उन्नाव SSP का मानवीय चेहरा: गश्त के दौरान पलटी दिखी कार, खुद रेस्क्यू कर घायलों को सरकारी गाड़ी से पहुँचाया अस्पताल

उन्नाव। खाकी का खौफ अपराधियों के लिए तो हमेशा रहता है, लेकिन जब मुसीबत में फंसी जनता के लिए पुलिस ‘देवदूत’ बनकर सामने आए, तो महकमे का इकबाल और बढ़ जाता है। उन्नाव में मंगलवार की देर रात कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ जिले के कप्तान यानी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) जय प्रकाश सिंह ने न केवल अपनी ड्यूटी निभाई, बल्कि एक मिसाल पेश करते हुए सड़क हादसे में फंसे दो लोगों की जान बचाई।

गश्त के दौरान दिखी मौत से जूझती कार

घटना मंगलवार देर रात की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) अखिलेश सिंह और सहायक पुलिस अधीक्षक (प्रशिक्षु) संचित शर्मा के साथ जनपद में कानून व्यवस्था और रात्रि सुरक्षा का जायजा लेने के लिए गश्त पर निकले थे। पुलिस का काफिला जब थाना कोतवाली सदर क्षेत्र के अंतर्गत गांधीनगर-गदनखेड़ा मार्ग पर ‘मधुमिठास’ के सामने पहुँचा, तो अधिकारियों की नजर सड़क किनारे पलटी हुई एक सफेद वैगनआर कार पर पड़ी।

कार की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि टक्कर कितनी भीषण रही होगी। गाड़ी पूरी तरह अनियंत्रित होकर पलट गई थी और उसके अंदर दो लोग लहूलुहान हालत में फंसे हुए थे।

एसएसपी ने खुद संभाला मोर्चा, शुरू किया रेस्क्यू

हादसे को देखते ही एसएसपी जय प्रकाश सिंह ने बिना एक पल की देरी किए अपना काफिला रुकवाया। आमतौर पर बड़े अधिकारी ऐसे मामलों में मातहतों को निर्देश देकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन यहाँ एसएसपी खुद गाड़ी से उतरे और दुर्घटनाग्रस्त कार के पास पहुँच गए। उनके साथ एएसपी अखिलेश सिंह और एएसपी संचित शर्मा ने भी तत्काल मोर्चा संभाला।

अधिकारियों ने अपनी टीम और मौके पर मौजूद कुछ स्थानीय राहगीरों की मदद से कार के दरवाजे खुलवाए और अंदर फंसे दोनों घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय एसएसपी ने निर्देश दिया कि घायलों को तुरंत पुलिस के ही वाहन से जिला अस्पताल पहुँचाया जाए।

समय पर इलाज से टला बड़ा खतरा

पुलिस वाहन से तत्काल जिला अस्पताल पहुँचे घायलों का डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार किया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुँचने के कारण घायलों की स्थिति बिगड़ने से बच गई। प्राथमिक उपचार और मरहम-पट्टी के बाद जब यह सुनिश्चित हो गया कि दोनों की जान को कोई खतरा नहीं है, तब उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गदनखेड़ा मार्ग पर तेज रफ्तार या अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण कार सड़क से उतरकर पलट गई थी। पुलिस अब दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगा रही है।

“पुलिस की तत्परता ही बचाती है जान”

मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने पुलिस के इस मानवीय चेहरे की जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि अगर एसएसपी का काफिला वहां से न गुजरता या वे रुककर मदद न करते, तो घायलों की जान पर बन सकती थी।

रेस्क्यू के बाद एसएसपी जय प्रकाश सिंह ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि गश्त का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि सड़क पर मुसीबत में फंसे नागरिकों की मदद करना भी है। उन्होंने पुलिस बल को हिदायत दी कि:

  • दुर्घटना की सूचना मिलते ही ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के बाद का पहला घंटा) में रिस्पॉन्स दें।
  • संवेदनशील और अंधेरे वाले रास्तों पर विशेष निगरानी रखें।
  • आमजन को भी यातायात नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जागरूक करें।

ट्रुथ इंडिया टाइम्स की अपील: रात्रि के समय वाहन चलाते समय गति सीमा का ध्यान रखें और सतर्क रहें। पुलिस आपके सहयोग के लिए हमेशा तत्पर है, लेकिन आपकी सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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