गंगा की निर्मलता के नाम पर ₹65 करोड़ का दांव
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव। धर्म और आस्था की प्रतीक मां गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के सरकारी दावों के बीच उन्नाव जनपद के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। नमामि गंगे योजना के तहत अहमद नगर क्षेत्र के मुन्नू बगिया में नवनिर्मित 5 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का ट्रायल रन शुरू कर दिया गया है। करोड़ों की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट अब चार बड़े नालों के जहर को गंगा में मिलने से रोकने का दावा कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह महज एक सरकारी आंकड़ा है या धरातल पर गंगा वाकई स्वच्छ होगी?
करोड़ों का बजट और वर्षों का इंतजार
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के निर्देशन में मार्च 2021 में शुरू हुई यह परियोजना करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद अपने अंतिम चरण में पहुंची है। इस पूरी कार्ययोजना की कुल लागत 65.18 करोड़ रुपये है।
इस बजट का विश्लेषण करें तो सरकारी कार्यशैली और भविष्य की योजना पर कई सवाल और तथ्य सामने आते हैं:
- निर्माण लागत: ₹27.83 करोड़ (प्लांट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए)।
- संचालन एवं रखरखाव: ₹37.35 करोड़ (अगले 15 वर्षों के लिए)।
यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार निर्माण से ज्यादा पैसा इसके संचालन पर खर्च कर रही है। ऐसे में जनता की जवाबदेही यह बनती है कि क्या 15 सालों तक यह प्लांट वाकई अपनी पूरी क्षमता से काम करेगा या पूर्व के कई प्रोजेक्ट्स की तरह देख-रेख के अभाव में सफेद हाथी साबित होगा?
चार बड़े नालों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का दावा
अधिशासी अभियंता अमित कुमार के अनुसार, नगर पालिका परिषद गंगाघाट क्षेत्र के उन चार प्रमुख नालों को पूरी तरह से टैप (बंद) कर दिया गया है, जो दशकों से गंगा में गंदगी उगल रहे थे। ये नाले हैं:
- इन्दिरा नगर नाला (सबसे बड़ा प्रदूषक स्रोत)
- मनोहर नगर-1
- मनोहर नगर-2
- रेलवे ब्रिज नाला
इन नालों का घरेलू सीवेज अब सीधे गंगा में न गिरकर पाइपलाइनों के जरिए मुन्नू बगिया स्थित एसटीपी तक पहुंचेगा। यहाँ वैज्ञानिक पद्धति से पानी को शोधित किया जाएगा और उसके बाद ही उसे नदी में छोड़ा जाएगा या सिंचाई के काम में लिया जाएगा।
तीन महीने का ‘अग्निपरीक्षा’ काल
मंगलवार से शुरू हुआ यह ट्रायल रन अगले तीन महीनों तक चलेगा। इस दौरान मेसर्स कानपुर रिवर मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की तकनीकी टीम प्लांट की कार्यक्षमता की जांच करेगी।
- क्या जांचा जाएगा? शोधित पानी की बीओडी (BOD) और सीओडी (COD) मात्रा, बैक्टीरिया रिमूवल रेट और बिजली की खपत।
- जवाबदेही: यदि ट्रायल के दौरान तकनीकी खामियां आती हैं, तो क्या निर्माण कंपनी पर दंड लगाया जाएगा? प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि इस ट्रायल की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
अधूरे अभियान और प्रशासन के सामने चुनौतियां
भले ही 5 एमएलडी का यह प्लांट शुरू हो गया हो, लेकिन उन्नाव और शुक्लागंज क्षेत्र में गंगा प्रदूषण की समस्या इतनी विकराल है कि केवल एक प्लांट इसे हल नहीं कर सकता। अभी भी दर्जनों छोटे-बड़े नाले और औद्योगिक इकाइयां (खासकर टेनरियां) अप्रत्यक्ष रूप से गंगा को प्रदूषित कर रही हैं।
प्रशासन से सीधे सवाल:
- क्षमता का सवाल: क्या 5 एमएलडी की क्षमता भविष्य में बढ़ती आबादी के सीवेज को झेलने के लिए पर्याप्त है?
- बिजली आपूर्ति: अक्सर देखा गया है कि बिजली कटने या जनरेटर में तेल न होने के बहाने एसटीपी बंद कर दिए जाते हैं और बाईपास के जरिए गंदा पानी नदी में छोड़ दिया जाता है। इसकी निगरानी के लिए क्या कोई ‘रियल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम’ लगाया गया है?
- टैनरी कचरा: घरेलू सीवेज तो टैप हो गया, लेकिन अवैध रूप से बहने वाले औद्योगिक कचरे पर लगाम कब लगेगी?
स्वच्छ वातावरण की उम्मीद
मुन्नू बगिया और अहमद नगर के स्थानीय निवासियों के लिए यह प्रोजेक्ट राहत की खबर लेकर आया है। नालों के टैप होने से क्षेत्र में फैलने वाली दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों के खतरे में कमी आने की उम्मीद है। जल निगम के अधिकारियों का दावा है कि इस मॉडल को जिले के अन्य प्रदूषित क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
निष्कर्ष: आस्था और अधिकार के बीच का संतुलन
गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। नमामि गंगे के तहत 65 करोड़ खर्च करना तब सार्थक होगा जब गंगा के जल में जलीय जीव सुरक्षित रहें और वह आचमन के योग्य बने। प्रशासन को केवल ‘ट्रायल रन’ शुरू करके अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री नहीं कर लेनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक बूंद भी अशोधित पानी गंगा की लहरों को मैला न करे।
‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ इस प्रोजेक्ट की प्रगति और इसकी गुणवत्ता पर अपनी नजर बनाए रखेगा।
बने रहें ‘Truth India Times’ के साथ, हर खबर की गहराई तक।
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.