उन्नाव के 6 लाख बैंक खातों में ‘डंप’ हैं 132 करोड़ रुपये, RBI की इस योजना से आपको वापस मिलेगा पैसा

उन्नाव: अगर आपका या आपके किसी परिजन का बैंक खाता सालों से बंद पड़ा है, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्नाव जिले के विभिन्न बैंकों में करीब 6 लाख ऐसे खाते सामने आए हैं, जिनमें पिछले 10 वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इन खातों में कुल 132 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि डंप पड़ी है। अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस लावारिस धन को उनके असली हकदारों तक पहुँचाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।

‘आपकी पूंजी आपका अधिकार’ योजना की शुरुआत

बैंकिंग नियमों के अनुसार, जिन खातों में 10 साल तक कोई गतिविधि (जमा या निकासी) नहीं होती, उन्हें ‘इनऑपरेटिव’ या निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया जाता है। उन्नाव जिले में एसबीआई (SBI), पीएनबी (PNB), सीबीआई (CBI) समेत करीब 25 सरकारी, गैर-सरकारी और सहकारी बैंकों की 150 शाखाएं सक्रिय हैं। इन सभी शाखाओं के डेटा खंगालने पर पता चला कि करोड़ों रुपये की बचत राशि बिना किसी दावेदार के बैंकों में जमा है। इसी को देखते हुए RBI ने ‘आपकी पूंजी आपका अधिकार’ योजना लागू की है।

उद्गम (UDGAM) पोर्टल: घर बैठे पता करें अपना पैसा

रिजर्व बैंक ने जनता की सुविधा के लिए एक सेंट्रलाइज्ड वेब पोर्टल ‘उद्गम’ (Unclaimed Deposits – Gateway to Access Information) तैयार किया है। इस पोर्टल के जरिए कोई भी व्यक्ति यह चेक कर सकता है कि क्या उसका या उसके पूर्वजों का कोई पैसा बैंक में फंसा हुआ है।

  • कैसे चेक करें: पोर्टल पर जाकर अपना नाम, आधार कार्ड नंबर या पैन कार्ड नंबर दर्ज करना होगा।
  • बैंक जाने का विकल्प: यदि पोर्टल पर जानकारी नहीं मिल रही है और आपको संदेह है कि आपका पुराना खाता उस बैंक में था, तो आप सीधे बैंक की शाखा में जाकर भी अपनी पासबुक या पुराने दस्तावेजों के जरिए जांच करा सकते हैं।

45 लोगों को वापस मिल चुके हैं 20 लाख रुपये

इस योजना का असर जिले में दिखना शुरू हो गया है। अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) बैंक ऑफ इंडिया, आरके गौतम ने बताया कि जिले में निष्क्रिय खातों की फाइनल लिस्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक जागरूकता के अभाव में लोग अपने पैसे नहीं निकाल पा रहे थे, लेकिन हाल ही में 45 खाताधारकों की पहचान कर उनके 20 लाख रुपये वापस कराए जा चुके हैं।

क्यों डंप हो जाता है पैसा?

अक्सर देखा गया है कि लोग एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट होने पर पुराना खाता बंद करना भूल जाते हैं। कई मामलों में खाताधारक की मृत्यु के बाद परिजनों को खाते की जानकारी नहीं होती, या फिर नॉमिनी (वारिस) का नाम दर्ज न होने के कारण पैसा बैंक में ही पड़ा रह जाता है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे खातों की संख्या काफी अधिक है।

पैसा वापस पाने की प्रक्रिया

अगर आपको ‘उद्गम’ पोर्टल या बैंक के जरिए पता चलता है कि आपका पैसा डंप है, तो आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  1. संबंधित बैंक शाखा में जाकर KYC (Know Your Customer) दस्तावेज जमा करें।
  2. अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और नवीनतम फोटो बैंक को उपलब्ध कराएं।
  3. यदि खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है, तो वारिस को मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकार पत्र पेश करना होगा।
  4. सत्यापन के बाद, बैंक नियमानुसार पूरी धनराशि आपके चालू खाते में ट्रांसफर कर देगा।

अग्रणी जिला प्रबंधक का संदेश:

“आम नागरिक रिजर्व बैंक के उद्गम पोर्टल का लाभ उठाएं। यह आपकी मेहनत की कमाई है और इसे नियमानुसार वापस पाने का आपको पूरा अधिकार है। बैंक इस प्रक्रिया में खाताधारकों का पूरा सहयोग कर रहे हैं।”


खबर का सारांश (Quick Facts):

विवरणआंकड़े
कुल निष्क्रिय खातेलगभग 6 लाख
कुल डंप धनराशि132 करोड़ रुपये
बैंकों की संख्या25 (सरकारी व निजी)
कुल शाखाएं150 (लगभग)
रिकवरी पोर्टलउद्गम (UDGAM)

About The Author


Discover more from Truth India Times

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Related Posts

उन्नाव: जमीन विवाद में बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने बेटे पर लगाया हत्या और बंधक बनाने का गंभीर आरोप

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) उन्नाव। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सनसनी फैल गई है। मृतका…

उन्नाव में अवैध खनन माफियाओं पर प्रशासन का हंटर: गंगाघाट में पोकलैंड और जेसीबी सीज, एडीएम बोले- ‘बख्शे नहीं जाएंगे दोषी’

प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times) उन्नाव | उन्नाव जिले में अवैध खनन के काले कारोबार पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Discover more from Truth India Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading