पुरवा विधायक अनिल सिंह का विवादित ऑडियो वायरल, ‘अधिकारी को मारो और फिर हरिजन एक्ट लगवाओ’ की दी सलाह

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। पुरवा विधानसभा सीट से विधायक अनिल सिंह का एक बेहद चौंकाने वाला ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर बिजली की तरह दौड़ रहा है। इस ऑडियो में विधायक कथित रूप से अपने एक कार्यकर्ता को कानून हाथ में लेने और संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग करने की खुली नसीहत देते सुनाई दे रहे हैं। वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों और विपक्षी खेमे में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

क्या है वायरल ऑडियो में?

सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इस ऑडियो में विधायक अनिल सिंह एक शिकायतकर्ता कार्यकर्ता से बात कर रहे हैं। कार्यकर्ता किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत विधायक से करता है। इस पर विधायक महोदय समाधान के रूप में कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय ‘हिंसक और विवादास्पद’ रास्ता सुझाते हैं।

विधायक को ऑडियो में कहते सुना जा सकता है— “यदि कोई अधिकारी रिश्वत मांगता है, तो उसे वहीं तीन-चार कंटाप (थप्पड़) रसीद कर दो। बस इतना ध्यान रखना कि इस पूरी घटना का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेना।” मामला यहीं नहीं रुकता, विधायक आगे कहते हैं कि चूंकि कार्यकर्ता ‘हरिजन’ समुदाय से है, इसलिए मारपीट के बाद उस अधिकारी के खिलाफ ‘हरिजन एक्ट’ (SC/ST Act) के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।

विधायक ने स्वीकारी ऑडियो की सत्यता

आमतौर पर ऐसे मामलों में नेता ऑडियो को ‘फेक’ या ‘एडिटेड’ बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन विधायक अनिल सिंह ने स्पष्ट रूप से इसे स्वीकार कर लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह आवाज उन्हीं की है, हालांकि उन्होंने इसे पुराना बताया।

मीडिया से बातचीत में विधायक ने अपने बचाव में कहा, “यह ऑडियो उस समय का है जब अधिकारियों की मनमानी और रिश्वतखोरी चरम पर थी। जब बार-बार चेतावनी के बावजूद जनता का काम नहीं हो रहा था, तो मजबूरी में एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मुझे कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ा। मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ हूँ और रहूँगा।”

संवैधानिक मर्यादाओं पर उठे गंभीर सवाल

विधायक की दलील अपनी जगह हो सकती है, लेकिन एक जनप्रतिनिधि द्वारा थप्पड़ मारने और विशेष जाति का लाभ उठाकर ‘एक्ट’ लगवाने की सलाह देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  1. कानून व्यवस्था: क्या एक विधायक को कानून हाथ में लेने की उकसाने का अधिकार है?
  2. एक्ट का दुरुपयोग: क्या हरिजन एक्ट जैसे गंभीर कानूनों का उपयोग व्यक्तिगत रंजिश या अधिकारियों को डराने के लिए किया जाना चाहिए?
  3. प्रशासनिक सुरक्षा: यदि जनप्रतिनिधि ही मारपीट की सलाह देंगे, तो अधिकारी निडर होकर कार्य कैसे कर पाएंगे?

विपक्ष हमलावर, राजनीतिक गलियारों में हलचल

ऑडियो वायरल होते ही विपक्ष ने इसे सरकार और सत्ताधारी दल की मानसिकता से जोड़ दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह ऑडियो “जंगलराज” की बानगी है। एक जनप्रतिनिधि को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए, न कि अराजकता को बढ़ावा देना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी जनता दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ विधायक का ‘देसी अंदाज’ बता रहे हैं, तो वहीं कानून के जानकार इसे अपराधिक कृत्य को बढ़ावा देना (Abetment of Crime) मान रहे हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार

जिस अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है, उसकी ओर से अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। वहीं, पुलिस और जिला प्रशासन ने भी अभी तक किसी औपचारिक जांच की पुष्टि नहीं की है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में कोई शिकायत दर्ज होती है, तो विधायक के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है कि सलाह उन्होंने ही दी थी।

भले ही विधायक इसे ‘पुराना’ बताकर रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन “कंटाप मारो और एक्ट लगवाओ” वाला यह फॉर्मूला उन्नाव की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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