ICU में लगी हाईटेक CPAP मशीन
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उन्नाव जनपद में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) को कम करने और स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने बुधवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सबसे बड़ी राहत की खबर देते हुए बताया कि जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) वार्ड में अत्याधुनिक सी-पैप (CPAP) मशीनें स्थापित कर दी गई हैं, जिससे गंभीर नवजातों को अब इलाज के लिए लखनऊ या कानपुर भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
नवजातों के लिए ‘संजीवनी’ बनेगी CPAP मशीन
उन्नाव जिला अस्पताल में अक्सर फेफड़ों की कमजोरी या सांस लेने में तकलीफ के कारण नवजातों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता था, जिससे रास्ते में ही कई बार अप्रिय घटनाएं हो जाती थीं। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने बताया कि जिला अस्पताल में नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि यूनिवर्सल हेल्थ केयर के सहयोग से एनआईसीयू में पहली सी-पैप मशीन लगा दी गई है। यह मशीन उन प्री-मैच्योर (समय से पूर्व जन्मे) बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी जिनके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। यह मशीन फेफड़ों को निरंतर ऑक्सीजन का दबाव प्रदान करती है, जिससे बच्चे को सांस लेने में मशक्कत नहीं करनी पड़ती। डीएम ने घोषणा की कि दूसरी मशीन भी जल्द ही चिकित्सा विभाग के समन्वय से अस्पताल पहुँच जाएगी।
रेफरल केसों में आएगी 50% तक की कमी
जिलाधिकारी ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि इन मशीनों के पूरी तरह संचालित होने से उन्नाव से बाहर रेफर किए जाने वाले बच्चों की संख्या में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी आएगी। अब जिले के ही विशेषज्ञ डॉक्टर गंभीर रूप से बीमार शिशुओं का इलाज यहाँ के एनआईसीयू वार्ड में कर सकेंगे। इससे न केवल कीमती समय बचेगा, बल्कि गरीब परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ में भी कमी आएगी।
ड्यूटी चार्ट और पारदर्शिता पर सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल के प्रशासनिक ढांचे की भी पड़ताल की। ड्यूटी चार्ट के संबंध में पूछे गए सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी कर्मियों का विवरण मैसेज डिस्प्ले बोर्ड पर नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन कर्मियों के पास विशेष तकनीकी कौशल या विशेषज्ञता है, उन्हें उनकी उपयोगिता के अनुसार ही तैनात रखा जाएगा ताकि मरीजों को सर्वश्रेष्ठ इलाज मिल सके।
रैन बसेरा को लेकर नाराजगी, सुधार के आदेश
अस्पताल परिसर में तीमारदारों की सुविधा के लिए बने रैन बसेरा के बंद होने की शिकायतों को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान दोपहर में रैन बसेरा बंद मिला था, जिसे शाम को कड़ी हिदायत के बाद खुलवाया गया।
डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि:
- रैन बसेरा 24 घंटे चालू रहना चाहिए।
- ठंड को देखते हुए नगर पालिका के माध्यम से अलाव की उचित व्यवस्था की जाए।
- तीमारदारों के लिए बिस्तर और सफाई के पुख्ता इंतजाम हों।
- यदि रात में रैन बसेरा दोबारा बंद पाया गया, तो संबंधित जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
“लापरवाही बर्दाश्त नहीं, प्राथमिकता सिर्फ मरीज”
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले हर मरीज और उनके तीमारदारों को बेहतर सुविधाएं और सम्मानजनक व्यवहार मिलना चाहिए। उन्होंने सीएमएस और अन्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि दवाइयों की उपलब्धता और सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए।
जिलाधिकारी के इस औचक निरीक्षण और नई मशीनों की सौगात से आम जनता में विश्वास जगा है कि अब उन्नाव के सरकारी अस्पतालों में भी प्राइवेट अस्पतालों जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
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