उन्नाव पुलिस की ‘धायं-धायं’: शातिर चोर शेरा के पैर में लगी सरकारी गोली; मंदिरों के घंटे चुराने वाला ‘लंगड़ा’ होकर पहुंचा अस्पताल, साथी फरार!

उन्नाव (असोहा)। उन्नाव में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चल रहा ‘ऑपरेशन क्लीन’ गुरुवार रात एक बार फिर चर्चा में आ गया। असोहा पुलिस, एसओजी (SOG) और सर्विलांस टीम की संयुक्त घेराबंदी में शातिर चोर शेरा उर्फ गोलू को पुलिस की गोली का स्वाद चखना पड़ा। जंगलीखेड़ा नहर पुलिया के पास हुई इस मुठभेड़ में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जो सीधे बदमाश के पैर में जा धंसी। पुलिस ने मौके से करीब 1.5 क्विंटल पीतल के घंटे और अवैध असलहा बरामद किया है, लेकिन एक सवाल अभी भी हवा में है—आखिर ‘शेरा’ का साथी अंधेरे को चीरकर कैसे निकल गया?

आधी रात को ‘मुठभेड़’ और खौफनाक अंत

जानकारी के अनुसार, असोहा पुलिस भल्लाफार्म-कालूखेड़ा मार्ग पर संदिग्धों की तलाश में थी। तभी एक मोटरसाइकिल पर दो युवक आते दिखे। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन रुकने के बजाय बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग झोंक दी। खुद को बचाते हुए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें 26 वर्षीय शेरा उर्फ गोलू पुत्र पन्नालाल घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा।

पुलिस की गिरफ्त में आया शेरा शातिर किस्म का अपराधी है, जिसने औरास, सफीपुर और माखी सहित आधा दर्जन से ज्यादा थानों की पुलिस की नाक में दम कर रखा था। उसके पास से मंदिरों से चोरी किए गए करीब 150 किलो पीतल के घंटे मिले हैं, जो बताते हैं कि उसने धर्मस्थलों को भी नहीं बख्शा।

पुलिस की मुस्तैदी या ‘पैटर्न’ वाली कार्रवाई?

मुठभेड़ के बाद शेरा को सीएचसी असोहा में भर्ती कराया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उस पर 9 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन इस एनकाउंटर ने कुछ गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं जिनका जवाब मिलना जरूरी है:

  1. मंदिरों की सुरक्षा का क्या? शेरा के पास से डेढ़ क्विंटल पीतल के घंटे मिले। क्या उन्नाव के मंदिरों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं? इतनी भारी मात्रा में चोरी होने तक विभाग क्या कर रहा था?
  2. फरार साथी का रहस्य: अक्सर एनकाउंटर की खबरों में एक आरोपी पैर में गोली लगने से पकड़ा जाता है और दूसरा ‘अंधेरे का फायदा’ उठाकर भाग जाता है। क्या हमारी पुलिस और एसओजी की घेराबंदी इतनी कमजोर है कि शातिर अपराधी आसानी से चकमा दे देते हैं?
  3. हथियारों की सप्लाई चेन: पकड़े गए बदमाश के पास से 315 बोर का तमंचा मिला। उन्नाव में अवैध असलहों की यह मंडी कहाँ चल रही है? मुख्य सप्लायर तक पुलिस के हाथ कब पहुँचेंगे?
  4. 9 मुकदमों के बाद भी बाहर: शेरा पर 9 मुकदमे दर्ज थे। क्या वह जमानत पर बाहर था या पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम थी? अगर वह पहले ही जेल में होता, तो शायद इतनी चोरी की वारदातें रुक सकती थीं।
  5. मुखबिर तंत्र की नाकामी: पुलिस को मुठभेड़ का इंतजार क्यों करना पड़ता है? क्या चोरी का माल खरीदने वाले सर्राफा कारोबारियों या कबाड़ियों पर कोई कार्रवाई होगी?

रिकॉर्ड में ‘शेरा’, सड़कों पर ‘दहशत’

शेरा उर्फ गोलू निवासी रउकरना, थाना माखी, फिलहाल दही थाना क्षेत्र के औद्योगिक इलाके में छिपा बैठा था। पुलिस की मानें तो वह गिरोह बनाकर चोरी करता था। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने पैशन प्रो बाइक और खोखा कारतूस बरामद किए हैं। एसपी के निर्देश पर फरार आरोपी की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं, लेकिन इलाके के लोगों में अब भी दहशत का माहौल है।

निष्कर्ष: एनकाउंटर से समाधान या सवाल?

बेशक, एक शातिर अपराधी का पकड़ा जाना पुलिस की सफलता है, लेकिन सिर्फ पैर में गोली मार देने से अपराध खत्म नहीं होगा। जब तक चोरी का माल खपाने वाले गिरोह और अवैध हथियारों की फैक्ट्री पर ताला नहीं लगेगा, तब तक नए ‘शेरा’ पैदा होते रहेंगे। प्रशासन को चाहिए कि वह रात्रि गश्त बढ़ाए और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करे ताकि श्रद्धालुओं की आस्था सुरक्षित रहे।

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