गौ संरक्षण के दावों की खुली पोल; गोशाला में तड़पकर मर रहे गोवंश, मृत गायों को नोच रहे कुत्ते, जिम्मेदार मौन

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां एक ओर गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये का बजट आवंटित कर रही है और अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रही है, वहीं उन्नाव जिले से आई एक रूह कंपा देने वाली तस्वीर ने इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। फतेहपुर 84 ब्लॉक के तकिया निगोही गांव स्थित अस्थाई गोशाला से एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप जाए। यह वीडियो न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि गोवंश के प्रति संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को भी दर्शाता है।

वायरल वीडियो: व्यवस्था पर बड़ा तमाचा

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में गोशाला के भीतर एक मृत गोवंश का शव खुले आसमान के नीचे पड़ा दिखाई दे रहा है। हृदय विदारक दृश्य तब सामने आता है जब आवारा कुत्ते उस मृत गोवंश के शव को नोच-नोच कर खा रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि शव कई घंटों या शायद दिनों से वहीं पड़ा है, लेकिन गोशाला के जिम्मेदार कर्मचारियों या अधिकारियों ने उसका निस्तारण करना उचित नहीं समझा।

बदहाली की भेंट चढ़ते गोवंश

ग्रामीणों के अनुसार, तकिया निगोही की इस अस्थाई गोशाला में अव्यवस्थाओं का अंबार है। यहां न तो गोवंशों के लिए चारे का पर्याप्त प्रबंध है और न ही भीषण ठंड या बीमारी से बचाने के लिए कोई ठोस इंतजाम। वीडियो बनाने वाले ग्रामीण ने बताया कि गोशाला में साफ-सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। बीमार गोवंशों को समय पर इलाज नहीं मिलता, जिसके कारण वे दम तोड़ देते हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि मौत के बाद उनके शवों का सम्मानजनक निस्तारण (दफनाने) करने के बजाय उन्हें खुले में फेंक दिया जाता है, जहां कुत्ते उन्हें अपना निवाला बना रहे हैं।

लाखों का बजट, फिर भी ऐसी दुर्दशा क्यों?

सरकार द्वारा प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण के लिए एक निश्चित धनराशि ग्राम पंचायतों और संबंधित विभागों को भेजी जाती है। सवाल यह उठता है कि आखिर वह पैसा जा कहाँ रहा है? यदि बजट आ रहा है, तो गोवंश भूखे क्यों मर रहे हैं? क्या अधिकारियों का काम सिर्फ कागजों पर गोशालाओं का निरीक्षण करना रह गया है?

तकिया निगोही के ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद ब्लॉक स्तर के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते। स्थानीय प्रशासन की चुप्पी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या इसमें भ्रष्टाचार का कोई बड़ा खेल शामिल है?

स्वास्थ्य और संक्रमण का खतरा

खुले में पड़े मृत गोवंश के शव केवल धार्मिक भावनाओं को ही आहत नहीं कर रहे, बल्कि पूरे इलाके में गंभीर बीमारियों और संक्रमण का खतरा भी पैदा कर रहे हैं। सड़ते हुए शवों से निकलने वाली दुर्गंध और कुत्तों द्वारा मांस के टुकड़ों को इधर-बधर फैलाए जाने से गांव में महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय निवासी संक्रामक बीमारियों के डर से सहमे हुए हैं, लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया है।

जन आक्रोश और कार्रवाई की मांग

इस वीडियो के वायरल होने के बाद से ही जनपद के लोगों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग कर दोषियों के खिलाफ ‘बुलडोजर’ जैसी सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो अधिकारी और कर्मचारी गोमाता के नाम पर मिलने वाले पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं और उनकी गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए।

समाधान की दरकार

यह खबर केवल एक घटना की रिपोर्टिंग नहीं है, बल्कि सरकार के लिए एक चेतावनी भी है। यदि समय रहते इन गोशालाओं की जमीनी हकीकत नहीं सुधारी गई, तो सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी ‘गोवंश संरक्षण योजना’ केवल फाइलों तक सिमट कर रह जाएगी।

ट्रुथ इंडिया टाइम्स की मांग है कि:

  1. फतेहपुर 84 ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों पर इस लापरवाही के लिए मुकदमा दर्ज हो।
  2. जिले की सभी गोशालाओं का रैंडम निरीक्षण कर वहां चारे और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  3. मृत गोवंशों के सम्मानजनक निस्तारण के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल बनाया जाए और उसकी निगरानी की जाए।

इस मामले में अभी तक जिला प्रशासन या पशुपालन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि वीडियो सामने आने के बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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