मुख्यमंत्री के निर्देश पर बांगरमऊ CHC में छापेमारी, महीनों से बंद जनरेटर और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल

उन्नाव। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संकल्पित है, लेकिन धरातल पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मुख्यमंत्री के निर्देशों को किस तरह ठेंगा दिखा रहे हैं, इसकी बानगी उन्नाव के बांगरमऊ में देखने को मिली। सोमवार को मुख्यमंत्री के निर्देश पर जब जांच टीम बांगरमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुँची, तो अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। वर्षों से धूल फांक रही मशीनें आनन-फानन में चालू की जाने लगीं और बदहाल व्यवस्थाओं को ढंकने की नाकाम कोशिशें हुईं।

जांच टीम के पहुँचते ही ‘एक्टिव’ हुआ स्टाफ

नियोजन विभाग और स्टेट ट्रांसफॉर्मेशनल कमीशन के शोध अधिकारी हरिओम शुक्ला जब औचक निरीक्षण के लिए अस्पताल परिसर में दाखिल हुए, तो वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अस्पताल की बदहाली का आलम यह था कि जो सेवाएं महीनों से बंद पड़ी थीं, उन्हें अधिकारियों की नजरों में धूल झोंकने के लिए कुछ ही मिनटों में शुरू करने का नाटक किया गया।

निरीक्षण की शुरुआत एम्बुलेंस सेवाओं की पड़ताल से हुई। जांच अधिकारी ने जब 102 और 108 एम्बुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) से दवाओं के स्टॉक और उनके उपयोग के बारे में पूछा, तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। दवाओं के रख-रखाव में लापरवाही देखकर जांच अधिकारी ने अस्पताल अधीक्षक को सार्वजनिक रूप से कड़ी फटकार लगाई।

महीनों से बंद जनरेटर और प्यासे मरीज

अस्पताल के भीतर की स्थिति और भी भयावह मिली। इमरजेंसी वार्ड के बाहर लगा आरओ (RO) सिस्टम खराब पड़ा था, जिससे मरीज और तीमारदार भीषण गंदगी के बीच पानी के लिए भटकने को मजबूर थे। सबसे चौंकाने वाला मामला बिजली आपूर्ति का रहा। अस्पताल में लगा भारी-भरकम जनरेटर महीनों से बंद था, लेकिन जैसे ही जांच अधिकारी ने इसके संचालन पर सवाल उठाए, कर्मचारियों ने उसे तत्काल चालू कर दिया। जनरेटर के आसपास फैली गंदगी और रखरखाव की कमी पर अधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई।

इतना ही नहीं, अस्पताल में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए आनन-फानन में मिस्त्री बुलाकर नया सबमर्सिबल पंप लगवाया गया। सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल प्रशासन किसी बड़े अधिकारी के आने का इंतजार कर रहा था या फिर मरीजों की तकलीफों से उनका कोई सरोकार नहीं है?

ऑक्सीजन सप्लाई ठप, लैब और वार्डों में खामियां

अस्पताल की सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों की पोल तब खुली जब ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम की जांच की गई। जीवन रक्षक मानी जाने वाली ऑक्सीजन सप्लाई चालू हालत में नहीं मिली। इस गंभीर चूक पर जांच अधिकारी ने संबंधित कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी और इसे मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करार दिया।

जांच टीम ने इसके बाद निम्नलिखित विभागों का गहन निरीक्षण किया:

  • पैथोलॉजी लैब: रसायनों के रख-रखाव और जांच रिपोर्ट की समयबद्धता की जांच की गई।
  • एक्स-रे कक्ष: मशीनों की कार्यक्षमता और टेक्नीशियनों की उपस्थिति जांची गई।
  • जच्चा-बच्चा वार्ड एवं प्रसव कक्ष: प्रसूताओं को मिलने वाली सुविधाओं और स्वच्छता का जायजा लिया गया।
  • दवा भंडारण: एक्सपायरी डेट की दवाओं और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर रिपोर्ट तैयार की गई।

रिपोर्ट जाएगी ‘ऊपर’, गिरेगी गाज

निरीक्षण के अंत में शोध अधिकारी हरिओम शुक्ला ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अस्पताल में मिली खामियां बेहद गंभीर हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत स्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पूरी जांच का एक विस्तृत विवरण तैयार किया है, जिसे शासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।

यह निरीक्षण इस बात का प्रमाण है कि सरकारी रिकॉर्ड में ‘सब चंगा’ दिखाने वाले अस्पताल हकीकत में कितनी बदहाली से गुजर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस जांच रिपोर्ट के बाद दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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