सगे चाचा ने रिश्तों को किया शर्मसार! भतीजी के जेवर गिरवी रखवाकर हड़पे 4 लाख, अब जमीन हड़पने के लिए रजिस्ट्री दफ्तर में काटा हंगामा

उन्नाव। कहते हैं कि खून के रिश्ते सबसे बड़े रक्षक होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की गरिमा को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक सगे चाचा ने अपनी ही भतीजी को जमीन का झांसा देकर न केवल उसे पाई-पाई के लिए मोहताज कर दिया, बल्कि उसके सुहाग की निशानी यानी जेवर तक गिरवी रखवा दिए। मंगलवार को रजिस्ट्री कार्यालय उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब पीड़िता ने अपने चाचा की धोखाधड़ी को बीच रास्ते में पकड़ लिया। कार्यालय परिसर में जमकर हंगामा हुआ और पीड़ित महिला की चीख-पुकार सुनकर हर कोई दंग रह गया।

भतीजी का भरोसा, चाचा का धोखा: पूरी कहानी

मामला ग्राम झाऊखेड़ा (ग्राम सभा रुपऊ) का है। यहाँ की रहने वाली कलावती ने अपने चाचा दुर्गेश फूला पर विश्वासघात का गंभीर आरोप लगाया है। कलावती के मुताबिक, उसके चाचा ने कुछ समय पहले अपनी जमीन बेचने का प्रस्ताव उसके सामने रखा था। चाचा ने बड़ी आत्मीयता दिखाते हुए कहा था कि “चूंकि तुम मेरी भतीजी हो, इसलिए मैं चाहता हूँ कि यह जमीन बाहर न जाकर तुम्हारे पास ही रहे।”

चाचा के इस ‘झूठे प्यार’ के जाल में कलावती फंस गई। जमीन खरीदने के लिए उसने अपने और अपनी बेटियों के भविष्य के लिए रखे गए करीब 4 लाख 10 हजार रुपये के सोने-चांदी के जेवर गिरवी रख दिए। कलावती का दावा है कि उसने दो किस्तों में यह पूरी रकम अपने चाचा दुर्गेश को दी, जिसके गवाह आज भी मौजूद हैं।

रजिस्ट्री कार्यालय में खुला राज: दूसरे को बेच रहे थे जमीन

कलावती को बड़ा झटका तब लगा जब उसे गुपचुप तरीके से पता चला कि उसके चाचा दुर्गेश, जिस जमीन के पैसे उससे ले चुके हैं, उसी जमीन का सौदा किसी तीसरे व्यक्ति के साथ कर रहे हैं। इतना ही नहीं, मंगलवार को चाचा चुपके से रजिस्ट्री कार्यालय पहुँच गए ताकि जमीन किसी और के नाम चढ़ा सकें।

सूचना मिलते ही कलावती बदहवास हालत में रजिस्ट्री दफ्तर पहुँची। वहाँ उसने देखा कि कुछ लोग उसके चाचा पर जबरदस्ती कागजात लिखवाने का दबाव बना रहे थे। कलावती ने जैसे ही विरोध किया, उसके सगे चाचा ने मर्यादा की सारी दीवारें लांघ दीं। आरोप है कि बीच दफ्तर में चाचा ने अपनी भतीजी को गंदी-गंदी गालियां दीं और पैसे लेने की बात से साफ मुकर गए।

कोर्ट में चल रहा मुकदमा, फिर भी फर्जीवाड़े की कोशिश

हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन को लेकर यह पूरा ‘खूनी ड्रामा’ रचा जा रहा है, वह पहले से ही विवादित है। कलावती ने बताया कि उक्त जमीन पर न्यायालय में दीवानी (Civil) मुकदमा विचाराधीन है। इस संबंध में चाचा दुर्गेश को कोर्ट से नोटिस भी तामील हो चुका है। इसके बावजूद कानून को ठेंगे पर रखकर जमीन बेचने की कोशिश की जा रही थी। कलावती का आरोप है कि उसके चाचा कोर्ट के आदेशों को भी मानने को तैयार नहीं हैं।

“चार बेटियां हैं, अब क्या खाएंगे?” – फूट-फूटकर रोई कलावती

रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर अपनी आपबीती सुनाते हुए कलावती के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसने अपनी आर्थिक तबाही का जिक्र करते हुए कहा, “साहब! मेरे पास जो कुछ था, सब चला गया। मेरे जेवर गिरवी रखे हैं, जिन पर ब्याज चढ़ रहा है। मेरी चार बेटियां हैं, उनके भरण-पोषण और शादी-ब्याह का क्या होगा? मेरे पास अब जहर खाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।”

पीड़िता ने प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि यदि इस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के कारण उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

प्रशासन से न्याय की गुहार

कलावती ने जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि सबसे पहले उसके द्वारा दिए गए 4 लाख रुपये वापस दिलाए जाएं और धोखाधड़ी करने वाले चाचा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उसने गुहार लगाई है कि विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाई जाए ताकि किसी और मासूम को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सके।

एक्सपर्ट व्यू: जमीनी धोखाधड़ी से कैसे बचें?

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि जमीनी सौदों में ‘रिश्तेदारी’ से ज्यादा ‘कागजी कार्रवाई’ मायने रखती है। कानूनी जानकारों का कहना है कि:

  1. किसी भी जमीन का पैसा देने से पहले ‘एग्रीमेंट टू सेल’ (इकरारनामा) जरूर करवाएं।
  2. पैसा हमेशा बैंक ट्रांसफर या चेक के जरिए दें ताकि प्रमाण रहे।
  3. तहसील जाकर जमीन का ’12 साला’ (Encumbrance Certificate) जरूर चेक करें कि उस पर कोई लोन या मुकदमा तो नहीं है।

निष्कर्ष: झाऊखेड़ा की कलावती की कहानी आज के दौर में बढ़ते लालच और गिरते नैतिक मूल्यों का जीता-जागता उदाहरण है। रजिस्ट्री कार्यालय में हुआ यह हंगामा केवल एक महिला का विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम को चुनौती है जहाँ धोखाधड़ी करने वाले बेखौफ घूम रहे हैं। अब देखना होगा कि उन्नाव प्रशासन इस बेबस मां को न्याय दिला पाता है या नहीं।


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