लेखपाल की शह पर किसान की जमीन निगल रहे दबंग! 2 बीघा पुश्तैनी खेत बचाने के लिए DM की चौखट पर ‘तुलसी’

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में भू-माफियाओं और राजस्व कर्मियों की कथित ‘जुगलबंदी’ के कारण गरीब किसानों की पुश्तैनी जमीनें सुरक्षित नहीं रह गई हैं। ताजा मामला गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के निहाल खेड़ा गांव का है, जहां एक किसान अपनी दो बीघा जमीन बचाने के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर भटकने को मजबूर है। शुक्रवार को पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई और हल्का लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की।

क्या है पूरा विवाद?

मामला गंगाघाट क्षेत्र के निहाल खेड़ा गांव के मजरा पिउतर खेड़ा से जुड़ा है। यहां के निवासी किसान तुलसी की दो बीघा आठ बिस्वा पुश्तैनी जमीन है। तुलसी का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज रकबे के बावजूद धरातल पर उनकी जमीन पहले से ही लगभग दो बिस्वा कम है। अपनी इस कमी को पूरा करने के बजाय, अब गांव के ही दबंगों की नजर उनकी बची हुई जमीन पर भी गड़ गई है।

तुलसी ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि गांव के अयोध्या प्रसाद और उनके कुछ साथी मिलकर उनकी पुश्तैनी भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। दबंगों द्वारा जमीन पर घेराबंदी और अवैध गतिविधियों से किसान का परिवार दहशत में है।

लेखपाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चौकाने वाला आरोप क्षेत्र के हल्का लेखपाल पंकज मिश्रा पर लगा है। पीड़ित तुलसी ने सीधे तौर पर कहा कि लेखपाल की भूमिका इस विवाद में संदिग्ध है। किसान का दावा है कि लेखपाल की शह पर ही दबंगों के हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम जमीन कब्जाने की धमकियां दे रहे हैं।

किसान का आरोप है कि लेखपाल निष्पक्ष जांच करने के बजाय विपक्षी दल का साथ दे रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी ही जमीन पर बेदखल होने का डर सता रहा है। राजस्व विभाग के एक छोटे कर्मचारी की कार्यप्रणाली ने एक बार फिर पूरे विभाग की साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

एसडीएम दफ्तर से नहीं मिली राहत, अब डीएम से आस

पीड़ित तुलसी ने बताया कि यह उनकी पहली शिकायत नहीं है। इससे पहले उन्होंने उपजिलाधिकारी (SDM) कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। लेकिन, अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें कोई ठोस आश्वासन या राहत नहीं मिली। एसडीएम दफ्तर से सुनवाई न होने पर किसान निराश होकर अंततः शुक्रवार को जिलाधिकारी की चौखट पर पहुंचा।

जिलाधिकारी कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने किसान की पीड़ा सुनी और मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है। हालांकि, किसान का कहना है कि जब तक मौके पर पैमाइश कर पत्थर नसब नहीं कर दिए जाते और दबंगों को रोका नहीं जाता, तब तक उन्हें चैन नहीं मिलेगा।

क्षेत्र में पनप रहा जनाक्रोश

निहाल खेड़ा गांव में इस जमीनी विवाद को लेकर ग्रामीणों के बीच भी सुगबुगाहट तेज है। लोगों का कहना है कि अगर एक किसान की पुश्तैनी जमीन पर राजस्व कर्मी की मिलीभगत से कब्जा होगा, तो आम आदमी कहां जाएगा? स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों के गठजोड़ को तोड़ा जाए।

भू-माफियाओं पर ‘जीरो टॉलरेंस’ या केवल कागजी दावा?

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दे रही है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी गरीब की जमीन पर कब्जा नहीं होना चाहिए। लेकिन उन्नाव का यह मामला बताता है कि धरातल पर इन निर्देशों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्या एक गरीब किसान को अपना हक पाने के लिए ऐसे ही भटकना पड़ेगा? यह सवाल अब उन्नाव प्रशासन के सामने खड़ा है।

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