है। इन्हीं परिस्थितियों से तंग आकर उन्होंने सामूहिक रूप से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।

पुलिस का पलटवार: ‘आरोपी का है पुराना आपराधिक इतिहास’

इस हाई-प्रोफाइल मामले पर संज्ञान लेते हुए अचलगंज प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश शुक्ला ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आकाश रैदास कोई निर्दोष व्यक्ति नहीं बल्कि एक आदतन अपराधी है।

  • पॉक्सो एक्ट (2020): आकाश के खिलाफ वर्ष 2020 में थाना अचलगंज में नाबालिग से छेड़छाड़ (पॉक्सो एक्ट) के तहत गंभीर मामला दर्ज किया गया था।
  • आर्म्स एक्ट (2025): बीते 29 अक्टूबर 2025 को थाना दही पुलिस ने आकाश को अवैध शस्त्र के साथ गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे विधिक प्रक्रिया के तहत जिला कारागार भेजा गया था।

पुलिस का कहना है कि आकाश पर दर्ज मुकदमे पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर हैं और इसमें किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक साजिश की बात निराधार है।


📊 मामले का संक्षिप्त विश्लेषण (Police Report)

विवरण (Description)तथ्य (Facts)
शिकायतकर्ताआकाश रैदास एवं तारा देवी
मुख्य आरोपझूठा मुकदमा और संपत्ति पर कब्जे की धमकी
नामजद व्यक्तिभानू मिश्रा (नगर पालिका अध्यक्ष पति)
पुलिस की जांचआरोप निराधार, विधिक प्रक्रिया के तहत हुई जेल
अपराधिक रिकॉर्डपॉक्सो एक्ट (2020), आर्म्स एक्ट (2025)

साजिश या सुरक्षा? पुलिस कर रही है निगरानी

प्रशासन का मानना है कि आकाश रैदास द्वारा इच्छामृत्यु का वीडियो जारी करना दरअसल पुलिस और विपक्षी पक्ष पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह इन आरोपों के जरिए अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों को खत्म कराना चाहता है। फिलहाल आकाश लखनऊ में रहकर अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहा है।

भ्रामक जानकारी पर होगी कार्रवाई

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की तकनीकी जांच की जा रही है। यदि यह पाया गया कि वीडियो के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाकर कानून व्यवस्था को चुनौती दी गई है, तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऐसी भावुक अपीलों की सच्चाई जाने बिना उन पर विश्वास न करें।

फिलहाल, इस मामले ने जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। पुलिस पूरी सतर्कता के साथ इस प्रकरण की निगरानी कर रही है।

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