साइबर ठगों के जाल में फंसे जेल अधीक्षक, बेटी के MBBS एडमिशन के नाम पर 50 लाख की चपत

उन्नाव: उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे कानून के रखवालों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ताजा मामला उन्नाव जिले का है, जहाँ जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) के साथ करीब 50 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया गया है। ठगों ने जेल अधीक्षक की बेटी को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का झांसा देकर पिछले 4 महीनों के दौरान किस्तों में यह मोटी रकम ऐंठ ली। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल?

जानकारी के मुताबिक, उन्नाव जेल अधीक्षक अपनी बेटी का एडमिशन किसी प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में कराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ‘जस्ट डायल’ (Just Dial) प्लेटफॉर्म के जरिए एजुकेशन कंसल्टेंसी की तलाश शुरू की। इसी दौरान उनका संपर्क एक कथित कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर से हुआ। ठगों ने खुद को बड़े संपर्कों वाला बताया और दावा किया कि वे देश के नामी मेडिकल कॉलेजों में ‘मैनेजमेंट कोटा’ के जरिए आसानी से सीट दिला सकते हैं।

4 महीने और 50 लाख का ‘एजुकेशन स्कैम’

ठगों ने जेल अधीक्षक को अपने विश्वास में लेने के लिए जाली दस्तावेज और एडमिशन लेटर तक दिखाए। बताया जा रहा है कि अगस्त 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 50 लाख रुपये की मांग की गई। कभी रजिस्ट्रेशन फीस, कभी डोनेशन तो कभी यूनिवर्सिटी चार्ज के नाम पर पैसे मांगे गए।

जेल अधीक्षक ने अपनी मेहनत की कमाई और बेटी के भविष्य के लिए ठगों के बताए खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए। लेकिन जब एडमिशन की तारीखें बीत गईं और आरोपी टालमटोल करने लगे, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर जाल में फंस चुके हैं।

जस्ट डायल की भूमिका और पुलिस की कार्रवाई

हैरानी की बात यह है कि जैसे ही पीड़ित ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, ‘जस्ट डायल’ की वेबसाइट से संबंधित कंसल्टेंसी की जानकारी और संपर्क सूत्र अचानक गायब हो गए। इससे यह साफ होता है कि ठगों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बेहद शातिराना तरीके से किया था।

अब तक की मुख्य कार्रवाई:

  • जेल अधीक्षक की तहरीर पर संबंधित धाराओं में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
  • साइबर सेल (Cyber Cell) उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें 50 लाख की राशि ट्रांसफर हुई थी।
  • ठगों के मोबाइल लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए उनकी तलाश की जा रही है।

एक्सपर्ट की राय: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा कितना सही?

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जस्ट डायल या गूगल सर्च पर मिलने वाले हर नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। अपराधी अक्सर फर्जी वेबसाइट और विज्ञापन के जरिए अपनी रेटिंग बढ़ा लेते हैं ताकि वे विश्वसनीय लगें। मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठगी का यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी के साथ ऐसी घटना होना सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

निष्कर्ष

यह घटना एक चेतावनी है कि साइबर ठगी का शिकार कोई भी हो सकता है। यदि जेल अधीक्षक जैसा उच्च अधिकारी ठगा जा सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। फिलहाल पुलिस की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही हैं।

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