प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। रंगों का पावन पर्व होली अब अत्यंत समीप है और इसकी व्यापक झलक उन्नाव के बाजारों में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगी है। जनपद के मुख्य बाजारों से लेकर गलियों तक अबीर-गुलाल की सुगंध और पिचकारियों की सतरंगी आभा बिखर गई है। इस वर्ष बालकों के मध्य ‘हथौड़ा पिचकारी’ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, वहीं स्वास्थ्य के प्रति सचेत नागरिक रासायनिक रंगों का परित्याग कर प्राकृतिक (हर्बल) गुलाल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाजारों में उमड़ा जनसैलाब
जनपद के प्रमुख व्यापारिक केंद्र जैसे पोनी रोड, फोरलेन, और सदर बाजार के मुख्य मार्गों पर प्रातः काल से ही क्रेताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। पथ विक्रेताओं द्वारा सजाई गई अस्थाई दुकानों ने नगर की शोभा में अभिवृद्धि कर दी है। विस्तृत ढेरों में सजे गुलाल और रंग-बिरंगी टोपियां राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। व्यापारियों के अनुसार, विगत दो दिनों में ग्राहकों की संख्या में आशातीत वृद्धि हुई है, जिससे व्यापार में उत्तम लाभ की संभावना है।
होली बाजार: इस वर्ष की विशेषता (बाजार विश्लेषण चार्ट)
| सामग्री | विशेषता और रुझान | मांग की स्थिति |
| पिचकारी | हथौड़ा पिचकारी, गदा और टैंक वाली पिचकारी | सर्वाधिक (बालकों में अत्यंत प्रिय) |
| गुलाल | प्राकृतिक एवं जैविक गुलाल (चंदन, गुलाब युक्त) | उच्च (स्वास्थ्य के प्रति सजगता) |
| रंग | चटक और अमिट रंगों का स्थान अब अबीर ने लिया | निरंतर गिरावट |
| परिधान एवं मुखौटे | विशेष विग (Wig) और हास्य टोपियां | युवाओं का रुझान |
| मिष्ठान | गुजिया निर्माण हेतु खोया, मैदा एवं मेवे | चरम पर |
बालकों की प्रथम वरीयता: ‘हथौड़ा पिचकारी’
पिचकारियों के बाजार में इस वर्ष अनेक नवीन अभिकल्प (डिजाइन) उपलब्ध हैं, किंतु ‘हथौड़ा पिचकारी’ सर्वाधिक लोकप्रिय हो रही है। बालकों के मध्य पौराणिक गदा और आधुनिक हथौड़े के स्वरूप वाली यह पिचकारी अत्यंत मांग में है। इसके अतिरिक्त वायु-दाब (प्रेशर) वाले टैंक, विभिन्न कार्टून चरित्रों के मुखौटे और रंगीन फुहारों वाले यंत्र भी क्रय किए जा रहे हैं। विक्रेताओं के अनुसार, इन यंत्रों की मूल्य श्रेणी ₹20 से ₹800 के मध्य है, जो प्रत्येक वर्ग की क्रय शक्ति के अनुकूल है।
स्वास्थ्य सुरक्षा: प्राकृतिक रंगों का चयन
इस वर्ष उन्नाव के नागरिकों में त्वचा की रक्षा हेतु प्रशंसनीय जागरूकता देखी जा रही है। यही कारण है कि लोग त्वचा को हानि पहुँचाने वाले मिलावटी रंगों से दूरी बना रहे हैं। बाजारों में सुगंधित चंदन, मोगरा और केतकी के प्राकृतिक गुलाल की मांग सर्वोपरि है। ग्राहकों का मत है कि पर्व के पश्चात त्वचा संबंधी व्याधियों से सुरक्षित रहने हेतु वे प्राकृतिक रंगों का चयन कर रहे हैं।
गुजिया के अवयवों की भारी मांग
होली का यह उत्सव बिना पारंपरिक मिष्ठान ‘गुजिया’ के अपूर्ण माना जाता है। रंगों के साथ-साथ किराना और दुग्ध उत्पादों की दुकानों पर भी ग्राहकों का तांता लगा हुआ है। मैदा, सूजी, सूखे मेवे और मावा की दुकानों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। जिला प्रशासन ने भी शुद्धता सुनिश्चित करने हेतु खाद्य सुरक्षा विभाग को सक्रिय कर दिया है, जिससे पर्व के उल्लास में मिलावट का व्यवधान न आए।
प्रशासनिक सतर्कता एवं सुरक्षा
बाजारों में उमड़ती भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हैं। पोनी रोड और फोरलेन जैसे व्यस्त क्षेत्रों में यातायात सुचारु रखने हेतु अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। नागरिक सुरक्षा हेतु सादी वर्दी में भी पुलिस कर्मी गश्त कर रहे हैं ताकि असामाजिक तत्वों और हुड़दंगियों पर नियंत्रण रखा जा सके।
निष्कर्ष: सात्विक और हर्षोल्लासपूर्ण होली की तैयारी
उन्नाव का बाजार इस समय केवल रंगों से ही नहीं, अपितु लोक-उत्सव के उमंग से भी सराबोर है। ‘हथौड़ा पिचकारी’ का आकर्षण और प्राकृतिक गुलाल की सुवास इस तथ्य की पुष्टि करती है कि इस वर्ष की होली सुरक्षित, पारंपरिक और हर्षपूर्ण होगी।
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