उन्नाव में ‘सरकारी’ जमीन पर चला प्रशासन का हंटर: गेरुआ गांव में 4 बीघा वन भूमि से हटा अवैध कब्जा; एडीएम के आदेश पर टीम ने दी दबिश

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में सरकारी संपत्तियों और वन विभाग की जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का अभियान अब रफ्तार पकड़ चुका है। ताजा मामला औरास थाना क्षेत्र के गेरुआ गांव का है, जहाँ वन विभाग की लगभग चार बीघा बेशकीमती जमीन को स्थानीय ग्रामीणों के अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। एडीएम उन्नाव के कड़े रुख और न्यायिक आदेश के बाद हरकत में आए प्रशासन ने भारी पुलिस बल और राजस्व टीम की मौजूदगी में इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

सालों से सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझकर बैठे कब्जाधारियों में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सालों पुराना कब्जा, एक झटके में हुआ साफ

जानकारी के मुताबिक, गेरुआ गांव में वन विभाग की इस भूमि पर कुछ ग्रामीणों ने लंबे समय से अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। इस जमीन का उपयोग कृषि कार्य या अन्य निजी उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था। वन विभाग ने इस अतिक्रमण के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी और जमीन की पैमाइश कराकर इसे खाली कराने की मांग की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम उन्नाव ने बेदखली के आदेश पारित किए। आदेश मिलते ही तहसील और वन विभाग की संयुक्त टीम ने रणनीति तैयार की और मंगलवार को मौके पर धावा बोल दिया।

मौके पर भारी अमला: पैमाइश के साथ हटा कब्जा

कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल के साथ वन विभाग के अधिकारियों की एक बड़ी टीम गेरुआ गांव पहुँची। टीम ने सबसे पहले सरकारी नक्शे के आधार पर चार बीघा जमीन की पैमाइश शुरू की। जैसे-जैसे पैमाइश आगे बढ़ी, वन विभाग की सीमा स्पष्ट होती गई।

इस दौरान मौके पर कब्जाधारी ग्रामीण भी मौजूद रहे। शुरू में कुछ लोगों ने विरोध करने की दबी जुबान में कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक अमले की सख्ती और कानूनी दस्तावेजों के आगे उनकी एक न चली। देखते ही देखते टीम ने अवैध रूप से किए गए घेराव और कब्जे को पूरी तरह हटा दिया और जमीन को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया।

वन दरोगा का बयान: ‘शासन के निर्देश पर हुई कार्रवाई’

क्षेत्रीय वन दरोगा प्रताप राम ने इस सफल अभियान के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, “शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि वन विभाग की एक-एक इंच जमीन को सुरक्षित किया जाए। गेरुआ गांव में ग्रामीणों ने अवैध रूप से चार बीघा जमीन दबा रखी थी। एडीएम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नायब तहसीलदार और राजस्व टीम के सहयोग से इस जमीन को आज पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया गया है।”

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि दोबारा इस जमीन पर किसी ने भी अतिक्रमण करने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कब्जाधारियों की उड़ी नींद: रडार पर अन्य गांव भी

गेरुआ गांव में हुई इस कार्रवाई के बाद औरास और आसपास के क्षेत्रों में खलबली मची हुई है। सूत्रों की मानें तो वन विभाग ने अब उन सभी भूखंडों की सूची तैयार कर ली है, जहाँ वन भूमि पर कब्जा किया गया है। आने वाले दिनों में औरास, सफीपुर और मियागंज क्षेत्र के अन्य गांवों में भी इसी तरह का ‘सफाई अभियान’ देखने को मिल सकता है।

ग्रामीणों की बेबसी और प्रशासन का तर्क

जहाँ एक ओर प्रशासन इसे कानून की जीत बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ ग्रामीणों का कहना है कि वे सालों से इस जमीन पर खेती कर रहे थे। हालांकि, राजस्व विभाग के अधिकारियों ने दो टूक कहा कि सरकारी जमीन पर किया गया कोई भी कब्जा ‘कानूनी’ नहीं हो सकता। वन विभाग की जमीन पर्यावरण संरक्षण के लिए सुरक्षित है और उस पर वृक्षारोपण किया जाना है।

अब क्या होगा इस जमीन का?

जमीन मुक्त होने के बाद वन विभाग ने यहाँ फेंसिंग (घेराबंदी) कराने की योजना बनाई है। आगामी पौधारोपण सीजन में इस चार बीघा जमीन पर सघन वृक्षारोपण किया जाएगा, ताकि क्षेत्र के ग्रीन कवर (हरियाली) को बढ़ाया जा सके और भविष्य में दोबारा अतिक्रमण की संभावना को खत्म किया जा सके।

निष्कर्ष: उन्नाव प्रशासन की यह कार्रवाई भूमाफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के लिए एक कड़ा संदेश है। गेरुआ गांव की इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि देर से ही सही, लेकिन कानून का डंडा जब चलता है तो बड़े से बड़ा कब्जा भी ढह जाता है। अब जिम्मेदारी वन विभाग की है कि वह अपनी इस बेशकीमती जमीन की निगरानी निरंतर करता रहे।


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