उन्नाव में रेलवे का 'हथौड़ा' चलने की आहट
उन्नाव | उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में विकास और आशियाने के बीच एक बड़ी जंग छिड़ गई है। अमृत भारत रेलवे स्टेशन परियोजना के तहत हो रहे आधुनिकीकरण के बीच रेलवे प्रशासन ने शहर के पश्चिमी क्षेत्र में वर्षों से रह रहे दर्जनों परिवारों की नींद उड़ा दी है। रेलवे ने कानपुर पुल के बाएं किनारे पर स्थित एक दर्जन से अधिक मकानों पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा कर दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से कड़ाके की ठंड में दर्जनों परिवारों पर बेघर होने की तलवार लटक गई है।
16 जनवरी को चलेगा पीला पंजा, नोटिस से मचा हड़कंप
सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) शिव कुमार गुप्ता के निर्देश पर रेलवे की टीम ने इन मकानों पर नोटिस चस्पा किए हैं। नोटिस के माध्यम से स्थानीय निवासियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे 15 जनवरी तक स्वयं अपना अवैध निर्माण हटा लें। यदि 15 जनवरी तक निर्माण नहीं हटाया गया, तो 16 जनवरी को रेलवे प्रशासन एक बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर इन मकानों को जमींदोज कर देगा। विभाग का कहना है कि यह भूमि रेलवे की है और यहाँ चल रहे ‘इंप्रूवमेंट एवं डेवलपमेंट’ कार्य में ये मकान बाधक बन रहे हैं।
“पचास साल से रह रहे हैं, अब अचानक अतिक्रमणकारी कैसे हो गए?”
रेलवे की इस कार्रवाई का स्थानीय स्तर पर व्यापक विरोध शुरू हो गया है। प्रभावित होने वाले निवासियों में सुरेंद्र गुप्ता, अजय, रोहित, रिंकू साहू, किशन गुप्ता, बाल मुकुंद, जितेंद्र, रवि वर्मा और सूरज साहू सहित दर्जनों लोग शामिल हैं।
इन लोगों का कहना है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से इसी जमीन पर रह रहे हैं। स्थानीय निवासी सुरेंद्र गुप्ता और रिंकू साहू ने भावुक होते हुए कहा, “जब यहाँ सिर्फ झाड़ियाँ थीं और हम कच्चे घरों में गुजारा करते थे, तब रेलवे ने कभी आकर नहीं पूछा। आज जब हमने खून-पसीने की कमाई से पक्के मकान खड़े कर लिए हैं, तो हमें अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है।” निवासियों का दावा है कि उनके पास अपनी भूमि की रजिस्ट्री और दशकों पुराने वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
मानवीय संवेदना बनाम रेलवे का विकास
प्रभावित परिवारों का तर्क है कि यदि यह जमीन रेलवे की थी, तो पिछले कई दशकों से इस पर निर्माण कार्य क्यों होने दिया गया? प्रशासन ने बिजली के कनेक्शन, पानी की आपूर्ति और अन्य सरकारी सुविधाओं को यहाँ पहुँचने से क्यों नहीं रोका? अचानक बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के इस तरह का नोटिस देना मानवीय दृष्टि से गलत है।
स्थानीय निवासियों ने सरकार और रेलवे बोर्ड से मांग की है कि:
- सबसे पहले भूमि का सीमांकन पारदर्शी तरीके से किया जाए।
- यदि भूमि रेलवे की ही निकलती है, तो बेघर होने वाले परिवारों को ‘पुनर्वास योजना’ के तहत वैकल्पिक आवास या भूमि दी जाए।
- ठंड के मौसम को देखते हुए मानवीय आधार पर इस कार्रवाई को फिलहाल टाला जाए।
पिछली कार्रवाई की यादों से सहमे लोग
आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ने उन्नाव में इस तरह की कार्रवाई की हो। पिछले वर्ष भी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ही राजीव नगर खंती क्षेत्र में करीब 150 मकानों और अवैध निर्माणों को रेलवे ने ध्वस्त कर दिया था। उस समय भी भारी हंगामे और विरोध के बावजूद बुलडोजर चला था। उसी कार्रवाई का डर अब इस क्षेत्र के लोगों के मन में घर कर गया है।
रेलवे प्रशासन का पक्ष: आधुनिकीकरण के लिए जरूरी
दूसरी ओर, रेलवे प्रशासन अपनी योजना पर अडिग है। अधिकारियों का तर्क है कि अमृत भारत रेलवे स्टेशन परियोजना प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसके तहत स्टेशन का कायाकल्प, यात्री सुविधाओं का विस्तार और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाना है। रेलवे के अनुसार, जिन स्थानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं, वे रेलवे की सीमा के भीतर आते हैं और विकास कार्यों के लिए इस जमीन को खाली करना अनिवार्य है। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियम और कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।
आंदोलन की चेतावनी
नोटिस चस्पा होने के बाद से ही क्षेत्र में अनिश्चितता और भय का माहौल बना हुआ है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मकान गिराए, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई जा रही है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर गरीबों के सिर की छत बचाएं।
रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
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