‘मौत’ का पानी बांट रही मांस फैक्ट्री! बसीरतगंज में खुलेआम बह रहा जहरीला कचरा; कीड़े और दुर्गंध से नरक बना जीवन, सो रहा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ के तमाम दावों की धज्जियां उड़ा रही है। दही थाना क्षेत्र के अंतर्गत बसीरतगंज इलाके में स्थित एक मांस फैक्ट्री ने पूरे क्षेत्र को ‘गैस चैंबर’ और ‘बीमारियों का घर’ बना दिया है। फैक्ट्री से निकलने वाला खूनी, बदबूदार और जहरीला पानी बिना किसी शोधन (Treatment) के सीधे खेतों और नालों में बहाया जा रहा है।

हालत यह है कि इस पानी में रेंगते कीड़े और सड़ांध ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीण आक्रोशित हैं और प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी त्रासदी या महामारी को दावत दे रही है।

जहर बन चुका है बसीरतगंज का पानी: कीड़ों और बदबू का साम्राज्य

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन नियमों को ताक पर रखकर रात-दिन जहरीला रसायन युक्त पानी बाहर निकाल रहा है। इस पानी की प्रकृति इतनी खतरनाक है कि इसमें अजीबोगरीब संरचनाएं और बुज्जी जैसे कीड़े साफ देखे जा सकते हैं।

  • खेत बने बंजर: यह दूषित पानी आसपास के खेतों में भर रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं और जमीन की उर्वरक शक्ति खत्म हो रही है।
  • जीव-जंतुओं पर काल: ग्रामीणों का दावा है कि इस पानी को पीने या इसके संपर्क में आने से आवारा पशुओं और छोटे जीव-जंतुओं की मौतें हो रही हैं।
  • साजिश का आरोप: ग्रामीणों ने एक चौंकाने वाला आरोप लगाया है कि फैक्ट्री के कुछ कर्मचारी जानबूझकर तसलों से पानी भरकर बाहर फैला रहे हैं ताकि कचरा जल्दी से निस्तारित हो जाए, भले ही इसके लिए पूरा गांव बीमार पड़ जाए।

घर-घर में दस्तक दे रही बीमारियां: प्रशासन क्यों है मौन?

फैक्ट्री के इस ‘खूनी खेल’ का सीधा असर इंसानी जानों पर पड़ रहा है। बसीरतगंज और आसपास के गांवों में बीमारियों ने डेरा डाल लिया है।

  1. त्वचा रोग (Skin Diseases): दूषित पानी के संपर्क और हवा में फैले रसायनों के कारण लोगों को दाद, खाज और गंभीर खुजली की समस्या हो रही है।
  2. सांस लेना हुआ दूभर: मांस के अवशेषों और सड़े हुए पानी की दुर्गंध इतनी तीव्र है कि लोग घरों में मास्क लगाकर रहने को मजबूर हैं।
  3. पेट की बीमारियां: भूगर्भ जल (Ground Water) के प्रदूषित होने की आशंका के कारण बच्चों और बुजुर्गों में उल्टी, दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण देखने को मिल रहे हैं।

सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) से तीखे सवाल

यह खबर केवल एक समस्या नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के लिए एक चार्जशीट है। न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से हम ये सवाल पूछते हैं:

  • कहाँ है ETP (Effluent Treatment Plant)? नियमों के मुताबिक किसी भी मांस फैक्ट्री को अपना गंदा पानी ट्रीट करके ही बाहर निकालना चाहिए। क्या इस फैक्ट्री में ETP प्लांट केवल कागजों पर चल रहा है?
  • प्रदूषण बोर्ड की साठगांठ? इतनी भारी गंदगी और खुलेआम बहते जहरीले पानी के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने अब तक फैक्ट्री को ‘रेड नोटिस’ क्यों नहीं दिया? क्या अधिकारियों की जेबें इस जहरीले पानी से भरी जा रही हैं?
  • DPI (District Plan Office) की चुप्पी: जिला प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहा है? क्या जब बसीरतगंज में कोई महामारी फैलेगी और लाशें गिरेंगी, तभी सरकारी मशीनरी जागेगी?

ग्रामीणों की चेतावनी— “कार्रवाई नहीं तो आंदोलन”

क्षेत्रवासियों ने एकजुट होकर प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन फैक्ट्री का रसूख इतना है कि हर बार जांच ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:

  • फैक्ट्री की तुरंत जांच हो और मानक पूरे न होने पर इसे सील किया जाए।
  • प्रभावित ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के लिए मेडिकल कैंप लगाया जाए।
  • भूगर्भ जल के सैंपल लेकर उसकी लैब टेस्टिंग कराई जाए।

निष्कर्ष: विकास की कीमत विनाश तो नहीं?

इंडस्ट्रियलाइजेशन के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ कब तक चलेगा? उन्नाव की यह मांस फैक्ट्री आज उस सिस्टम का प्रतीक बन गई है जो चंद पैसों के मुनाफे के लिए हजारों लोगों की जिंदगी दांव पर लगा देता है। अगर समय रहते योगी सरकार और जिला प्रशासन ने इस ‘जहरीले साम्राज्य’ पर लगाम नहीं लगाई, तो बसीरतगंज की यह समस्या पूरे जिले के लिए स्वास्थ्य आपातकाल बन सकती है।

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