गंगाघाट स्टेशन पर रेलवे का ‘बुलडोजर’ एक्शन तैयार: 15 जनवरी तक मकान खाली करने का अल्टीमेटम, अमृत भारत योजना के लिए हटेगा अवैध कब्जा

उन्नाव/शुक्लागंज। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शुक्लागंज क्षेत्र में रेलवे की बेशकीमती भूमि पर दशकों से जमे अवैध कब्जेदारों पर अब प्रशासन का डंडा चलने वाला है। उत्तर रेलवे ने गंगाघाट रेलवे स्टेशन के निकट बने अवैध मकानों और भवनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के आधुनिकीकरण कार्यों में बाधा बन रहे इन निर्माणों को हटाने के लिए रेलवे ने अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। इस सख्त कदम से पश्चिमी चौकी और पुराने गंगापुल के आसपास बसे सैकड़ों परिवारों में हड़कंप मच गया है।

15 जनवरी 2026: डेडलाइन तय, 16 को चलेगा पीला पंजा

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) शिव कुमार गुप्ता की ओर से आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद, रेलवे की टीम ने संबंधित क्षेत्रों में जाकर भवनों पर लाल निशान और नोटिस चस्पा कर दिए हैं। जारी नोटिस में दो-टूक शब्दों में कहा गया है कि जिन लोगों ने रेलवे की सीमा के भीतर पक्के या कच्चे निर्माण किए हैं, वे 15 जनवरी 2026 तक स्वयं इन्हें ध्वस्त कर अपनी गृहस्थी समेट लें।

रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तिथि तक भूमि खाली नहीं की गई, तो 16 जनवरी 2026 को रेलवे का दस्ता भारी पुलिस बल और बुलडोजर (पीला पंजा) के साथ मौके पर पहुंचेगा और अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया जाएगा। खास बात यह है कि इस ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में आने वाला समस्त व्यय भी नियमानुसार कब्जाधारियों से ही वसूला जाएगा।

अमृत भारत योजना: क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?

गंगाघाट रेलवे स्टेशन का चयन केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, विकास कार्यों के लिए स्टेशन परिसर का विस्तार अनिवार्य है।

  • सौंदर्यीकरण और विस्तार: योजना के तहत स्टेशन के प्रवेश द्वारों का चौड़ीकरण, नए प्लेटफॉर्म्स का निर्माण और पार्किंग एरिया का विस्तार किया जाना है।
  • यात्री सुविधाएं: आधुनिक प्रतीक्षालय, लिफ्ट, एस्केलेटर और कैंटीन सुविधाओं के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, जिस पर वर्तमान में अवैध कब्जे हैं।
  • सुरक्षा व्यवस्था: रेलवे ट्रैक के पास बने ये मकान न केवल परिचालन में बाधक हैं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी बड़े खतरे के रूप में देखे जा रहे हैं।

पश्चिमी चौकी और पुराने गंगापुल के पास सन्नाटा

जैसे ही रेलवे की टीम नोटिस लेकर पश्चिमी चौकी और पुराने गंगापुल के पास पहुंची, वहां के निवासियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई परिवार ऐसे हैं जो पिछले 30-40 वर्षों से यहां पक्का मकान बनाकर रह रहे हैं। स्थानीय निवासी राम औतार (बदला हुआ नाम) ने बताया, “हमें पता था कि यह रेलवे की जमीन है, लेकिन इतने वर्षों तक किसी ने नहीं टोका। अब अचानक घर छोड़ने का नोटिस मिलने से हम बेघर हो जाएंगे।”

हालांकि, रेलवे प्रशासन का कहना है कि कानूनन रेलवे की भूमि पर कभी भी मालिकाना हक नहीं मिलता और सार्वजनिक हित व विकास कार्यों के लिए अवैध निर्माणों का हटना अपरिहार्य है।

प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा इंतजाम

इस बड़े अतिक्रमण हटाओ अभियान (Anti-Encroachment Drive) को सफल बनाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के साथ जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा। 16 जनवरी को होने वाली संभावित कार्रवाई के मद्देनजर संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर लिया गया है ताकि विरोध की स्थिति में शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

अवैध कब्जेदारों को चेतावनी: न करें दोबारा गलती

रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर शिव कुमार गुप्ता ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी बहकावे में आकर सरकारी या रेलवे की जमीन पर निर्माण न करें। उन्होंने कहा कि रेलवे अब अपनी भूमि की सीमाओं का डिजिटल मानचित्रण कर रहा है, जिससे भविष्य में अवैध कब्जा करना असंभव होगा।

क्षेत्र में हलचल और कानूनी सलाह

नोटिस मिलने के बाद कुछ लोग कानूनी राहत की तलाश में वकीलों के चक्कर काट रहे हैं, तो कुछ ने अपना कीमती सामान अन्य स्थानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। स्थानीय बाजार में भी इस कार्रवाई की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि कई दुकानें भी रेलवे की जद में आ रही हैं।

निष्कर्ष: गंगाघाट रेलवे स्टेशन का कायाकल्प शुक्लागंज और उन्नाव के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। जहाँ एक ओर आधुनिकीकरण से लाखों यात्रियों को लाभ होगा, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बसे लोगों के लिए यह एक मुश्किल घड़ी है। अब देखना यह होगा कि 15 जनवरी तक कितने लोग स्वयं कब्जा हटाते हैं और 16 जनवरी को रेलवे का क्या रुख रहता है।


निर्भीक पत्रकारिता, विकास की खबर – ट्रुथ इंडिया टाइम्स

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