हवा में जहर घोल रहा चिमनियों से निकलता धुंआ, उन्नाव में भी हो रहे दिल्ली जैसे हालत

-प्रदूषण विभाग की लापरवाही, खांसी और अस्थमा के मरीजों की बढ़ी तदात


-दूषित हवा से फेफड़ों का कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ा


उन्नाव संवाददाता। उत्तर प्रदेश का औद्योगिक केंद्र कहा जाने वाला उन्नाव जिला अब धीरे-धीरे ‘गैस चेंबर’ में तब्दील होता जा रहा है। दही चौकी, मगरवार, गोकुलबाबा और बंथर जैसे क्षेत्रों में स्थित दर्जनों फैक्ट्रियों की चिमनियों से दिन-रात निकलने वाला काला धुआं शहर की आबोहवा में जहर घोल रहा है। स्थिति यह है कि उन्नाव की वायु गुणवत्ता (AQI) देश की राजधानी दिल्ली की तर्ज पर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंचने लगी है, जिससे आम नागरिक का सांस लेना भी दूबर गया है।


​चिमनियों का काला साया और दमघोंटू हवा
​स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय आसमान में धुंध और जहरीले धुएं की एक मोटी परत जमा हो जाती है। लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियां मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ा रही हैं। कई फैक्ट्रियों में लगे प्रदूषण नियंत्रण यंत्र या तो खराब हैं या खर्च बचाने के लिए उन्हें केवल दिखावे के लिए रखा गया है। रात के अंधेरे में ये उद्योग और भी अधिक मात्रा में जहरीला धुआं छोड़ते हैं, जिसका असर अगली सुबह आँखों में जलन और गले में खराश के रूप में महसूस किया जाता है।


प्रदूषण विभाग की ‘खामोश’ सहमति?
​स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदूषण विभाग की मिलीभगत और लापरवाही के चलते ही फैक्ट्री मालिक बेखौफ होकर जहर उगल रहे हैं। मानकों के अनुसार चिमनियों की ऊंचाई और उनमें लगे फिल्टर की नियमित जांच होनी चाहिए, लेकिन विभागीय अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित हैं। हाल ही में कुछ अधिकारियों पर अनियमितता के आरोप भी लगे हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।


अस्पतालों में बढ़ रही सांस के मरीजों की तादाद
​प्रदूषण का सबसे भयानक असर आम जनमानस के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में खांसी, जुकाम और गंभीर अस्थमा के मरीजों की कतारें लंबी होती जा रही हैं।


​बच्चों और बुजुर्गों पर असर: जहरीली हवा के कारण सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हैं।


डॉक्टरों की चेतावनी: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद PM_{2.5} और PM_{10} कणों की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक है। लंबे समय तक इस वातावरण में रहने से फेफड़ों का कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है।


​उन्नाव बनाम दिल्ली: बढ़ता खतरा आंकड़ों की तुलना करें तो उन्नाव का AQI अक्सर 200 से 300 के पार जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद ‘हानिकारक’ है। यदि समय रहते इन अवैध रूप से धुआं उगलती चिमनियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो उन्नाव की स्थिति दिल्ली के भीषण प्रदूषण से भी बदतर हो सकती है।

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