उन्नाव में दबंगई: जमीन कब्जाने के लिए उजाड़ दिया अमरूद का हरा-भरा बाग, 100 फलदार पेड़ काटे, दो पर FIR

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ भू-माफियाओं और दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने जमीन कब्जाने की नीयत से प्रकृति और किसान की मेहनत पर कुल्हाड़ी चला दी। मामला गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के सुखलाल खेड़ा गांव का है, जहाँ एक फलदार अमरूद के बाग को पूरी तरह उजाड़ दिया गया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रातों-रात साफ कर दिया ‘हरा सोना’

मिली जानकारी के अनुसार, सुखलाल खेड़ा निवासी पीड़ित किसान के बाग में अमरूद के लगभग 100 से अधिक हरे-भरे पेड़ लगे थे। आरोप है कि क्षेत्र के ही कुछ दबंगों की नजर इस बेशकीमती जमीन पर काफी समय से थी। जमीन पर अवैध कब्जा करने के उद्देश्य से आरोपियों ने साजिश रची और रात के अंधेरे में मजदूरों और औजारों के साथ बाग में घुस गए। देखते ही देखते सालों की मेहनत से तैयार किए गए फलदार पेड़ों को काट कर जमीनदोज कर दिया गया।

सुबह जब पीड़ित अपने बाग पहुंचा, तो वहां का मंजर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। चारों तरफ कटे हुए पेड़ और उजाड़ जमीन देख किसान बदहवास हो गया।

दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पीड़ित किसान की तहरीर के आधार पर गंगाघाट कोतवाली पुलिस ने गांव के ही दो रसूखदार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और ‘वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने साफ किया है कि पेड़ों की कटान के लिए किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि एक गंभीर अपराध है।

जमीन कब्जाने का पुराना विवाद

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो इस जमीन को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। आरोपी पक्ष इस जमीन पर अपना दावा ठोक रहा था, जबकि पीड़ित पक्ष के पास जमीन के पुख्ता कागजात होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि जब दबंग कानूनी रास्ते से जमीन नहीं ले पाए, तो उन्होंने बाग उजाड़कर किसान को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ने का प्रयास किया ताकि वह जमीन छोड़ने पर मजबूर हो जाए।

पर्यावरण और आजीविका पर प्रहार

इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरण प्रेमियों में भी रोष पैदा कर दिया है। 100 फलदार पेड़ों का कटना एक बड़े पारिस्थितिक नुकसान के साथ-साथ किसान की आजीविका पर सीधा प्रहार है। अमरूद का यह बाग किसान की आय का मुख्य स्रोत था। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस तरह की गुंडागर्दी पर लगाम नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।

पुलिस का रुख और आगामी कार्रवाई

गंगाघाट कोतवाली प्रभारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। उन्होंने कहा:

“किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। जमीन का विवाद कोर्ट या राजस्व विभाग तय करेगा, लेकिन हरे पेड़ों को काटना अपराध है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें जेल भेजा जाएगा।”

फिलहाल, गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि न केवल आरोपियों को सजा मिले, बल्कि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान का मुआवजा भी दिलाया जाए।

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