अब हर आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर होगा PSP का गठन, फाइलेरिया उन्मूलन के लिए DMO ने कसी कमर

उत्तर प्रदेश को फाइलेरिया मुक्त बनाने के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग अब जमीनी स्तर पर बड़ी घेराबंदी की तैयारी में है। मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पुरवा के सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला मलेरिया अधिकारी (DMO) अर्चना मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ब्लॉक के सभी ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ पर तत्काल पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफार्म (PSP) का गठन किया जाए।

क्या है PSP और क्यों है इसकी जरूरत?

फाइलेरिया जैसी गंभीर और लाइलाज (दिव्यांगता की स्थिति में) बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए सरकार केवल दवाओं पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन बनाना चाहती है। पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफार्म (PSP) इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

DMO अर्चना मिश्रा ने बताया कि अभी तक ब्लॉक के केवल पांच केंद्रों पर यह मॉडल चल रहा था, लेकिन इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इसे हर आरोग्य मंदिर पर लागू किया जा रहा है। इसका नेतृत्व कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) करेंगे, जिसमें ग्राम प्रधान, कोटेदार, आशा बहुएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वयं फाइलेरिया के मरीज सदस्य के रूप में जुड़ेंगे।

10 फरवरी से शुरू होगा महाअभियान (MDA)

प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी 10 फरवरी से शुरू होने वाला सर्वजन दवा सेवन (MDA) कार्यक्रम रहा।

  • लक्ष्य: शत-प्रतिशत पात्र जनसंख्या को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाना।
  • रणनीति: PSP सदस्य घर-घर जाकर लोगों को दवा के फायदों के बारे में बताएंगे।
  • नियम: लगातार 5 वर्षों तक साल में एक बार दवा का सेवन करने से फाइलेरिया के संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सकता है।

सफलता की कहानियों से मिला उत्साह

प्रशिक्षण के दौरान उन केंद्रों के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए जहाँ PSP पहले से सक्रिय है। CHO मनीषा ने बताया कि PSP के गठन के बाद से गांव के प्रभावशाली लोगों (जैसे प्रधान और कोटेदार) का सहयोग मिलने लगा है, जिससे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की स्वीकार्यता बढ़ी है। वहीं, कोटेदार संत प्रसाद ने कहा कि वे राशन वितरण के साथ-साथ लोगों को दवा खाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे अभियान को नई ताकत मिली है।

इनकी रही मौजूदगी

कार्यशाला में तकनीकी बारीकियों को समझाने के लिए फाइलेरिया इंस्पेक्टर विशाल और बीसीपीएम इशाक अली मौजूद रहे। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्थाओं जैसे CFAR, PATH और PCI के जिला प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और डेटा प्रबंधन व फील्ड एक्टिविटी पर प्रकाश डाला।

निष्कर्ष: जनभागीदारी ही एकमात्र समाधान

जिला मलेरिया अधिकारी ने जोर देकर कहा कि फाइलेरिया का मच्छर किसी में भेदभाव नहीं करता, इसलिए बचाव की दवा भी सभी को खानी होगी। PSP के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग अब सीधे सामुदायिक नेतृत्व (Community Leadership) से जुड़ गया है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो उन्नाव बहुत जल्द फाइलेरिया मुक्त जनपदों की सूची में अग्रणी होगा।

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